तीज जैसे पारंपरिक पर्व हमारी संस्कृति, लोकगीतों एवं आपसी भाईचारे को जीवंत बनाए रखने का सशक्त माध्यम-डॉ कविता परमार
झारखंड क्षत्रिय महिला संघ की बागबेड़ा इकाई के तत्वावधान में तीज उत्सव हर्षोल्लास, पारंपरिक उल्लास एवं सांस्कृतिक गरिमा के साथ मनाया गया कार्यक्रम का शुभारंभ झारखंड क्षत्रिय महिला संघ की अध्यक्ष डॉ. कविता परमार, महासचिव मंजू सिंह, सचिव पुष्पा सिंह तथा बागबेड़ा इकाई की अध्यक्ष संध्या सिंह एवं लीलावती सिंह द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित एवं गणेश वंदना के साथ किया गया

तीज जैसे पारंपरिक पर्व हमारी संस्कृति, लोकगीतों एवं आपसी भाईचारे को जीवंत बनाए रखने का सशक्त माध्यम-डॉ कविता परमार

जमशेदपुर- झारखंड क्षत्रिय महिला संघ की बागबेड़ा इकाई के तत्वावधान में तीज उत्सव हर्षोल्लास, पारंपरिक उल्लास एवं सांस्कृतिक गरिमा के साथ मनाया गया

कार्यक्रम का शुभारंभ झारखंड क्षत्रिय महिला संघ की अध्यक्ष डॉ. कविता परमार, महासचिव मंजू सिंह, सचिव पुष्पा सिंह तथा बागबेड़ा इकाई की अध्यक्ष संध्या सिंह एवं लीलावती सिंह द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित एवं गणेश वंदना के साथ किया गया।

इसके पश्चात सभी महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों एवं सोलह श्रृंगार में सुसज्जित होकर उत्साहपूर्वक कार्यक्रम में भाग लिया, जिससे संपूर्ण वातावरण सांस्कृतिक रंगों से सराबोर हो उठा।
कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित श्रृंगार प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने अपनी पारंपरिक सुंदरता एवं सृजनात्मकता का आकर्षक प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में ज्योति सिंह ने प्रथम एवं रीना सिंह ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। विजेताओं को सम्मानित कर उनकी प्रतिभा की सराहना की गई।
कार्यक्रम का प्रभावी एवं सफल संचालन झारखंड क्षत्रिय महिला संघ की केंद्रीय सचिव श्रीमती पुष्पा सिंह ने किया, जबकि बागबेड़ा इकाई की अध्यक्ष श्रीमती संध्या सिंह के नेतृत्व में पूरे कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन संपन्न हुआ।
इस अवसर पर संघ की अध्यक्ष डॉ. कविता परमार, महासचिव श्रीमती मंजू सिंह*, सभी इकाइयों की अध्यक्षगण, केंद्रीय पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में सदस्याओं की गरिमामयी उपस्थिति रही।
अपने संबोधन में अध्यक्ष डॉ. कविता परमार ने कहा कि झारखंड क्षत्रिय महिला संघ का उद्देश्य महिलाओं में आत्मनिर्भरता की भावना विकसित करना, भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं का संरक्षण करना तथा महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को केवल पारिवारिक जिम्मेदारियों तक सीमित न रहकर अपने भीतर छिपी प्रतिभा और हुनर को पहचानते हुए आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का प्रयास करना चाहिए। तीज जैसे पारंपरिक पर्व हमारी संस्कृति, लोकगीतों एवं आपसी भाईचारे को जीवंत बनाए रखने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने महिलाओं से अपने एवं अपने परिवार के स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने का आह्वान करते हुए कहा कि स्वस्थ नारी ही स्वस्थ समाज की आधारशिला होती है। साथ ही उन्होंने महिलाओं से एक-दूसरे के सुख-दुख में सहभागी बनकर संगठन की एकता एवं महिला शक्ति को और सशक्त बनाने का संदेश दिया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में अंजू , सारिका , किरण , रीता गीता एवं रीना का विशेष योगदान रहा
कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, पारंपरिक गीत-संगीत, मनोरंजक गतिविधियाँ तथा आपसी संवाद ने सभी महिलाओं का मन मोह लिया। अंत में सभी महिलाओं ने एक-दूसरे को तीज पर्व की शुभकामनाएँ दीं तथा भविष्य में भी सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता निभाने का संकल्प लिया।




