जमशेदपुर में नाटक “खुदीराम बोस” का सफल मंचन, अमर शहीद की शहादत देख भावुक हुए दर्शक
झारखंड बंगाली भाषा समन्वय संघ' के सौजन्य से गीता थिएटर के युवा कलाकारो ने साकची उच्च विद्यालय के संघ कार्यालय में प्रस्तुत किए नाटक खुदीराम बोस भाषा हमारा गौरव है! भाषा हमारा धर्म है के संकल्प के साथ एकजुट हुए शहर के सैकड़ों बंग्लाभाषी -प्रेमी

जमशेदपुर में नाटक “खुदीराम बोस” का सफल मंचन, अमर शहीद की शहादत देख भावुक हुए दर्शक

‘झारखंड बंगाली भाषा समन्वय संघ’ के सौजन्य से गीता थिएटर के युवा कलाकारो ने साकची उच्च विद्यालय के संघ कार्यालय में प्रस्तुत किए नाटक खुदीराम बोस

भाषा हमारा गौरव है! भाषा हमारा धर्म है के संकल्प के साथ एकजुट हुए शहर के सैकड़ों बंग्लाभाषी -प्रेमी

जमशेदपुर- साकची उच्च विद्यालय के परिसर में आज शाम देश भक्ति और बांग्ला भाषा एकता की एक अनूठी छटा देखने को मिली। ‘झारखंड बंगाली भाषा समन्वय संघ’ के सौजन्य से शहर की प्रतिष्ठित नाट्य संस्था ‘गीता थिएटर, जमशेदपुर’ द्वारा महान क्रांतिकारी खुदीराम बोस के जीवन पर आधारित ऐतिहासिक नाटक “खुदीराम बोस” का “फाँसी वाला दिन” अध्याय का सफल और भव्य मंचन किया गया।

कार्यक्रम मे विशेष अतिथि (Chief Guest) पूर्वी घोष सम्मलित हुई कार्यक्रम शुरुआत संघ के मूल मंत्र “भाषा हमारा गौरव है! भाषा हमारा धर्म है!” के जयघोष के साथ हुई। जिसके बाद उपस्थित जनसमूह ने शहीद खुदीराम बोस के तस्वीर पर पुष्प-माला अर्पित किया, महिला समुह ने खुदीराम की शहादत पर समर्पित गाना गाया। शाम 7:00 बजे से शुरू हुए नाटक को देखने के लिए साकची और आस-पास के क्षेत्रों से सैकड़ों की संख्या में बांग्लाभाषी और कला-प्रेमी उमड़े।
जीवंत अभिनय ने बांधा समां:

शहीद खुदीराम बोस के बचपन, उनके भीतर सुलगती देशप्रेम की चिंगारी, मुजफ्फरपुर बम कांड और मात्र 18 साल की उम्र में मुस्कुराते हुए फांसी के फंदे को चूम लेने के दृश्यों को गीता थिएटर के कलाकारों ने मंच पर बेहद जीवंतता के साथ उतारा। कलाकारों के दमदार संवाद और संवेदनात्मक अभिनय को देखकर हॉल में मौजूद दर्शकों की आँखें नम हो गईं। पूरा परिसर “वंदे मातरम” और “खुदीराम बोस अमर रहें” के नारों से गूंज उठा।

सांस्कृतिक और भाषाई एकजुटता का संदेश:
झारखंड बंगाली भाषा समन्वय संघ के पदाधिकारियों ने इस सफल आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि अपनी भाषा और संस्कृति ही हमारी असली पहचान है। इस नाटक के माध्यम से न केवल नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध भाषाई विरासत से जोड़ने का प्रयास किया गया है, बल्कि देश के अमर बलिदानियों के प्रति कृतज्ञता भी प्रकट की गई है। उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए जमशेदपुर के प्रबुद्ध नागरिकों और दर्शकों का आभार व्यक्त किया।

खुदीराम बोस फाँसी वाला दिन” अध्याय नाटक मे खुदीराम बोस का किरदार अन्नत सरदार, प्रफुल्ल चाकी ( खुदीराम मित्र) आयुष चौरसिया, खुदीराम की माँ गंगा मंडल, अंग्रेज सिपाइ आकाशा और सुरज, जज का देबू सिह, जेलर का आकाश साव एवम बतौर कथावाचक गीता कुमारी ने अभिनय किया वही मंचन के पीछे रहकर ममता, तमन्ना और करण ने अपना बहुमूल्य सहयोग दिया, नाटक का निर्देशन शहर के युवा रंगकर्म प्रेम दीक्षित द्वारा किया गयी।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित अतिथियों द्वारा गीता थिएटर के सभी कलाकारों और निर्देशक प्रेम दीक्षित को बेहतरीन और सराहनीय प्रस्तुति के लिए संस्थान द्वारा सम्मानित किया गया।


