आधुनिक संचार माध्यमों ने हिंदी के लिए खोले नए अवसर – डॉ. सोनम गुप्ता
हिंदी पखवाड़ा की प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागी सम्मानित

आधुनिक संचार माध्यमों ने हिंदी के लिए खोले नए अवसर – डॉ. सोनम गुप्ता

दूरदर्शन उदघोषिका रांची डॉ. सोनम गुप्ता ने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एवं आधुनिक संचार माध्यमों के माध्यम से हिंदी के प्रसार पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने हिंदी के बदलते स्वरूप, आधुनिकता तथा तकनीकी युग में इसकी उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की।

उन्होंने कहा कि डिजिटल एवं इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों ने हिंदी के विस्तार के लिए नए अवसर उपलब्ध कराए हैं। आज हिंदी केवल पुस्तकों और पारंपरिक माध्यमों तक सीमित नहीं है बल्कि आधुनिक संचार माध्यमों के जरिए विश्व के विभिन्न हिस्सों तक पहुँच रही है। उन्होंने मानवीय संवाद की आत्मीयता और हिंदी की समृद्ध परंपरा के बीच संबंध को भी रेखांकित किया।

कार्यालयीन एवं व्यावहारिक जीवन में हिंदी के प्रयोग पर जोर
सेवानिवृत्त प्रबंधक, इंडियन ऑयल रांची प्रमोद रंजन पाण्डेय ने हिंदी के कार्यालयीन एवं व्यावहारिक प्रयोग की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि व्यक्ति विश्व के किसी भी कोने में रहे, उसे अपने दैनिक बोलचाल एवं कार्य-व्यवहार में हिंदी के प्रयोग को बनाए रखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि तकनीकी एवं व्यावसायिक क्षेत्रों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने से कार्य अधिक सहज एवं जनसुलभ हो सकता है। अपनी भाषा के प्रयोग के माध्यम से व्यक्ति अपनी सांस्कृतिक एवं भाषाई पहचान को भी मजबूत बनाए रख सकता है।

काव्य एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
समारोह में साहित्यिक एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को विशेष आकर्षण प्रदान किया। डॉ. लता मानकर, प्राचार्य, एस.एस.ए. अकादमी, जमशेदपुर ने सरस्वती वंदना एवं काव्य पाठ प्रस्तुत किया।

डॉ. रविकांत शुभम्, सचिव, ओज, चतरा ने राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत काव्य पाठ के माध्यम से महान क्रांतिकारी एवं देशभक्त खुदीराम बोस तथा स्वतंत्रता संग्राम के वीर सेनानियों को स्मरण किया। उनकी प्रस्तुति ने सभागार में राष्ट्रप्रेम एवं देशभक्ति की भावना को और प्रबल किया।

पूनम सिंह वत्सला ने गीत, श्रृंगार एवं ग़ज़ल के माध्यम से प्रेम, सौहार्द, संवेदना एवं सामाजिक समरसता का संदेश दिया उनकी भावपूर्ण प्रस्तुति ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।
वहीं जनाब साहिब नंबाजदी ने शायरी के माध्यम से हिंदी की संवेदनशीलता, सौंदर्य एवं व्यापकता को अभिव्यक्त करते हुए हिंदी भाषा को आगे बढ़ाने एवं इसके प्रति सम्मान की भावना विकसित करने का संदेश दिया।

शुद्ध लेखन एवं व्याकरण पर विशेष ध्यान देने का आग्रह
डॉ. नरेश कुमार, प्राचार्य, एबीएम कॉलेज, जमशेदपुर ने हिंदी के मान-सम्मान को बढ़ाने पर जोर देते हुए विद्यार्थियों से हिंदी व्याकरण एवं शुद्ध लेखन पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि भाषा की प्रभावशीलता उसके सही एवं शुद्ध प्रयोग से और अधिक बढ़ती है।

उन्होंने विद्यार्थियों को हिंदी में पढ़ने, लिखने एवं अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने के लिए प्रोत्साहित किया तथा कहा कि भाषा पर अधिकार व्यक्ति के आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति की क्षमता को भी मजबूत करता है।

हिंदी पखवाड़ा की प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागी सम्मानित
हिंदी पखवाड़ा–2026 के दौरान विश्वविद्यालय में विभिन्न साहित्यिक, शैक्षणिक, भाषायी एवं रचनात्मक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इन प्रतियोगिताओं में विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया
समापन समारोह के दौरान विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उनकी प्रतिभा एवं रचनात्मकता की सराहना करते हुए उन्हें भविष्य में भी हिंदी से जुड़ी गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया गया।
<img src="https://newjharkhandvani.in/wp-content/uploads/2026/10/IMG-20261005-WA0245-225×300.jpg" alt="" width="225" height="300" class="alignnone size-medium wp-imagwp-image-3631
विश्व का तोरणहार है—हिंदी” विषय पर प्रो. जंग बहादुर पाण्डेय का सारगर्भित व्याख्यान
समारोह का मुख्य आकर्षण रांची विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. जंग बहादुर पाण्डेय का “विश्व का तोरणहार है—हिंदी” विषय पर दिया गया सारगर्भित एवं ज्ञानवर्धक व्याख्यान रहा।
प्रो. पाण्डेय ने हिंदी की समृद्ध साहित्यिक परंपरा, व्यापक जनस्वीकार्यता, विशाल शब्द-संपदा एवं वैश्विक स्तर पर हिंदी की बढ़ती उपस्थिति पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि ज्ञान, संवेदना, संस्कृति, चिंतन एवं भारतीय जीवन-दृष्टि की वाहक है।
उन्होंने विद्यार्थियों को हिंदी की शब्द-संपदा एवं अभिव्यक्ति की व्यापकता से परिचित कराते हुए कहा कि हिंदी में ज्ञान और विचारों को प्रभावी ढंग से व्यक्त करने की अपार क्षमता है। उन्होंने निराला सहित हिंदी साहित्य के महान रचनाकारों की रचनात्मक विरासत का उल्लेख करते हुए हिंदी साहित्य की सामाजिक एवं सांस्कृतिक भूमिका को रेखांकित किया।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय हिंदी के लिए अपार संभावनाओं का समय है। आवश्यकता इस बात की है कि नई पीढ़ी हिंदी को आधुनिक तकनीक, डिजिटल माध्यम, शोध, विज्ञान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं ज्ञान-विज्ञान के साथ जोड़कर आगे बढ़ाए। हिंदी को आधुनिक ज्ञान-सृजन की भाषा बनाने के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक हैं।

हिंदी को आधुनिक ज्ञान-विज्ञान एवं नवाचार से जोड़ना समय की आवश्यकता – कुलपति
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. ब्रज मोहन पाट पिंगुआ ने आशीर्वचन प्रदान करते हुए हिंदी को ज्ञान, संस्कृति, संवेदना एवं संवाद की सशक्त भाषा बताया। उन्होंने कहा कि हिंदी का विकास केवल भाषायी विकास नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान-परंपरा एवं सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने विद्यार्थियों एवं शिक्षकों से हिंदी का अधिकाधिक प्रयोग करने तथा इसे आधुनिक तकनीक, शिक्षा, शोध एवं नवाचार के क्षेत्र से जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हिंदी को आधुनिक ज्ञान-विज्ञान एवं तकनीकी विकास के साथ जोड़कर ही इसे वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
उन्होंने नई पीढ़ी को हिंदी में ज्ञान-सृजन, शोध एवं रचनात्मक कार्य के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि हिंदी को भविष्य की तकनीकी एवं ज्ञान आधारित दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना होगा।
हिंदी भारतीय संस्कृति एवं राष्ट्रीय चेतना की महत्वपूर्ण कड़ी : कुलाधिपति
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री प्रभाकर सिंह ने हिंदी को भारतीय संस्कृति एवं राष्ट्रीय चेतना से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण भाषा बताया। उन्होंने कहा कि भारत की विविधता में एकता को मजबूत करने में हिंदी की महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने कहा कि हिंदी विभिन्न क्षेत्रों एवं समुदायों के बीच संवाद एवं जुड़ाव का कार्य करती है। हिंदी की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखते हुए इसे नई पीढ़ी की आवश्यकताओं, आधुनिक तकनीक एवं नवाचार के साथ जोड़ना समय की आवश्यकता है।
कुलाधिपति ने साहित्यकार विभूतिभूषण उपाध्याय का स्मरण करते हुए हिंदी को भारतीय सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी भाषा का वास्तविक संरक्षण केवल उसके सम्मान से संभव नहीं है, बल्कि उसके निरंतर और व्यापक प्रयोग से ही भाषा जीवंत रहती है।
उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार एवं विद्यार्थियों से हिंदी के प्रति गर्व एवं आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने तथा हिंदी को आधुनिकता और नवाचार के नए आयामों से जोड़ने का आहवान किया।
समारोह के अंत में इतिहास विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. कंचन सिन्हा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने मुख्य अतिथि अध्यक्ष, विशिष्ट अतिथियों, विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों विभागाध्यक्षों, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
उन्होंने हिंदी पखवाड़ा–2026 को सफल बनाने में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग देने वाले सभी सदस्यों के योगदान की सराहना की तथा कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में भाषा के प्रति रुचि एवं सम्मान उत्पन्न करने के साथ-साथ उनकी रचनात्मक प्रतिभा को भी मंच प्रदान करते हैं।
समारोह का समापन हिंदी के प्रति सम्मान, गौरव एवं आत्मीयता की भावना को और मजबूत करने तथा जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में हिंदी के अधिकाधिक, सार्थक एवं व्यवहारिक प्रयोग के संकल्प के साथ हुआ।
सोना देवी विश्वविद्यालय में हिंदी पखवाड़ा–2026 का भव्य समापन
हिंदी केवल भाषा नहीं, भारतीय अस्मिता, संस्कृति और ज्ञान-परंपरा की सशक्त वाहक – कुलाधिपति प्रभाकर सिंह
हिंदी भाषा के प्रति सम्मान, गौरव एवं आत्मीयता की भावना को सुदृढ़ करने तथा हिंदी के व्यापक, व्यवहारिक एवं रचनात्मक प्रयोग को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सोना देवी विश्वविद्यालय, घाटशिला में आयोजित हिंदी पखवाड़ा–2026 का भव्य एवं गरिमामय समापन समारोह-सह-संगोष्ठी विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकानंद सभागार में उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। समारोह में हिंदी के साहित्यिक एवं सांस्कृतिक महत्व के साथ-साथ शिक्षा, प्रशासन, तकनीक, संचार, शोध, कार्यालयीन कार्य एवं आधुनिक ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में हिंदी की बढ़ती उपयोगिता और संभावनाओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
समारोह में विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रभाकर सिंह, कुलपति प्रो. डॉ. ब्रज मोहन पाट पिंगुआ, कुलसचिव डॉ. नीत नयना, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक, शिक्षकेत्तर कर्मचारी, विद्यार्थी, साहित्यकार, पत्रकार, शिक्षाविद् एवं विभिन्न संस्थानों से आए गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। हिंदी पखवाड़ा के दौरान आयोजित विभिन्न साहित्यिक, शैक्षणिक एवं रचनात्मक प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को समारोह में प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
माँ सरस्वती की वंदना एवं दीप प्रज्वलन से हुआ शुभारंभ
समारोह का शुभारंभ संस्कृत विभाग की सहायक प्राध्यापक सुश्री कुमारी निकिता के कुशल मंच संचालन में माँ सरस्वती की वंदना से हुआ। इसके पश्चात अतिथियों एवं विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों द्वारा माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पुष्पार्चन किया गया। ज्ञान एवं विद्या की अधिष्ठात्री माँ सरस्वती की वंदना एवं दीप प्रज्वलन ने समारोह को आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक गरिमा प्रदान की।
इसके बाद संगीत विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. संगीता चौधरी ने स्वागत गीत प्रस्तुत कर सभी अतिथियों का अभिनंदन किया। उनकी मधुर प्रस्तुति से सभागार का वातावरण आत्मीय एवं भावपूर्ण हो उठा।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों एवं अन्य गणमान्य अतिथियों को विश्वविद्यालय की ओर से अंगवस्त्र, पौधा एवं श्रीमद्भगवद्गीता भेंट कर सम्मानित किया गया। इस सम्मान के माध्यम से भारतीय परंपरा, ज्ञान-संस्कृति एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति सम्मान का संदेश भी दिया गया।
हिंदी को जीवन एवं कार्य-संस्कृति का हिस्सा बनाने की आवश्यकता – कुलसचिव
विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ. नीत नयना ने अपने स्वागत वक्तव्य में सभी अतिथियों का अभिनंदन करते हुए हिंदी के व्यवहारिक एवं व्यापक प्रयोग की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि हिंदी को केवल एक विषय या साहित्य की भाषा तक सीमित रखने के बजाय इसे जीवन एवं कार्य-संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसी भी भाषा की वास्तविक शक्ति उसके निरंतर एवं व्यापक प्रयोग में निहित होती है। यदि हिंदी का प्रयोग शिक्षा, प्रशासन, कार्यालयीन कार्य, शोध, तकनीक, संचार एवं दैनिक व्यवहार में बढ़ता है, तो हिंदी और अधिक सशक्त एवं प्रभावी भाषा के रूप में स्थापित होगी।
कुलसचिव ने इस अवसर पर सोना देवी विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों, विषय-विस्तार, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के साथ हुए समझौतों, विश्वविद्यालय के आधारभूत ढाँचे तथा उपलब्ध शैक्षणिक सुविधाओं के संबंध में भी विस्तार से जानकारी दी।
हिंदी के प्रति गौरव एवं सम्मान की भावना विकसित करने का आहवान
तुलसी भवन, जमशेदपुर के मानद सचिव डॉ. प्रसंजीत तिवारी ने हिंदी की सामाजिक एवं सांस्कृतिक भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत की भाषायी विविधता उसकी विशेष पहचान है और हिंदी विभिन्न क्षेत्रों एवं समुदायों के बीच संवाद स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने हिंदी के प्रति गौरव एवं सम्मान की भावना विकसित करने तथा नई पीढ़ी को हिंदी की समृद्ध साहित्यिक एवं सांस्कृतिक परंपरा से जोड़ने का आहवान किया।
उन्होंने कहा कि भाषा केवल विचारों के आदान-प्रदान का माध्यम नहीं होती, बल्कि वह समाज की संस्कृति, परंपरा, स्मृतियों और संवेदनाओं को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुँचाने का कार्य भी करती है।
हिंदी आत्मीयता, संस्कार एवं संस्कृति की भाषा – डॉ. विनय कुमार पाण्डे
प्रखर पत्रकार, समर्थ साहित्यकार एवं आशुकवि डॉ. विनय कुमार पाण्डे ने हिंदी के महत्व पर विचार व्यक्त करते हुए मैथिलीशरण गुप्त सहित हिंदी साहित्य के महान रचनाकारों का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि हिंदी आत्मीयता, संस्कार एवं संस्कृति की भाषा है। अपनी भाषा की उन्नति के साथ राष्ट्र की उन्नति भी जुड़ी हुई है।
उन्होंने विद्यार्थियों को हिंदी के प्रति जागरूक एवं प्रेरित करते हुए कहा कि अपनी भाषा के प्रति सम्मान का भाव व्यक्ति को अपनी संस्कृति और जड़ों से जोड़ता है। उन्होंने अपनी काव्य प्रस्तुतियों के माध्यम से हिंदी को जन-जन की भाषा बनाने का संदेश दिया। उनकी प्रस्तुति ने उपस्थित विद्यार्थियों एवं श्रोताओं में विशेष उत्साह का संचार किया।
पत्रकारिता एवं रचनात्मक अभिव्यक्ति में हिंदी की महत्वपूर्ण भूमिका
प्रख्यात पत्रकार, साहित्यकार एवं आशुकवि डॉ. जिवेंद्र कुमार पाण्डेय ने हिंदी साहित्य, पत्रकारिता एवं रचनात्मक अभिव्यक्ति के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भाषा समाज को जोड़ने और विचारों को प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त करने का सशक्त माध्यम है।
उन्होंने बदलते समय में हिंदी पत्रकारिता एवं साहित्य की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को हिंदी में लेखन, पठन एवं रचनात्मक अभिव्यक्ति के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी के हाथों में हिंदी का भविष्य है और युवाओं को हिंदी को आधुनिक संदर्भों के साथ जोड़कर आगे बढ़ाना होगा।
हिंदी को आधुनिक ज्ञान-विज्ञान एवं नवाचार से जोड़ना समय की आवश्यकता : कुलपति
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. ब्रज मोहन पाट पिंगुआ ने आशीर्वचन प्रदान करते हुए हिंदी को ज्ञान, संस्कृति, संवेदना एवं संवाद की सशक्त भाषा बताया। उन्होंने कहा कि हिंदी का विकास केवल भाषायी विकास नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान-परंपरा एवं सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने विद्यार्थियों एवं शिक्षकों से हिंदी का अधिकाधिक प्रयोग करने तथा इसे आधुनिक तकनीक, शिक्षा, शोध एवं नवाचार के क्षेत्र से जोड़ने का आहवान किया। उन्होंने कहा कि हिंदी को आधुनिक ज्ञान-विज्ञान एवं तकनीकी विकास के साथ जोड़कर ही इसे वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
उन्होंने नई पीढ़ी को हिंदी में ज्ञान-सृजन, शोध एवं रचनात्मक कार्य के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि हिंदी को भविष्य की तकनीकी एवं ज्ञान आधारित दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना होगा।
हिंदी भारतीय संस्कृति एवं राष्ट्रीय चेतना की महत्वपूर्ण कड़ी : कुलाधिपति
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रभाकर सिंह ने हिंदी को भारतीय संस्कृति एवं राष्ट्रीय चेतना से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण भाषा बताया। उन्होंने कहा कि भारत की विविधता में एकता को मजबूत करने में हिंदी की महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने कहा कि हिंदी विभिन्न क्षेत्रों एवं समुदायों के बीच संवाद एवं जुड़ाव का कार्य करती है। हिंदी की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखते हुए इसे नई पीढ़ी की आवश्यकताओं, आधुनिक तकनीक एवं नवाचार के साथ जोड़ना समय की आवश्यकता है।
कुलाधिपति ने साहित्यकार विभूतिभूषण उपाध्याय का स्मरण करते हुए हिंदी को भारतीय सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी भाषा का वास्तविक संरक्षण केवल उसके सम्मान से संभव नहीं है, बल्कि उसके निरंतर और व्यापक प्रयोग से ही भाषा जीवंत रहती है।
उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार एवं विद्यार्थियों से हिंदी के प्रति गर्व एवं आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने तथा हिंदी को आधुनिकता और नवाचार के नए आयामों से जोड़ने का आहवान किया।
समारोह के अंत में इतिहास विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. कंचन सिन्हा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने मुख्य अतिथि, अध्यक्ष, विशिष्ट अतिथियों, विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों, विभागाध्यक्षों, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
उन्होंने हिंदी पखवाड़ा–2026 को सफल बनाने में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग देने वाले सभी सदस्यों के योगदान की सराहना की तथा कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में भाषा के प्रति रुचि एवं सम्मान उत्पन्न करने के साथ-साथ उनकी रचनात्मक प्रतिभा को भी मंच प्रदान करते हैं।
समारोह का समापन हिंदी के प्रति सम्मान, गौरव एवं आत्मीयता की भावना को और मजबूत करने तथा जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में हिंदी के अधिकाधिक, सार्थक एवं व्यवहारिक प्रयोग के संकल्प के साथ हुआ




