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पूरी परीक्षा प्रक्रिया दूषित थी, तो पहले के हलफनामों का सच क्या था, जेएसएससी-सीजीएल मामले में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सरकार से मांगा जवाब, पूछा- जवाबदेही सिर्फ नीचे वालों की और संरक्षण ऊपर वालों को क्यों, सीबीआई जांच की मांग दोहराई

एकदिवसीय प्रवास के तहत जमशेदपुर पहुंचे राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने रविवार को जमशेदपुर परिसदन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा मामले को लेकर राज्य सरकार और जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की ओर से कल हाई कोर्ट में दाखिल हलफनामे में जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा की पूरी प्रक्रिया को दूषित बताया गया है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सरकार स्वयं परीक्षा प्रक्रिया को दूषित मान रही है, तो पहले न्यायालय के समक्ष दाखिल किए गए हलफनामों में क्या सच्चाई थी

पूरी परीक्षा प्रक्रिया दूषित थी, तो पहले के हलफनामों का सच क्या था, जेएसएससी-सीजीएल मामले में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सरकार से मांगा जवाब, पूछा- जवाबदेही सिर्फ नीचे वालों की और संरक्षण ऊपर वालों को क्यों, सीबीआई जांच की मांग दोहराई

जमशेदपुर- एकदिवसीय प्रवास के तहत जमशेदपुर पहुंचे राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने रविवार को जमशेदपुर परिसदन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा मामले को लेकर राज्य सरकार और जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की ओर से कल हाई कोर्ट में दाखिल हलफनामे में जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा की पूरी प्रक्रिया को दूषित बताया गया है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सरकार स्वयं परीक्षा प्रक्रिया को दूषित मान रही है, तो पहले न्यायालय के समक्ष दाखिल किए गए हलफनामों में क्या सच्चाई थी।

बाबूलाल मरांडी ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि पूरी परीक्षा प्रक्रिया दूषित थी, तो सुधीर गुप्ता, अनुराग गुप्ता, प्रशांत कुमार और मनोज कौशिक की इस चौकड़ी की भूमिका और जवाबदेही की जांच क्यों नहीं होनी चाहिए? पहले न्यायालय के सामने पूरे तथ्य क्यों नहीं रखे गए? क्या अदालत को गुमराह करने की कोशिश हुई थी। उन्होंने कहा कि जांच को पहले गलत दिशा में ले जाने और “गड़बड़ी नहीं हुई” का दावा करने के आरोपों का जवाब आखिर कौन देगा। इस आशय का शपथपत्र किसके कहने पर और किसे बचाने के लिए दाखिल किया गया। पहले की जांच में अनुराग गुप्ता की भूमिका और बाद में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत जानकारी को लेकर मनोज कौशिक की जवाबदेही कैसे टाली जा सकती है। एक ही परीक्षा को लेकर पहले की सफाई और अब की स्वीकारोक्ति के बीच का अंतर महज भूल है या किसी को बचाने की कोशिश।

मुख्यमंत्री की जवाबदेही पर भी उठाया सवाल

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की जवाबदेही का है। क्या उनकी जानकारी और सहमति के बिना इतना बड़ा खेल संभव था। यदि सरकार को जानकारी नहीं थी, तो शासन और निगरानी कहां थी। और यदि जानकारी थी, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उन्होंने कहा कि माननीय न्यायालय को इस पूरे पहलू का भी संज्ञान लेना चाहिए।

बाबूलाल मरांडी ने सवाल किया कि क्या इतना व्यापक बहाली घोटाला अब तक पकड़े जा रहे निचले स्तर के लोगों के अकेले के बस की बात थी। यदि पूरी बहाली व्यवस्था वही संचालित कर रहे थे, तो अध्यक्ष और सचिव किस काम के लिए बैठाए गए थे। अधिकार और सुविधाएं ऊपर वाले भोगें, लेकिन जवाबदेही के समय केवल नीचे वाले पकड़े जाएं, यह कैसा न्याय है।

सीआईडी की जांच पर भी सवाल, सीबीआई जांच की मांग

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जब पूरी परीक्षा प्रक्रिया ही दूषित थी, तो सीआईडी की पहले की जांच में यह सच सामने क्यों नहीं आया। आज भी आशंका यही है कि न्यायालय के सामने उतने ही तथ्य रखे जाएंगे, जितने से प्रभावशाली लोगों की कथित संलिप्तता पर पर्दा बना रहे।

उन्होंने कहा कि सीआईडी के कामकाज पर सवाल इतना गंभीर है कि पूछना पड़ रहा है कि वह निष्पक्ष जांच एजेंसी की भूमिका निभा रही है या संरक्षण और कथित वसूली के आरोपों से घिरे तंत्र की ढाल बन गई है। उन्होंने कहा कि जिस जांच की निष्पक्षता स्वयं सवालों के घेरे में हो, उसी के भरोसे लाखों छात्रों का भविष्य कैसे छोड़ा जा सकता है।

बाबूलाल मरांडी ने झारखंड के लाखों छात्रों को न्याय दिलाने के लिए पूरे मामले की सीबीआई से निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि जेएसएससी और जेपीएससी जैसी भर्ती संस्थाओं की साख भाषणों, सफाई और बदलते हलफनामों से वापस नहीं आएगी। वह तभी बहाल होगी, जब पूरी सच्चाई सामने आएगी और दोषियों पर उनके पद तथा पहुंच की परवाह किए बिना कार्रवाई होगी।

प्रशांत कुमार और सुधीर गुप्ता को तत्काल हटाने की मांग

नेता प्रतिपक्ष ने स्पष्ट मांग करते हुए कहा कि प्रशांत कुमार और सुधीर गुप्ता को जेएसएससी से तत्काल हटाया जाए तथा मनोज कौशिक को सीआईडी एडीजी के पद से हटाया जाए। उन्होंने कहा कि अनुराग गुप्ता सहित उन सभी अध्यक्षों और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की स्वतंत्र जांच हो, जिनके कार्यकाल में यह कथित बहाली घोटाला हुआ।

उन्होंने कहा कि जिनके खिलाफ साक्ष्य मिलें, उन्हें अभियुक्त बनाया जाए और कानून के अनुसार गिरफ्तारी तथा अभियोजन की कार्रवाई हो। किसी को भी पद, प्रभाव या पुराने संबंधों के सहारे जांच को बाधित करने का अवसर नहीं मिलना चाहिए।

‘छात्रों का भविष्य दांव पर लगाकर कुर्सियां बचाने का खेल बंद हो’

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि छात्रों का भविष्य दांव पर लगाकर कुर्सियां बचाने का खेल बंद होना चाहिए। यदि परीक्षा प्रक्रिया दूषित थी, तो उसे दूषित करने और उस पर पर्दा डालने वालों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए, चाहे वे किसी भी कुर्सी पर बैठे हों।

इस दौरान भाजपा जमशेदपुर महानगर अध्यक्ष संजीव सिन्हा, पूर्व मंत्री दुलाल भुइयां, भाजपा प्रबुद्ध प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक राजेश शुक्ला एवं जिला मीडिया प्रभारी प्रेम झा भी मौजूद रहे।

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