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झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के जादूगोड़ा (मुर्गाघुटू क्षेत्र) में वर्षों से जारी यूरेनियम रेडिएशन के दुष्प्रभावों और नई स्थापित हो रही एथेनॉल फैक्ट्री से उत्पन्न गंभीर पर्यावरण व स्वास्थ्य संकट को लेकर झारखंड मानव अधिकार संघ (JHRA) ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), नई दिल्ली में औपचारिक शिकायत वाद दर्ज कराया है

संघ के अध्यक्ष मनोज किशोर ने मानव अधिकार भवन नई दिल्ली स्थित NHRC के महासचिव पीयूष गोयल के कार्यालय में अधीनस्थ पदाधिकारियों से मुलाकात कर एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा और क्षेत्र में मंडरा रहे गंभीर मानवाधिकार संकट पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की

नई दिल्ली – झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के जादूगोड़ा (मुर्गाघुटू क्षेत्र) में वर्षों से जारी यूरेनियम रेडिएशन के दुष्प्रभावों और नई स्थापित हो रही एथेनॉल फैक्ट्री से उत्पन्न गंभीर पर्यावरण व स्वास्थ्य संकट को लेकर झारखंड मानव अधिकार संघ (JHRA) ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), नई दिल्ली में औपचारिक शिकायत वाद दर्ज कराया है

संघ के अध्यक्ष मनोज किशोर ने मानव अधिकार भवन नई दिल्ली स्थित NHRC के महासचिव पीयूष गोयल के कार्यालय में अधीनस्थ पदाधिकारियों से मुलाकात कर एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा और क्षेत्र में मंडरा रहे गंभीर मानवाधिकार संकट पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
ज्ञापन में उठाए गए मुख्य मुद्दे:
यूरेनियम रेडिएशन का प्रकोप: मुर्गाघुटू और जादूगोड़ा क्षेत्र में पिछले कई दशकों से जारी यूरेनियम खनन के कारण रेडियोएक्टिव रेडिएशन फैल रहा है। इसके दुष्परिणामस्वरूप स्थानीय ग्रामीणों में शारीरिक विकृतियां, बांझपन और नई पीढ़ी में दिव्यांगता जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।
एथेनॉल फैक्ट्री से बढ़ता संकट: रेडिएशन की मार झेल रहे इस क्षेत्र में ‘क्रिजल स्टार्च एग्रीको प्रा. लि.’ (Kijalk Starch Agro Pvt. Ltd.) द्वारा एथेनॉल फैक्ट्री स्थापित की जा रही है। फैक्ट्री का जहरीला व रासायनिक काला कचरा सीधे स्थानीय नालों और ‘कर्रा नदी’ में बहाया जा रहा है, जो आगे जाकर राज्य की प्रमुख ‘स्वर्णरेखा नदी’ में मिलता है। इससे पेयजल, कृषि और मत्स्य पालन पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

पर्यावरण क्षति व वृक्षों की कटाई: कंपनी निर्माण के लिए लगभग 20 एकड़ में फैले दशकों पुराने हरे-भरे पेड़ों की कटाई कर दी गई है, जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत स्वच्छ पर्यावरण व जीवन के अधिकार का सीधा उल्लंघन है।
धार्मिक व सांस्कृतिक स्थलों पर अतिक्रमण: कंपनी द्वारा आवंटित भूमि सीमा से बाहर जाकर आदिवासियों के प्राचीन ‘काल भैरव पूजा स्थल’ तथा श्मशान घाट पर अवैध कब्जा कर लिया गया है।
स्थानीय श्रम अधिकारों का हनन: तकनीकी रूप से योग्य स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता न देकर बाहरी श्रम को बढ़ावा दिया जा रहा है तथा मजदूरों के बकाये का भुगतान नहीं किया जा रहा है।
NHRC से प्रमुख मांगें:
विशेषज्ञ जाँच दल का गठन: NHRC एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ जाँच टीम तथा स्वतंत्र चिकित्सा वैज्ञानिकों का दल जादूगोड़ा भेजे, जो रेडिएशन और प्रदूषण प्रभावित परिवारों व बच्चों का स्वास्थ्य सर्वेक्षण करे और उन्हें उचित मुआवजा व चिकित्सा सहायता दिलाए।
फैक्ट्री निर्माण व संचालन पर रोक: विवादित एथेनॉल फैक्ट्री, कर्रा नदी तथा स्वर्णरेखा नदी के तटीय क्षेत्रों का प्रत्यक्ष भौतिक निरीक्षण कराया जाए और पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) की निष्पक्ष जाँच होने तक फैक्ट्री के निर्माण पर तत्काल रोक लगाई जाए।
अतिक्रमण मुक्ति: आदिवासियों के प्राचीन धार्मिक पूजा स्थल एवं श्मशान घाट को कंपनी के अवैध कब्जे से तुरंत मुक्त कराया जाए।
जल व पर्यावरण संरक्षण: नदियों को रासायनिक प्रदूषण से बचाने हेतु कड़े निर्देश जारी किए जाएं तथा काटे गए वृक्षों के एवज में अनिवार्य सघन वनीकरण कराया जाए।
प्रशासनिक जवाबदेही: जनता की शिकायतों की अनदेखी करने वाले स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों एवं कंपनी प्रबंधन के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाए। उक्त जानकारी मनोज किशोर (अध्यक्ष)झारखंड मानव अधिकार संघ (JHRA), जमशेदपुर
ने दी है

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