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पैरों में सूजन, थकान और झाग वाली पेशाब को न करें नजरअंदाज, ये किडनी की बीमारी के संकेत हो सकते हैं- डॉ आफताब अंसारी कंसल्टेंट ,किडनी केयर ,ब्रह्मानंद नारायणा हॉस्पिटल

जब आम लक्षण बढ़ती उम्र नहीं, किडनी की बीमारी का संकेत हों उम्र बढ़ने के साथ थकान महसूस होना, नींद कम आना या शरीर में हल्कापन कम होना, इन्हें अक्सर स्वाभाविक बदलाव मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। लेकिन जब इनके साथ पैरों और टखनों में सूजन, पेशाब में झाग या बुलबुले, रात में बार-बार पेशाब आना, भूख कम लगना, जी मिचलाना या त्वचा में लगातार खुजली जैसी शिकायतें जुड़ जाएं, तो इन्हें हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है। किडनी की बीमारी शुरुआती चरण में बहुत धीरे-धीरे और लगभग चुपचाप बढ़ती है

पैरों में सूजन, थकान और झाग वाली पेशाब को न करें नजरअंदाज, ये किडनी की बीमारी के संकेत हो सकते हैं- डॉ आफताब अंसारी कंसल्टेंट ,किडनी केयर ,ब्रह्मानंद नारायणा हॉस्पिटल

जब आम लक्षण बढ़ती उम्र नहीं, किडनी की बीमारी का संकेत हों
उम्र बढ़ने के साथ थकान महसूस होना, नींद कम आना या शरीर में हल्कापन कम होना, इन्हें अक्सर स्वाभाविक बदलाव मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। लेकिन जब इनके साथ पैरों और टखनों में सूजन, पेशाब में झाग या बुलबुले, रात में बार-बार पेशाब आना, भूख कम लगना, जी मिचलाना या त्वचा में लगातार खुजली जैसी शिकायतें जुड़ जाएं, तो इन्हें हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है। किडनी की बीमारी शुरुआती चरण में बहुत धीरे-धीरे और लगभग चुपचाप बढ़ती है, क्योंकि किडनी में क्षति होने के बावजूद भी शरीर लंबे समय तक सामान्य ढंग से काम करता रहता है। यही कारण है कि मरीज को अक्सर तब तक इसका एहसास नहीं होता जब तक किडनी की कार्यक्षमता का एक बड़ा हिस्सा प्रभावित नहीं हो चुका होता, और इन लक्षणों को बढ़ती उम्र का हिस्सा मान लेना सही निदान में देरी की सबसे बड़ी वजह बन जाता है।
समय रहते पहचान क्यों किडनी को बचा सकती है
किडनी की बीमारी की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि यह अंग खामोशी से काम करता है। लक्षण अक्सर तभी स्पष्ट होते हैं जब बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है। लेकिन अगर स्थिति की पहचान शुरुआती चरण में हो जाए, तो सही इलाज, दवाओं का नियमित सेवन और जीवनशैली में समय पर बदलाव के जरिए किडनी की कार्यक्षमता को काफी हद तक सुरक्षित रखा जा सकता है, और डायलिसिस या प्रत्यारोपण जैसी गंभीर स्थिति तक पहुंचने से बचा जा सकता है। इसके लिए महंगी या जटिल जांच की जरूरत नहीं होती, साधारण रक्त और मूत्र परीक्षण से ही किडनी की स्थिति का स्पष्ट संकेत मिल जाता है। मधुमेह, उच्च रक्तचाप या किडनी रोग के पारिवारिक इतिहास वाले लोगों को विशेष रूप से सतर्क रहना चाहिए, भले ही उनमें फिलहाल कोई स्पष्ट लक्षण न दिखें।
रोजमर्रा की वे आदतें जो किडनी को स्वस्थ रखने में मदद करती हैं
किडनी को सुरक्षित रखने के लिए बड़े बदलावों की नहीं, बल्कि रोजमर्रा की आदतों में निरंतरता की जरूरत होती है:
●पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, लेकिन जरूरत से ज्यादा नहीं, खासकर पहले से किडनी संबंधी समस्या होने पर
●नमक, तला हुआ और प्रोसेस्ड भोजन का सेवन सीमित रखना
●रक्तचाप और ब्लड शुगर को नियमित रूप से नियंत्रण में रखना
●दर्द निवारक दवाओं का डॉक्टरी सलाह के बिना बार-बार सेवन न करना
●40 वर्ष की उम्र के बाद साल में कम से कम एक बार बुनियादी किडनी जांच अवश्य कराना
शरीर के संकेतों को समय रहते पहचानना और सही समय पर डॉक्टर से सलाह लेना ही किडनी को सुरक्षित रखने का सबसे प्रभावी तरीका है, इन्हें बढ़ती उम्र मानकर नजरअंदाज करने के बजाय।

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