जीते जी कई लोग समाज की सेवा करते हैं और मरने के बाद भी कई लोग अपना शरीर का दान कर मरणोपरांत भी सेवा करते हैं। यह कहना है राजस्थान हाई कोर्ट के अधिवक्ता चंद्रकांत चौहान का
27 अप्रैल 2026 को राजस्थान जयपुर से 12 ज्योतिर्लिंग की पैदल यात्रा में निकले चंद्रकांत चौहान 15 अगस्त को जमशेदपुर पहुंचे और फिर 16 अगस्त को जगन्नाथ पुरी के लिए रवाना हो गए
जमशेदपुर- जीते जी कई लोग समाज की सेवा करते हैं और मरने के बाद भी कई लोग अपना शरीर का दान कर मरणोपरांत भी सेवा करते हैं। यह कहना है राजस्थान हाई कोर्ट के अधिवक्ता चंद्रकांत चौहान का।
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27 अप्रैल 2026 को राजस्थान जयपुर से 12 ज्योतिर्लिंग की पैदल यात्रा में निकले चंद्रकांत चौहान 15 अगस्त को जमशेदपुर पहुंचे और फिर 16 अगस्त को जगन्नाथ पुरी के लिए रवाना हो गए।
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उन्होंने न्यू झारखण्ड वाणी संवाददाता को बताया कि साढे तीन महीने हो गए हैं। इस बीच हमने केदारनाथ, काशी विश्वनाथ और देवघर के बाबा बैजनाथ का दर्शन कर चुके हैं। प्रतिदिन 30 किलोमीटर चलते हैं। हमारा लक्ष्य है कि एक साल में 12 ज्योतिर्लिंग का दर्शन कर लें, लेकिन बारिश का मौसम या किसी और कारण वश यह समय एक दो महीना बढ़ भी सकता है।
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उन्होंने एक प्रश्न के जवाब में कहा कि ईश्वर का दिया मेरे पास सब कुछ है। मैं बड़े शहरों में होटल में रुकता हूं और गांव एवं अन्य जगह जहां होटल की सुविधा नहीं है, वहां मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा कहीं भी रुक जाता हूं। सभी लोग मुझे बहुत ही प्यार करते हैं।
40 वर्षीय चंद्रकांत चौहान ने बताया कि वह यात्रा आरंभ करने के पहले एसएमएस अस्पताल, जयपुर में अपना शरीर मरणोपरांत के लिए दान कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि हम लोग शरीर दान करेंगे तो मरने के बाद भी हम जिएंगे।
उन्होंने कहा कि सभी धर्म में अंतिम क्रिया करने की विधि है, लेकिन आज मेडिकल कॉलेज में बॉडी की बहुत आवश्यकता है। एक-एक बॉडी पर कई छात्र- छात्रा शोध करते हैं। जिससे उन्हें बहुत कठिनाई होती है। ज्यादा शव अगर उन्हें प्राप्त होगा, तो अच्छा से शोध करेंगे और इलाज में ज्यादा कामयाबी मिलेगी। लोगों कीआयु बढ़ेगी।
उन्होंने कहा कि हम यही संदेश देना चाहते हैं कि जीते जी कई लोग सेवा करते हैं, मरने के बाद भी उसका शरीर काम आएगा। इसलिए डॉक्टर को भी चाहिए कि लोगों को इस ओर जागृत करें।
उन्होंने एक प्रश्न के जवाब में कहा कि मुझे पहले उतना भक्ति भाव मन में नहीं था, लेकिन कुछ ऐसी घटना हुई, मानो मुझे महादेव के अनुभूति हो गई है ।इसलिए मैं 12 ज्योतिर्लिंग का दर्शन करने के साथ यह संदेश जन-जन तक पहुंचा रहा हूं कि मरणोपरांत अपना शरीर दान करें



