भोजपुरी साहित्य भवन गोलमुरी में कामरेड शम्भू महतो की याद में स्मृति सभा का आयोजन किया गया ज्ञातव्य है कि उनका निधन 11 अगस्त को बंगाल के झारग्राम में हो गया। वे लम्बे समय से बीमार चल रहे थे। सम्प्रति वे सीपीआई (एमएल) के झारखंड प्रान्तीय कमिटी के सचिव तथा केन्द्रीय कमेटी के सदस्य थे
कॉ. शम्भू महतो का राजनैतिक जीवन 48 वर्षों से ज्यादा रहा। वे सादगी, संघर्ष तथा बहादुरी के लिये प्रसिद्ध रहे। वे सत्तर के दशक में रांची एचईसी में सीआईएसएफ में सब इंस्पेक्टर के पद पर ज्वाइन किये तथा अपने यूनियन के राष्ट्रीय महासचिव बने अपनी यूनियन की मान्यता के लिये उन्होंने सरकार से संघर्ष शुरू कर दिया । संघर्ष के दौरान साथी शम्भू महतो तथा सैकड़ों जवानों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। इसके बाद शम्भू महतो सीपीआई (एमएल)- पीसीसी में शामिल हो गये तथा झारखंड प्रान्त की लड़ाई में लग गये। वे हुल झारखंड क्रांति दल के महासचिव भी रहे। उनका कार्यक्षेत्र रांची, गुमला,पलामू तथा संथाल परगना में दलितों तथा आदिवासियों के बीच रहा

जमशेदपुर – भोजपुरी साहित्य भवन गोलमुरी में कामरेड शम्भू महतो की याद में स्मृति सभा का आयोजन किया गया

ज्ञातव्य है कि उनका निधन 11 अगस्त को बंगाल के झारग्राम में हो गया। वे लम्बे समय से बीमार चल रहे थे। सम्प्रति वे सीपीआई (एमएल) के झारखंड प्रान्तीय कमिटी के सचिव तथा केन्द्रीय कमेटी के सदस्य थे।

्कॉ्. शम्भू महतो का राजनैतिक जीवन 48 वर्षों से ज्यादा रहा। वे सादगी, संघर्ष तथा बहादुरी के लिये प्रसिद्ध रहे। वे सत्तर के दशक में रांची एचईसी में सीआईएसएफ में सब इंस्पेक्टर के पद पर ज्वाइन किये तथा अपने यूनियन के राष्ट्रीय महासचिव बने अपनी यूनियन की मान्यता के लिये उन्होंने सरकार से संघर्ष शुरू कर दिया । संघर्ष के दौरान साथी शम्भू महतो तथा सैकड़ों जवानों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। इसके बाद शम्भू महतो सीपीआई (एमएल)- पीसीसी में शामिल हो गये तथा झारखंड प्रान्त की लड़ाई में लग गये। वे हुल झारखंड क्रांति दल के महासचिव भी रहे। उनका कार्यक्षेत्र रांची, गुमला,पलामू तथा संथाल परगना में दलितों तथा आदिवासियों के बीच रहा। झारखंड के संसाधनों की लूट के खिलाफ वे हमेशा सक्रिय रहे। सिमडेगा में जंगल माफियाओं ने उन पर जानलेवा हमला भी किया। उनके असामयिक निधन से झारखंड के गरीब आदिवासी तथा मूलवासी ने अपना एक प्रिय नेता को खो दिया।

स्मृति सभा का संचालन सीपीआई(एमएल) के झारखंड प्रांतीय कमिटी के कार्यकारी सचिव कॉ. सिया शरण शर्मा ने किया। शुरुआत में स्मृति सभा में भाग ले रहे सभी लोगों ने साथी शंभू महतो की तस्वीर पर माल्यार्पण किया।साथी काशीनाथ प्रजापति ने उनकी याद में जन संगीत प्रस्तुत किया। एआईएफटीयू (न्यू) के प्रान्तीय अध्यक्ष सुजय राय ने उनके राजनैतिक जीवन पर प्रकाश डाला। स्मृति सभा में कई बिरादराना संगठनों के नेता शामिल हुए जिसमें

सीपीआई(एमएल) मास लाईन के साथी डीसी गोहाईं, सीपीआई (एमएल) न्यू डेमोक्रेसी के साथी व्यास तिवारी, एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) के साथी सुमित राय, जनवादी लोक मंच के डॉ. राम कवीन्द्र सिंह, जनमुक्ति संघर्ष वाहिनी के साथी अरविन्द अंजुम, मंथन, राजश्री, निधि, जनवादी लेखक संघ के अशोक शुभदर्शी, शैलेंद्र अस्थाना, झारखंड आंदोलनकारी गौतम कुमार बोस, बिन्दा , समाजसेवी निर्मल दास,हुल झारखंड क्रांति दल के शंकर नायक,आप के सईद अफरीदी, डॉ. अम्बेडकर दलित आदिवासी पिछड़ा माइनॉरिटी वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष रवीन्द्र प्रसाद , आदि शामिल थे। उक्त नेताओं ने भी स्मृति सभा को सम्बोधित किया।
वक्ताओं ने कहा कि कॉ. शंभू महतो ने आजीवन मेहनतकश जनता तथा शोषित-उत्पीड़ित वर्गों तथा तबकों की मुक्ति के लिए संघर्ष किया। जिस मानवद्रोही शोषक व्यवस्था को बदलकर एक सही अर्थों में जनवादी एवं समाजवादी समाज व्यवस्था के निर्माण के लिए वे आजीवन संघर्षरत रहे, उन अधूरे कामों को पूरा करने में योगदान देना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
उक्त जानकारी सियाशरण शर्मा कार्यकारी सचिव झारखंड प्रांतीय कमिटी , सीपीआई (एमएल) ने दी है


