साकची स्थित बेद अध्ययन अनुसिलन केंद्र पर धर्मरक्षिनी पोरोहित्य महासंघ के द्वारा भगवान परशुराम का जन्मोत्सव मनाया गया
जिसमें जमशेदपुर के बिभिन्न स्थानों के आचर्यगण उपस्थित हुए आचार्यो ने सामूहिक स्वतीवाचन के साथ पूजन आरम्भ किया सर्वप्रथम गणपति अम्बिका पूजन, वरुण पूजन, नबग्ररूपह पूजन मातृका पूजन के बाद भगवान परशुराम का पूजन कर 108 बतियों से नीराजन किया गया

जमशेदपुर- आज साकची स्थित बेद अध्ययन अनुसिलन केंद्र पर धर्मरक्षिनी पोरोहित्य महासंघ के द्वारा भगवान परशुराम का जन्मोत्सव मनाया गया

जिसमें जमशेदपुर के बिभिन्न स्थानों के आचर्यगण उपस्थित हुए आचार्यो ने सामूहिक स्वतीवाचन के साथ पूजन आरम्भ किया सर्वप्रथम गणपति अम्बिका पूजन, वरुण पूजन, नबग्ररूपह पूजन मातृका पूजन के बाद भगवान परशुराम का पूजन कर 108 बतियों से नीराजन किया गया।

भगवान परशुराम माता रेणुका, जद्मगनी के पुत्र के रूप मे अधर्म को समाप्त कर धर्म का स्थापना के लिए अबतरित हुए भगवान शिव ने इनके आराधना से खुश होकर इनको परसु फरसा प्रदान किये तबसे इनको परशुराम नाम हुआ ये भगवान शिव से धनुरबिद्या का ज्ञान प्राप्त किया ये भगवान बिस्नु के चठे अंसाबतार है ये किर्पचार्य, कर्ण आदि को धनुर्बीधा प्रदान किये जब जब पृथबी पर अधर्म बढ़ता है तब तब धर्म के स्थपना के लिए राम, कृष्णा, बलराम, परशुराम के रूप मे अबतार लेकर पृथबी पर सुख, शांति और धर्म का स्थपना करते है

शत्रु बाधा के समय इनका आराधना से जन मानस शत्रु बाधा से मुक्त हो जाते है मानब मात्र को भगवान का सरनागत हो समाज गाँव राज्य और राष्ट्र कल्याण का कार्य करना चाहिए पूजन के बाद भक्तो के बीच प्रसाद बितरण किया गया जन्मोत्सव मनाने मे मुख्य रूप से पंडित मुन्ना पाण्डेय, धूब उपाध्याय, रमेश पाण्डेय, अशोक कुमार झा, अमित शर्मा, रबि जोशी, दीपक जोशी, नन्दलाल पांडेय, कुमोद कुमार झा, अनूप मिश्रा, नितिन झा, सर्बेस पाण्डेय, एबं अन्य आचार्यगन उपस्थित थे।



