चक्रधरपुर रेल मंडल के डीआरएम (मंडल रेल प्रबंधक) के निर्देश पर टाटानगर रेलवे स्टेशन के एरिया मैनेजर ने आज सरयू राय से भेंट की और बताया कि रेल प्रशासन यात्री रेलगाड़ियों को समय पर चलाने के लिए अथक प्रयास कर रहा है
रेल प्रशासन यात्री रेलगाड़ियों को समय पर चलाने के लिए अथक प्रयास कर रहा है और इसमें सफलता भी मिल रही है। हम उम्मीद करते हैं कि कुछ दिनों में जनता को यात्री रेलगाड़ियों के परिचालन में हो रही लेटलतीफी की शिकायत समाप्त हो जाएगी

जमशेदपुर- चक्रधरपुर रेल मंडल के डीआरएम (मंडल रेल प्रबंधक) के निर्देश पर टाटानगर रेलवे स्टेशन के एरिया मैनेजर ने आज सरयू राय से भेंट की और बताया कि रेल प्रशासन यात्री रेलगाड़ियों को समय पर चलाने के लिए अथक प्रयास कर रहा है और इसमें सफलता भी मिल रही है। हम उम्मीद करते हैं कि कुछ दिनों में जनता को यात्री रेलगाड़ियों के परिचालन में हो रही लेटलतीफी की शिकायत समाप्त हो जाएगी। उन्होंने मुझे एक चार्ट भी सौंपा, जिसमें करीब 13 यात्री रेलगाड़ियों का उल्लेख है जो टाटानगर से सही समय पर खुली हैं और कतिपय ऐसी ट्रेनें भी हैं जो समय पर पहुंची हैं। इसमें साउथ बिहार, टाटा-थावे और स्टील एक्सप्रेस का भी उल्लेख है। एरिया मैनेजर द्वारा दिया गया चार्ट सुलभ संदर्भ हेतु संलग्न है।
टाटानगर के रेल एरिया मैंनेजर ने मुझे बताया कि हाल के कुछ दिनों में चक्रधरपुर मंडल में मालगाड़ियों के परिचालन में दो प्रतिशत की कमी हुई है। यह कमी केवल इसलिए हुई है कि यात्री रेलगाड़ियों के परिचालन में हो रही लेटलतीफी में सुधार हो। मैंने उनसे यही कहा कि इस तरह के आंकड़े रेल प्रशासन की तत्परता और सक्रियता के सुबूत हो सकते हैं परंतु ये आम यात्री को संतुष्ट नहीं करते। हमें इससे कोई खास मतलब नहीं है कि मालगाड़ियों के परिचालन में कमी हो रही है या वृद्धि हो रही है। हमें केवल और केवल यात्री रेल गाड़ियों के टाटानगर रेलवे स्टेशन पर सही समय पर पहुंचने और सही समय पर खुलने से ही मतलब है और एकमात्र यही बिंदु हम लोगों के आंदोलन का उद्देश्य है। रेल प्रशासन मालगाड़ियों की संख्या कितनी कम करता है, यह हमारा विषय नहीं है। हमारा विषय यह है कि भले ही मालगाड़ियों की संख्या चक्रधरपुर रेल डिवीजन में बढ़े, परंतु यात्री गाड़ियों का जमशेदपुर समय पर आना और जाना सुनिश्चित हो।
इसके पूर्व चक्रधरपुर रेल मंडल के डीआरएम ने भी मुझे फोन किया और कल संपन्न रेल यात्री संघर्ष समिति की बैठक में दिये गए वक्तव्यों और एक समाचार पत्र में इस संदर्भ में छपी खबर की हेडलाइन पर आपत्ति करते हुए उन्होंने अपनी तकलीफ व्यक्त की कि एक ओर हम लोग यात्री रेलगाड़ियों को समय पर चलाने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं तो दूसरी ओर इस तरह के निरुत्साहित करने वाले वक्तव्य हमें दुख पहुंचाते हैं। मैंने उन्हें स्पष्ट किया कि किसी बड़ी मीटिंग में भाषण करने वाले अपनी मनोभावना को अपनी तकलीफ और रंजिश के हिसाब से अभिव्यक्त करते हैं। इतना स्पष्ट है कि यात्री गाड़ियों की लेटलतीफी से हर किसी के मन में आक्रोश है। कोई समाचार पत्र अगर अपने विवेक के अनुसार किसी समाचार का हेडिंग (शीर्षक) लगाता है तो यह उसका विशेषाधिकार है।
मैंने चक्रधरपुर रेल डिवीजन के डीआरएम को और जमशेदपुर के एरिया मैनेजर को स्पष्ट रुप से बताया कि हम लोगों का संघर्ष रेल प्रशासन से नहीं है। हम लोगों का संघर्ष केवल और केवल एक ही बिंदु पर है और वह है यात्री रेलगाड़ियों के परिचालन में हो रही लेटलतीफी का खात्मा। इस लेटलतीफी से रेल से यात्रा करने वाला हर तबका परेशान है। यदि लेटलतीफी खत्म नहीं होती है तो रेल यात्री संघर्ष समिति संघर्ष के अगले चरण का एलान करेगी।
सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्स’ पर आ रही खबर के अनुसार, यात्री रेलगाड़ियों के परिचालन के मामले में रेल प्रशासन द्वारा चालाकी बढ़ती जा रही है। उदाहरण के लिए दिनांक 13 अप्रैल को 68134 (बादाम पहाड़ मेमू) 1.5 घंटे लेट थी, मगर इसे 15 मिनट लेट बताया गया। इसी तरह हावड़ा मेल एक घंटे लेट, चक्रधरपुर-टाटा पौने दो घंटे लेट, शालीमार एक घंटा लेट चलने की सूचना भी एक्स पर मिल रही है। रेल प्रशासन को इन ट्रेनों की लेटलतीफी दूर करने की ईमानदार कोशिश करनी चाहिए और प्रत्येक दिन यात्री ट्रेनों के परिचालन के बारे में एक प्रतिवेदन जारी करना चाहिए।



