पंडित दीनदयाल के जयंती पर स्वदेशी जागरण मंच ने पुरे देश में स्वदेशी सप्ताह का आगाज़ किया
इसी कार्यक्रम के तहत जमशेदपुर महानगर ने बिस्टुपुर स्थित कार्यालय में पंडित दीनदयाल जी की जयंती मनाई और स्वदेशी समर्थकों ने आज से ही 2 अक्टूबर तक पुरे ज़िले मे घर घर सम्पर्क अभियान चलाने का संकल्प लिया। इस पुरे सप्ताह में मंच के कार्यकर्ता अपने अपने नगरों मे स्वदेशी - विदेशी वस्तुओं की सूची घर घर बांटेंगे और ज़िले के निवासियों से स्वदेश निर्मित वस्तुओं का उपयोग करने की अपील करेंगे

जमशेदपुर- आज पंडित दीनदयाल के जयंती पर स्वदेशी जागरण मंच ने पुरे देश में स्वदेशी सप्ताह का आगाज़ किया

इसी कार्यक्रम के तहत जमशेदपुर महानगर ने बिस्टुपुर स्थित कार्यालय में पंडित दीनदयाल जी की जयंती मनाई और स्वदेशी समर्थकों ने आज से ही 2 अक्टूबर तक पुरे ज़िले मे घर घर सम्पर्क अभियान चलाने का संकल्प लिया। इस पुरे सप्ताह में मंच के कार्यकर्ता अपने अपने नगरों मे स्वदेशी – विदेशी वस्तुओं की सूची घर घर बांटेंगे और ज़िले के निवासियों से स्वदेश निर्मित वस्तुओं का उपयोग करने की अपील करेंगे।
पंडित दीनदयाल जी के जीवनी पर आधारित गोष्ठी मे मंच के राष्ट्रीय परिषद सदस्य मनोज सिंह जी ने बताया कि पंडित दीनदयाल जी ने कहा कि मनुस्य का जब हम विचार करते हैं, तो केवल भौतिक शरीर के सुक्षुबिदा और आर्थिक चिंतन तक अगर रहेंगे तो सारी सम्रिद्धी के बाद भी जो मनुस्य का लक्ष जीवन में सुखी और संतुष्ठ होना वो नहीं हो सकता है।किसी व्यक्ति के पास सारी सम्रिद्धी होने के बाद भी उसके जीवन में उपद्रव क्यों रहता है – क्योंकि वो मनुष्य का एकांगी विचार कर रहा है। अगर मनुस्य को सुखी होना है तो भौतिक संसाधनों के साथ साथ, उसे मन का विचार करना होगा। उसे बुद्धी के लिए अच्छे सत्संग, अच्छी पुस्तक, अच्छी चीजों का विचार करना होगा और आत्मा का विचार करना होगा। किसी के जीवन में जब तक इन चारों का विकास नहीं होगा तब तक मनुष्य सुखी और संतुष्ट नहीं हो सकता है। आजादी के बाद देश को दो चस्मों से देखा जा रहा था – या तो देश का विकास अमेरिका, इंग्लेंड और यूरोप जैसे पूंजीवादी देशों के अनुसार चल के हो सकता है या जब उसमें असफल हो रह थे तो कुछ लोगों का मानना था कि रसिया, चाइना ऐसे जो साम्यवादी देश थे उनके रास्ते पर चल कर हो सकता था। दिनदयाल जी ने कहा कि भारत का विचार भारत के द्रिष्टी से देख के करना होगा। भारत के जीवन मुल, भारत की संस्कृती, भारत के संसाधन, भारत के लोग, और इस आधार पे जो विकास की नीती बनेगी, वो भारत की नीती होगी और उस से भारत सुखी और संपन हो सकता है। भारतीय राजनीत में भारत को भारतीय द्रिष्टी से देखने का द्रिष्टी कोन और विचार पंडित दिनदयाल उपाध्याय जी ने दिया। उनका कहना था कि हम कुछ लोगों के विकास से देश को विक्सित नहीं कर सकते हैं, इसके लिए उन्होंने अन्तियोदय का विचार दिया। समाज में जो सबसे पीछे हैं, जो अभावों में जी रहे हैं, उनको भी मुख्य धारा में साथ लेकर आना होगा तो ये अन्तयोदय दर्शन, एकात्मानव दर्शन और स्वदेशी दर्शन होगा।
मंच के अखिल भारतीय सह पर्यावरण प्रमुख बन्दे शंकर सिंह जी ने कहा कि पंडित जी के जीवन पर भाषण बहुत लोग दे सकते है परन्तु उस जीवन को सभी नही जी सकते। जो देश प्रेम मे लिप्त होगा, जिसके जीवन मे अवश्यकताएं कम होंगी वही आपने जीवन मे सुखी भी रह सकता है और देश कि उन्नति मे योगदान भी कर सकता है। उन्होंने कहा कि 2047 तक देश विकसित तभी हो सकता है जब भारतीय कम्पनियां मुनाफे मे रहेंगी जिसके लिए हमें स्वदेशी निर्मित वस्तुवों का ही उपयोग करना होगा। विकसित भारत का आधार ही स्वदेशी है।
इस अवसर पर प्रांत प्रचार प्रमुख अमित मिश्रा, जिला संयोजिका राजपति देवी, महिला प्रमुख शोभा श्रीवास्तव, जे.के.एम राजू, राजकुमार साह, किरणजीत कौर, अनिल राय, विनिता शाह, अभिषेक बजाज, राजा राम, संजीत प्रमाणिक, गणेश नायर, शुक्ला हलधर, प्राची, ममता सिंह, एम.भवानी, आभा सिंह, संजना सिंह, रमेश कुमार सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्तागण एवं स्वदेशी समर्थक उपस्थित थे।




