ज्ञानेश कुमार को बर्खास्त करो, एसआईआर रद्द करो के नारे के साथ प्रदर्शन एवं सभा
मोदी सरकार ने कानून बनाकर चुनाव आयुक्तों को मुकदमों से संरक्षण भी दे दिया था। ताकि ज्ञानेश कुमार जैसे चुनाव आयुक्त कानून से बिना डरे कानून तोड़ते रहें। जैसे ही ज्ञानेश कुमार की करतूतें उजागर हुईं, भाजपा के नेता ज्ञानेश कुमार के बचाव में कूद पड़े हैं, यह उनकी मिलीभगत का सबूत है

ज्ञानेश कुमार को बर्खास्त करो, एसआईआर रद्द करो के नारे के साथ प्रदर्शन एवं सभा

जमशेदपुर- आज बिरसा चौक, साकची गोलचक्कर पर जनांदोलन एकजुटता मंच के बैनर तले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की असंवैधानिक भूमिका के खिलाफ एक प्रदर्शन और जनसभा की गयी। इस विषय पर पर्चे का वितरण भी किया गया।
मन्थन, सुमित राय, सुजय राय और डेमका सोय ने सभा का संचालन संयुक्त रूप से किया । रईस अफरीदी, शाहिद, सुखचन्द्र झा, अर्पिता, बैद्यनाथ प्रसाद, जगधर मंडल, सीपीआई , देवाशीष मुखर्जी, जगत, सोहन महतो आदि ने सभा को सम्बोधित किया। इस आयोजन को सफल बनाने में सियाशरण शर्मा, राजश्री, लिलि शर्मा, रामकवीन्द्र सिंह, सुखचन्द्र झा, गणेश राम, रबीन्द्र प्रसाद, गौतम बोस, सपन दासगुप्ता, अंकुर शाश्वत, मो.शाहिद, अशोक शुभदर्शी, जयकिशोर, अजय मेहताब, मनोज गुप्ता, सुखवंत सिंह, विकास कुमार, उजागिर यादव आदि की उल्लेखनीय भूमिका रही।
वक्ताओं ने नरेन्द्र मोदी और अमित शाह के इशारे पर ज्ञानेश कुमार के द्वारा पूरी चुनाव प्रक्रिया को बर्बाद करने की कार्यवाहियों पर तीखा आक्रोश व्यक्त किया। ज्ञानेश कुमार को अविलंब बर्खास्त कर उसपर मुकदमा चलाया जाय। एसआईआर की पूरी प्रक्रिया रद्द होनी चाहिए। एसआईआर से बने वोटर लिस्ट के आधार पर हुए सभी चुनाव रद्द होने चाहिए। जिन मतदाताओं का नाम कटा है , उन्हें जोड़कर पुरानी और सही मतदाता सूची के आधार पर फिर से चुनाव होना चाहिए। सुप्रीमकोर्ट को इस पर स्वतः संज्ञान लेकर नये चुनाव आयुक्त की बहाली करनी चाहिए।
सरकारी पक्ष के बहुमत वाली चुनाव आयोग की चयन समिति को रद्द कर फिर से सुप्रीमकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को जोड़ कर स्वतंत्र प्रतिनिधित्व के बहुमत वाली चयन समिति बननी चाहिए। ऐसी अनेकानेक मांगें वक्ताओं ने उठायी। जनता से आह्वान किया गया कि वे वोट डकैती करने वाले के खिलाफ आंदोलन करें तथा भारतीय नागरिकता और लोकतंत्र का भविष्य बचायें।
वितरित पर्चे में कहा गया है कि देश में एसआईआर से 10% से ज्यादा आबादी को मतदाता सूची से हटा दिया गया है। झारखंड में भी फिलहाल 44 लाख मतदाता हट चुके हैं। तार्किक विसंगति के नाम पर देश में करोड़ों मतदाताओं को नोटिस जारी की गई है। जबकि अधिकांश त्रुटियां छोटी मोटी मानवीय त्रुटियां हैं और उसमें भी अधिकांश प्रशासनिक और चुनावी कर्मचारियों द्वारा की गयी हैं। तार्किक विसंगति के पैमाने खुद में विसंगतियों से भरे पड़े हैं। झारखंड में मैपिंग न होने के कारण एवं तार्किक विसंगति के नाम पर कुल 63 लाख मतदाताओं (लगभग 28%) को नोटिस जारी की गई है। इन मनमानी और बेतुकी नोटिसों से राज्य के आदिवासी, मूलवासी, दलित, वंचित,भूमिहीन एवं अशिक्षित, महिलाएं, अल्पसंख्यक बड़े पैमाने पर परेशान हो रहे हैं। बहुत बड़ी संख्या में नाम कटने की संभावना है। ज्ञानेश कुमार ने दोनों आयुक्तों को अंधेरे में रखकर ऐसा सॉफ्टवेयर भी लागू किया है जिससे दिल्ली में बैठकर किसी भी राज्य की मतदाता सूची में नाम जोड़ा/हटाया जा सकता है। पहले मतदाता को जोड़ने या हटाने का काम प्रत्यक्ष सत्यापन के साथ ERO करता रहा है। अब ERO सही नाम भी नहीं जोड़ सकता।
मोदी सरकार ने कानून बनाकर चुनाव आयुक्तों को मुकदमों से संरक्षण भी दे दिया था। ताकि ज्ञानेश कुमार जैसे चुनाव आयुक्त कानून से बिना डरे कानून तोड़ते रहें। जैसे ही ज्ञानेश कुमार की करतूतें उजागर हुईं, भाजपा के नेता ज्ञानेश कुमार के बचाव में कूद पड़े हैं, यह उनकी मिलीभगत का सबूत है।



