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प्राचीन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर राष्ट्रीय संगोष्ठी के उदघाटन सत्र का कार्यक्रम विवरण

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) जमशेदपुर के भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्र द्वारा प्राचीन भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर 15वीं राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन 30 मार्च 2026 को किया गया। दो दिवसीय इस संगोष्ठी का उद्देश्य भारतीय पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों के पुनरुत्थान एवं आधुनिक विज्ञान के साथ उनके समन्वय पर विचार-विमर्श करना है

प्राचीन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर राष्ट्रीय संगोष्ठी के उदघाटन सत्र का कार्यक्रम विवरण

जमशेदपुर- राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) जमशेदपुर के भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्र द्वारा प्राचीन भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर 15वीं राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन 30 मार्च 2026 को किया गया। दो दिवसीय इस संगोष्ठी का उद्देश्य भारतीय पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों के पुनरुत्थान एवं आधुनिक विज्ञान के साथ उनके समन्वय पर विचार-विमर्श करना है।

उदघाटन सत्र डीजेएलएचसी (कक्ष संख्या 212) में आयोजित किया गया, जिसकी शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं माँ सरस्वती वंदना के साथ हुई। इसके पश्चात विशिष्ट अतिथियों का स्वागत किया गया। स्वागत भाषण प्रो. राम विनय शर्मा, अध्यक्ष, भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्र एवं उप-निदेशक, एनआईटी जमशेदपुर द्वारा प्रस्तुत किया गया।

उदघाटन सत्र में प्रो. राकेश सहगल (एनआईटी हमीरपुर एवं पूर्व निदेशक, एनआईटी श्रीनगर) ने आधुनिक शिक्षा एवं अनुसंधान में भारतीय ज्ञान परंपरा के समावेशन की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं प्रो. देवी प्रसाद मिश्रा, संस्थापक अध्यक्ष, भारतीय पारंपरिक ज्ञान विज्ञान समाज (BPGVS) ने प्राचीन भारतीय प्रौद्योगिकी की वैज्ञानिकता, समृद्धि एवं स्थायित्व पर प्रकाश डाला।
अपने संबोधन में प्रो. गौतम सूत्रधार, निदेशक, एनआईटी जमशेदपुर ने भारतीय पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों के पुनर्जीवन तथा उन्हें आधुनिक तकनीकी विकास के साथ जोड़ने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि यह सतत विकास एवं वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए अत्यंत आवश्यक है।
डॉ. ओम प्रकाश पांडेय ने अपने वक्तव्य में ज्ञान (Gyan), विज्ञान (Vigyan) एवं प्रज्ञान (Pragyan) के पारस्परिक संबंध को रेखांकित करते हुए भारतीय परंपराओं पर आधारित समग्र दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता बताई।

उदघाटन सत्र में संगोष्ठी के प्रमुख विषयों पर भी प्रकाश डाला गया, जिनमें प्राचीन भारतीय प्रौद्योगिकियों की स्थायित्व, प्रकृति-सम्मतता एवं समाज-केंद्रित दृष्टिकोण शामिल हैं। पारंपरिक सिंचाई प्रणालियों, धातुकर्म तथा सतत कृषि पद्धतियों जैसे उदाहरणों के माध्यम से भारत की समृद्ध तकनीकी विरासत को प्रस्तुत किया गया।

दो दिवसीय इस संगोष्ठी में नृजातीय वनस्पति ज्ञान, पारंपरिक कृषि, कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा भारतीय ज्ञान प्रणाली जैसे विषयों पर व्याख्यान आयोजित किए जाएंगे, जिनमें इंजीनियरिंग, कृषि, वास्तुकला, आयुर्वेद एवं खगोल विज्ञान जैसे विविध क्षेत्रों को शामिल किया गया है।
कार्यक्रम का समापन डॉ. जितेंद्र कुमार द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसके पश्चात वंदे मातरम् गाया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. मनीष कुमार झा द्वारा किया गया।

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