धुसा–युगल ने अंग्रेजों के खिलाफ दिखाई थी अदम्य वीरता – संजीव सरदार
देवली चौक पर शहीद धुसा–युगल की आदमकद प्रतिमा का अनावरण कर भूमिज (चुहाड़) विद्रोह के अमर शहीदों को दी गई श्रद्धांजलि

धुसा–युगल ने अंग्रेजों के खिलाफ दिखाई थी अदम्य वीरता – संजीव सरदार

देवली चौक पर शहीद धुसा–युगल की आदमकद प्रतिमा का अनावरण कर भूमिज (चुहाड़) विद्रोह के अमर शहीदों को दी गई श्रद्धांजलि
पोटका- पोटका प्रखंड के देवली चौक में रविवार को भूमिज (चुहाड़) विद्रोह के अमर वीर शहीद धुसा–युगल का शहीद दिवस आदिम भूमिज ल लश्कर एवं धुसा–युगल संरक्षण कमिटी के तत्वावधान में धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि पोटका विधायक संजीव सरदार के हाथों देवली चौक में शहीद धुसा–युगल की आदमकद प्रतिमा का अनावरण किया गया।
पारंपरिक पूजा और सांस्कृतिक प्रस्तुति से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
प्रतिमा अनावरण से पूर्व भूमिज समाज के लोगों द्वारा पारंपरिक रीति-रिवाज से पूजा-अर्चना की गई। साथ ही सांस्कृतिक नृत्य और संगीत की प्रस्तुति ने पूरे कार्यक्रम को ऐतिहासिक और भावनात्मक स्वरूप प्रदान किया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में मुखिया अर्धेंदू सरदार, ग्राम प्रधान सोदा सरदार, आभुस के सुदर्शन भूमिज, मानसिंह सरदार, जयपाल भूमिज, शत्रुघ्न सरदार, धीरेन सरदार, बाबूलाल सरदार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और समाज के लोग उपस्थित थे।
धुसा–युगल ने अंग्रेजों के खिलाफ दिखाई थी अदम्य वीरता- संजीव सरदार
सभा को संबोधित करते हुए विधायक संजीव सरदार ने कहा कि शहीद धुसा और युगल भूमिज समाज के ऐसे वीर योद्धा थे, जिन्होंने चुहाड़ विद्रोह के दौरान अंग्रेजों के खिलाफ साहस और बलिदान की मिसाल पेश की। उन्होंने बताया कि दोनों वीर पोटका प्रखंड के सारसे बुरुहातू गांव के निवासी थे, जिन्हें अंग्रेजों ने आज ही के दिन देवली पाट में फांसी पर चढ़ा दिया था। ऐसे महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेने की आज सबसे अधिक आवश्यकता है।
ग्रामीणों की मांग पर देवली चौक का नामकरण शहीदों के नाम पर
विधायक ने कहा कि ग्रामीणों के सहयोग और लंबे समय से चली आ रही मांग के अनुरूप देवली चौक का नामकरण शहीद धुसा–युगल के नाम पर किया गया है। यह आने वाली पीढ़ियों को उनके बलिदान की याद दिलाता रहेगा। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के इतिहास और शहीदों की विरासत को संरक्षित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
समिति के सदस्यों का रहा अहम योगदान
आयोजन को सफल बनाने में समिति के जगन्नाथ सरदार, उत्तम सरदार, पंकज सरदार, रामपडो सरदार, सुसेन्द्र सरदार, सुभाष सरदार, आनंद सरदार, सरोज सरदार, भोगान सरदार, विशेश्वर सरदार, निखिल सहित अन्य सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही




