बिरसानगर जोन नंबर-6 में धूमधाम से मनाया गया करमा उत्सव प्रकृति, कृषि, भाई-बहन के प्रेम और समृद्धि का प्रतीक है करमा पर्व
बिरसानगर जोन नंबर-6 स्थित करमा अखाड़ा में करमा पूजा एवं उत्सव पारंपरिक रीति-रिवाज और उत्साह के साथ मनाया गया। इस दौरान समाज के लोगों ने पारंपरिक ढोल-नगाड़ों के साथ करम डाली की पूजा-अर्चना की और परिवार एवं समाज की सुख-समृद्धि, खुशहाली तथा उन्नति की कामना की। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि करमा पर्व प्रकृति, कृषि और फसल से जुड़ा प्राचीन पर्व है। भादो माह की एकादशी के अवसर पर मनाया जाने वाला यह पर्व प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम है। करम डाली हरियाली और लहलहाती फसल का प्रतीक मानी जाती है। यह पर्व कृषि, प्रकृति संरक्षण, मानव जीवन और स्वास्थ्य से भी जुड़ा हुआ है। वक्ताओं ने कहा कि करमा केवल पूजा-अर्चना का पर्व नहीं, बल्कि भाई-बहन के प्रेम, आपसी एकजुटता, खुशहाली और समृद्धि का संदेश भी देता है। लोगों ने प्रार्थना की कि परिवार, समाज, राज्य और देश में शांति, सुरक्षा एवं विकास का वातावरण बना रहे

बिरसानगर जोन नंबर-6 में धूमधाम से मनाया गया करमा उत्सव प्रकृति, कृषि, भाई-बहन के प्रेम और समृद्धि का प्रतीक है करमा पर्व



जमशेदपुर- बिरसानगर जोन नंबर-6 स्थित करमा अखाड़ा में करमा पूजा एवं उत्सव पारंपरिक रीति-रिवाज और उत्साह के साथ मनाया गया। इस दौरान समाज के लोगों ने पारंपरिक ढोल-नगाड़ों के साथ करम डाली की पूजा-अर्चना की और परिवार एवं समाज की सुख-समृद्धि, खुशहाली तथा उन्नति की कामना की।


कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि करमा पर्व प्रकृति, कृषि और फसल से जुड़ा प्राचीन पर्व है। भादो माह की एकादशी के अवसर पर मनाया जाने वाला यह पर्व प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम है। करम डाली हरियाली और लहलहाती फसल का प्रतीक मानी जाती है। यह पर्व कृषि, प्रकृति संरक्षण, मानव जीवन और स्वास्थ्य से भी जुड़ा हुआ है।
वक्ताओं ने कहा कि करमा केवल पूजा-अर्चना का पर्व नहीं, बल्कि भाई-बहन के प्रेम, आपसी एकजुटता, खुशहाली और समृद्धि का संदेश भी देता है। लोगों ने प्रार्थना की कि परिवार, समाज, राज्य और देश में शांति, सुरक्षा एवं विकास का वातावरण बना रहे।


इस अवसर पर दुर्गापूजा को लेकर भी लोगों से पूजा के मूल स्वरूप और आस्था को बनाए रखते हुए अनावश्यक आडंबर एवं दिखावे से बचने की अपील की गई। वक्ताओं ने धार्मिक आयोजनों में सादगी और आध्यात्मिकता को बढ़ावा देने पर जोर दिया।


आयोजन समिति से जुड़े प्रकाश कोया ने बताया कि बिरसानगर में करमा उत्सव का आयोजन वर्ष 1972 से लगातार होता आ रहा है। अलग-अलग क्षेत्रों से बिरसानगर आकर बसे लोगों ने अपनी संस्कृति और परंपराओं को भी जीवित रखा है। उन्होंने कहा कि करमा अखाड़ा लंबे समय से क्षेत्र के लोगों की आस्था का केंद्र रहा है।


उन्होंने बताया कि करमा अखाड़े के संरक्षण और सुरक्षा के लिए चारदीवारी का निर्माण कराया गया है। इसके लिए उन्होंने पश्चिमी विधानसभा क्षेत्र के विधायक के सहयोग के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि इससे अखाड़े के संरक्षण में मदद मिलेगी और आने वाली पीढ़ियां भी इस परंपरा को आगे बढ़ा सकेंगी।

प्रकाश कोया ने बिरसानगर के विकास और सामाजिक संरचना में चंचल लकड़ा उर्फ मनोज लकड़ा के परिवार के योगदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय कुंजल लकड़ा ने क्षेत्र में विभिन्न समुदायों के लिए पूजा स्थल, चर्च, गुरुद्वारा, मंदिर, खेल मैदान और स्कूल आदि के लिए स्थान उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। बिरसानगर के लोगों के अधिकारों और विकास से जुड़े प्रयासों में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा।
इस अवसर पर चंचल लकड़ा, बिरसा मुंडा पंचायत समिति से जुड़े प्रतिनिधि, ने करमा पूजा की शुभकामनाएं दीं और आयोजन में शामिल सभी लोगों के प्रति आभार जताया। उन्होंने पूरे जमशेदपुरवासियों को करमा पूजा की शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम में उरांव समाज की सक्रिय भागीदारी रही। प्रकाश कोया ने कहा कि उरांव समाज क्षेत्र की सामाजिक गतिविधियों, आंदोलनों और सकारात्मक कार्यों में हमेशा सहयोगी रहा है तथा करमा पर्व उनकी संस्कृति और परंपरा से गहराई से जुड़ा हुआ है।
करमा उत्सव के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे और पारंपरिक तरीके से पूजा-अर्चना कर पर्व की खुशियां साझा कीं।
इस मौके पर अध्यक्ष बुधराम खालखो, सचिव गणेश कुजूर, कार्तिक उरांव, राजू खालखो, कमल कोया, अरुणा लकड़ा, गीता कोया, बिरसा तिर्की, अनुप टोप्पो, जगत कुजूर, सूरज खालखो, राजेन कुजूर सहित अन्य उपस्थित थे।



