जमशेदपुर परिसदन में पूर्वी सिंहभूम में आदिवासी पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था एवं ओल चिकी हुल बैसी के संयुक्त तत्वाधान में संवाददाता सम्मेलन का आयोजन किया गया। संवाददाता सम्मेलन में सुशासन व्यवस्था के अगुआ एवं सामाजिक प्रतिनिधि शामिल हुए
संवाददाता सम्मेलन में मुख्य रूप से कई मांगे झारखंड सरकार से की गई। जिसमें जैक आठवां बोर्ड में संथाली भाषा के छात्र-छात्राओं को मिले "डी ग्रेड" के संबंध में उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। आठवां बोर्ड परीक्षा उत्तर पुस्तिका प्रपत्र के पुन: भौतिक जांच कर रिजल्ट को सुधार किया जाए। संथाली भाषा ओल चिकी लिपि के शिक्षकों का पद सृजित करते हुए ओल चिकी शिक्षकों की अविलंब बहाली की जाए

जमशेदपुर- आज जमशेदपुर परिसदन में पूर्वी सिंहभूम में आदिवासी पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था एवं ओल चिकी हुल बैसी के संयुक्त तत्वाधान में संवाददाता सम्मेलन का आयोजन किया गया। संवाददाता सम्मेलन में सुशासन व्यवस्था के अगुआ एवं सामाजिक प्रतिनिधि शामिल हुए।
संवाददाता सम्मेलन में मुख्य रूप से कई मांगे झारखंड सरकार से की गई। जिसमें जैक आठवां बोर्ड में संथाली भाषा के छात्र-छात्राओं को मिले “डी ग्रेड” के संबंध में उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। आठवां बोर्ड परीक्षा उत्तर पुस्तिका प्रपत्र के पुन: भौतिक जांच कर रिजल्ट को सुधार किया जाए। संथाली भाषा ओल चिकी लिपि के शिक्षकों का पद सृजित करते हुए ओल चिकी शिक्षकों की अविलंब बहाली की जाए। सत्र 2026 -27 में संथाली भाषा में पढ़ाई और ओल चिकी लिपि से शुरू करने की सुनिश्चित करें एवं सुचारु रूप से पढ़ाई संचालन करने के लिए पाटन सामग्री ओल चिकी लिपि से तैयार कर विद्यार्थियों को उपलब्ध कराया जाए। संथाली भाषा संविधान के आठवीं सूची में दर्ज है इसलिए प्रदेश में प्रथम राजभाषा का दर्जा दिया जाए।
झारखंड प्रदेश के प्रत्येक बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, सरकारी कार्यालय, सरकारी, गैर सरकारी और अर्ध सरकारी संस्थाओं एवं सार्वजनिक जगहों पर ओल चिकी लिपि से नाम लिखा जाए।
झारखंड लोक भवन के मुख्य द्वार पर ओल चिकी लिपि से लोक भवन लिखा जाए। झारखंड प्रदेश में संथाली अकादमी काउंसिल का अविलंब गठन किया जाए। जेटेट परीक्षा में संताली भाषा को ओल चिकी लिपि से लिखने की मान्यता दिया जाए और परीक्षा आयोजन का अविलंब अधिसूचना जारी किया जाए।
संवाददाता सम्मेलन में ओल चिकी लिपि के महासचिव दुर्गा चरण मुर्मू, माझी बाबा बिंदु सोरेन, बाबूराम सोरेन आदि ने अपने विचार रखे।




