सिकल सेल एनिमिया बीमारी के सम्बन्ध में आज जिस प्रकार की जागरुकता के साथ इस दिवस को मनाया गया है, उस तरह की जागरुकता को हर स्तर तक विशेष कर युवाओं तक पहुंचाने की आवश्यकता है
उस तरह की जागरुकता को हर स्तर तक विशेष कर युवाओं तक पहुंचाने की आवश्यकता है ताकि इस अनुवांशिक बीमारी के सम्बन्ध में युवा जागरुक हो और इसके सम्बन्ध में वे अधिक से अधिक जानकर समाज और देश को इस रोग से बचाने के लिए आवश्यक कदम उठायें एवं जो लोग इससे प्रभावित है, उनके लिए वे नियमित रक्तदान करें। उक्त विचार आज रेड क्रॉस सोसाईटी वं जमशेदपुर ब्लड सेन्टर (जमशेदपुर ब्लड बैंक) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित विश्व सिकल सेल एनिमिया जागरूकता दिवस और राष्ट्रीय सिकल सेल एनिमिया उन्मूलन अभियान पर जिला के उपायुक्त सह अध्यक्ष रेड क्रॉस सोसाईटी, पूर्वी सिंहभूम राजीव रंजन ने व्यक्त किया

जमशेदपुर- सिकल सेल एनिमिया बीमारी के सम्बन्ध में आज जिस प्रकार की जागरुकता के साथ इस दिवस को मनाया गया है

उस तरह की जागरुकता को हर स्तर तक विशेष कर युवाओं तक पहुंचाने की आवश्यकता है ताकि इस अनुवांशिक बीमारी के सम्बन्ध में युवा जागरुक हो और इसके सम्बन्ध में वे अधिक से अधिक जानकर समाज और देश को इस रोग से बचाने के लिए आवश्यक कदम उठायें एवं जो लोग इससे प्रभावित है, उनके लिए वे नियमित रक्तदान करें। उक्त विचार आज रेड क्रॉस सोसाईटी वं जमशेदपुर ब्लड सेन्टर (जमशेदपुर ब्लड बैंक) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित विश्व सिकल सेल एनिमिया जागरूकता दिवस और राष्ट्रीय सिकल सेल एनिमिया उन्मूलन अभियान पर जिला के उपायुक्त सह अध्यक्ष रेड क्रॉस सोसाईटी, पूर्वी सिंहभूम राजीव रंजन ने व्यक्त किया।

उन्होने कहा कि जिन मरीजों को रक्त की आवश्यकता होती है, उनको लेकर यहां यह सुनिश्चित किया जाता है कि उन्हें जरूरत का रक्त उपलब्ध हो पायेगा यह महत्वपूर्ण है। इससे पूर्व उन्होने रेड क्रॉस सोसाईटी पूर्वी सिंहभूम के मानद सचिव बिजय कुमार सिंह, जमशेदपुर ब्लड सेन्टर की सचिव नलिनी राममूर्ति, उपसचिव रवीन दुग्गल, रेड क्रॉस के उपाध्यक्ष विकास सिंह, वीभीडीए के अध्यक्ष सुनील मुखर्जी, टी.एम.एच. में पैथोलॉजी चिकित्सक डॉ. फराह राणा के साथ संयुक्त रूप से दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। कार्यक्रम में डॉ. फराह राणा ने सिकेल सेल एनिमिया से सम्बन्धित जानकारी को रखते हुए कहा कि सिकल सेल एनीमिया (Sickle Cell Anemia) एक गंभीर अनुवांशिक (Genetic) रक्त संबंधी रोग है, जो माता-पिता से बच्चों में विरासत के रूप में पहुंचता है। इस बीमारी में लाल रक्त कोशिकाएँ (Red Blood Cells), जो सामान्यतः गोल एवं लचीली होती हैं, असामान्य रूप से हंसिया (Sickle) के आकार की हो जाती हैं। इन विकृत कोशिकाओं की आयु सामान्य रक्त कोशिकाओं की तुलना में बहुत कम होती है और ये लगातार टूटती रहती हैं, जिसके कारण शरीर में रक्त की कमी (एनीमिया) उत्पन्न हो जाती है। वर्तमान मे जो लोग इससे प्रभावित है, उन्हें नियमित रक्त एवं अन्य चिकित्सा उपायों से हम कुछ राहत दे सकते हैं, लेकिन हमें विचार करना चाहिए कि ऐसे बच्चे इस दुनिया में न आएं जो सिकेल सेल एनिमिया से प्रभावित हो, इसके लिए विवाह पूर्व सिकेल सेल एनिमिया कुण्डली मिलान प्रक्रिया को अपनाये जाने की जरूरत है जिसमें व्यक्ति अपने विषय में एक छोटे से जांच के माध्यम से यह जान पाता है कि वह कहीं इस बीमारी का वाहक तो नहीं है और अगर जोड़े में दोनों ही वाहक होंगे तो यह संभावना अधिक होगी कि उनकी संतान इस रोग से प्रभावित हो। कार्यक्रम का संचालन जमशेदपुर ब्लड सेन्टर के महाप्रबंधक संजय चौधरी ने किया। कार्यक्रम में रेड क्रॉस सोसाईटी, पूर्वी सिंहभूम के मानद सचिव ने कहा कि जागरूकता कार्यक्रम में मुख्य हिस्सा रक्तदाताओं का भी है, क्योंकि रक्तदान के माध्यम से ही हम उन लोगों को जीवन दे सकते हैं जो वर्तमान में इस बीमारी से प्रभावित है।
कार्यकम में धन्यवाद ज्ञापन रेड क्रॉस के उपाध्यक्ष विकास सिंह ने किया तथा कहा कि इस बीमारी की जागरुकता के लिए रेड क्रॉस अपने स्तर से लगातार प्रयास करेंगा तथा जरूरतमंदों को रक्त उपलब्ध कराने के लिए हमेशा की तरह नियमित रूप से तत्पर रहेगा। जमशेदपुर ब्लड सेन्टर में आयोजित कार्यक्रम के साथ ही उपायुक्त श्री रंजन ने वहां ब्लड डोनेशन, ब्लड सेपरेशन, अफेरेसिस डोनेशन की तकनीक से साथ ही ब्लड स्टोरेज तथा ब्लड बैंक से ब्लड लेने की तकनीक को भी देखा समझा। इस दौरान उन्होने आज आयोजित रक्तदान शिविर के रक्तदाताओं को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर उन्हें सम्मानित किया। कार्यक्रम के दौरान रेड क्रॉस कार्यकर्ताओं के साथ भीबीडीए तथा जमशेदपुर ब्लड सेन्टर के चिकित्सक तकनीशियन मुख्य रूप से उपस्थित थें।
सिकल सेल एनीमिया (Sickle Cell Anemia) : एक आनुवांशिक रक्त विकार
सिकल सेल एनीमिया (Sickle Cell Anemia) एक गंभीर अनुवांशिक (Genetic) रक्त संबंधी रोग है, जो माता-पिता से बच्चों में विरासत के रूप में पहुंचता है। इस बीमारी में लाल रक्त कोशिकाएँ (Red Blood Cells), जो सामान्यतः गोल एवं लचीली होती हैं, असामान्य रूप से हंसिया (Sickle) के आकार की हो जाती हैं। इन विकृत कोशिकाओं की आयु सामान्य रक्त कोशिकाओं की तुलना में बहुत कम होती है और ये लगातार टूटती रहती हैं, जिसके कारण शरीर में रक्त की कमी (एनीमिया) उत्पन्न हो जाती है।
इस रोग का मुख्य कारण हीमोग्लोबिन जीन में उत्परिवर्तन (Mutation) है। जब माता और पिता दोनों इस जीन के वाहक (Carrier) होते हैं, तब उनके बच्चों में सिकल सेल रोग होने की संभावना बढ़ जाती है। यह बीमारी विशेष रूप से जनजातीय समुदायों तथा कुछ विशेष भौगोलिक क्षेत्रों में अधिक पाई जाती है।
सिकल सेल एनीमिया से प्रभावित व्यक्तियों को बार-बार दर्द, कमजोरी, थकान, सांस लेने में कठिनाई, बार-बार संक्रमण तथा शरीर के विभिन्न अंगों में रक्त प्रवाह अवरुद्ध होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। समय पर जांच और उचित चिकित्सा से इसके प्रभाव को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
इस बीमारी के उन्मूलन हेतु व्यापक जन-जागरूकता आवश्यक है। विवाह पूर्व एवं गर्भावस्था के दौरान सिकल सेल स्क्रीनिंग कराना, परिवारों को आनुवांशिक परामर्श (Genetic Counseling) प्रदान करना, विद्यालयों एवं समुदायों में जागरूकता अभियान चलाना तथा नियमित स्वास्थ्य जांच को बढ़ावा देना अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि दो वाहकों के विवाह से पहले उनकी पहचान हो जाए, तो भविष्य में इस रोग से प्रभावित बच्चों के जन्म को काफी हद तक रोका जा सकता है। सिकल सेल एनीमिया से प्रभावित अनेक रोगियों को जीवनभर बार-बार रक्त चढ़ाने (Blood Transfusion) की आवश्यकता पड़ सकती है। ऐसे में समाज के स्वस्थ एवं योग्य युवाओं द्वारा नियमित रक्तदान करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। स्वैच्छिक रक्तदान न केवल जीवन बचाने का एक महान कार्य है, बल्कि सिकल सेल रोगियों के लिए आशा और सहारा भी प्रदान करता है। पर्याप्त रक्त भंडारण उपलब्ध रहने से रोगियों को आवश्यकता पड़ने पर समय पर सुरक्षित रक्त मिल सकता है, जिससे उनकी स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं को कम करने और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में सहायता मिलती है। इसलिए प्रत्येक स्वस्थ नागरिक को नियमित रक्तदान के महत्व को समझते हुए इस मानवीय अभियान में सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए।
सिकल सेल एनीमिया एक रोके जाने योग्य आनुवांशिक रोग है। समय पर जांच, जन-जागरूकता, आनुवांशिक परामर्श, सामुदायिक सहभागिता तथा स्वस्थ एवं समर्थ युवाओं के रक्तदान के माध्यम से हम इसके प्रसार को रोकने के साथ सिकल सेल रोगियों के जीवन में आशा, स्वास्थ्य और मुस्कान तथा “सिकल सेल मुक्त भारत” के लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं।




