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शहर की प्रतिष्ठित सांस्कृतिक संस्था “डैनफिट इंटरनेशनल” द्वारा विश्व नृत्य दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित “विश्व नृत्य दिवस समारोह 2026” अत्यंत भव्यता, गरिमा एवं उत्साह के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ
कार्यक्रम में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की अद्भुत झलक देखने को मिली। कथक, भरतनाट्यम और ओडिसी जैसे शास्त्रीय नृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कलाकारों ने अपनी उत्कृष्ट अभिव्यक्ति, भाव-भंगिमा, लय और ताल के माध्यम से मंच को जीवंत बना दिया, जिससे पूरा वातावरण कला और सौंदर्य से सराबोर हो उठा
जमशेदपुर- शहर की प्रतिष्ठित सांस्कृतिक संस्था “डैनफिट इंटरनेशनल” द्वारा विश्व नृत्य दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित “विश्व नृत्य दिवस समारोह 2026” अत्यंत भव्यता, गरिमा एवं उत्साह के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ
इस अवसर पर कोलकाता एवं दुर्गापुर से पधारे प्रतिष्ठित एवं उभरते कलाकारों ने अपनी विशेष प्रस्तुतियों से कार्यक्रम की गरिमा को और ऊंचाई प्रदान की। दुर्गापुर के सुप्रसिद्ध ओडिसी नर्तक सोमनाथ पांडा ने “नव दुर्गा” पर आधारित सशक्त प्रस्तुति देकर दर्शकों को भावविभोर कर दिया। वहीं, कोलकाता दूरदर्शन से मान्यता प्राप्त भरतनाट्यम कलाकार दीपान मैत्रा ने “त्यागराजा कृति” की प्रस्तुति से शास्त्रीय सौंदर्य का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। कोलकाता की युवा एवं प्रतिभाशाली कथक नृत्यांगना कौशानी कुंडू ने 16 मात्रा तीनताल, गणेश वंदना एवं ठुमरी प्रस्तुत कर दर्शकों की भरपूर सराहना अर्जित की। समारोह के समापन अवसर पर सभी प्रतिभागी कलाकारों को अंगवस्त्र, पुष्पगुच्छ एवं स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। साथ ही, महान गायिका स्वर्गीय आशा भोसले के लोकप्रिय गीतों पर डैनफिट इंटरनेशनल के कलाकारों द्वारा भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुति के माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
संस्था की नृत्य निदेशक मिष्टु मुखर्जी ने “शिव वंदना” की मनोहारी प्रस्तुति देकर कार्यक्रम को विशेष ऊंचाई प्रदान की।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से यहां कलाकार आए हुए हैं। काफी अच्छी प्रस्तुति हुई है। हमारा यह लक्ष्य की आज की युवाओं को शास्त्रीय नृत्य से जोड़ना है। वह अपने जड़ को पहचाने और इसे आगे बढ़ाएं।
“विश्व नृत्य दिवस समारोह 2026” की यह सफलता इस बात का सशक्त प्रमाण है कि भारतीय कला एवं संस्कृति आज भी समाज को जोड़ने, प्रेरित करने और नई ऊर्जा प्रदान करने का प्रभावी माध्यम है। यह आयोजन न केवल परंपरा और आधुनिकता के सुंदर संगम का प्रतीक बना, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए कला के प्रति जागरूकता और प्रेरणा का संदेश भी छोड़ गया।
रपट डॉ राजेश कुमार लाल दास




