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कथा मंजरी’ कार्यक्रम में आरती श्रीवास्तव ‘विपुला’ की “विपुला की कहानियाँ ” लोकार्पित

सिंहभूम जिला हिन्दी साहित्य सम्मेलन/तुलसी भवन द्वारा संस्थान के प्रयाग कक्ष में मासिक "कथा मंजरी" सह साहित्यकार अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' जयंती समारोह आयोजित किया गया । इस अवसर पर शआरती श्रीवास्तव 'विपुला' कृत कहानी संग्रह 'विपुला की कहानियाँ' का लोकार्पण भी सम्पन्न हुआ कार्यक्रम की अध्यक्षता तुलसी भवन के उपाध्यक्ष राम नन्दन प्रसाद तथा संचालन साहित्य समिति की अरुणा भूषण शास्त्री ने की

कथा मंजरी’ कार्यक्रम में आरती श्रीवास्तव ‘विपुला’ की “विपुला की कहानियाँ ” लोकार्पित

जमशेदपुर- सिंहभूम जिला हिन्दी साहित्य सम्मेलन/तुलसी भवन द्वारा संस्थान के प्रयाग कक्ष में मासिक “कथा मंजरी” सह साहित्यकार अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ जयंती समारोह आयोजित किया गया । इस अवसर पर शआरती श्रीवास्तव ‘विपुला’ कृत कहानी संग्रह ‘विपुला की कहानियाँ’ का लोकार्पण भी सम्पन्न हुआ

कार्यक्रम की अध्यक्षता तुलसी भवन के उपाध्यक्ष राम नन्दन प्रसाद तथा संचालन साहित्य समिति की अरुणा भूषण शास्त्री ने की ।

दीप प्रज्वलन के साथ समारोह की शुरुआत हुई। सरस्वती वंदना कैलाशनाथ शर्मा ने प्रस्तुत किया । स्वागत वक्तव्य तुलसी भवन के कार्यकारिणी के प्रसन्न वदन मेहता ने दिया। तदनुपरान्त हरिऔध जी का संक्षिप्त साहित्यिक जीवन परिचय अशोक पाठक ‘स्नेही’ एवं माधुरी मिश्रा ने प्रस्तुत किया
कार्यक्रम के दुसरे सत्र में मंचासीन अतिथियों द्वारा नगर की सुप्रसिद्ध लेखिका आरती श्रीवास्तव ‘विपुला’ कृत कहानी संग्रह विपुला की कहानियाँ का लोकार्पण किया गया

लोकार्पित पुस्तक पर पाठकीय प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सुरेश चन्द्र झा ने कहा कि आरती श्रीवास्तव विपुला के कथा संग्रह की एक प्रमुख विशेषता इसकी विविधता में निहित एकरूपता है । तत्पश्चात डाॅo वीणा पाण्डेय ‘भारती’ ने लेखिका आरती श्रीवास्तव ‘विपुला’ का विस्तृत साहित्यिक परिचय प्रस्तुत किया । इसके बाद तुलसी भवन द्वारा लेखिका को पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र, स्मृति चिन्ह एवं श्रीफल प्रदान कर सम्मानित किया गया

कार्यक्रम के अंतिम सत्र में ‘कथा मंजरी’ के अन्तर्गत विभिन्न विषयों को स्पर्श करती हुई कुल 20 कहानियों का पाठ किया गया, जिसकी समीक्षात्मक टिप्पणी कथा पाठ के उपरान्त श्री यमुना तिवारी व्यथित ने अपने धन्यवाद ज्ञापन के दौरान की । जो इस प्रकार है –
क्रम कथाकार कहानी का शीर्षक

1) श्री सुरेश चन्द्र झा परिवार
2) श्री ब्रजेन्द्र नाथ मिश्र पूजनीयता का भाव
3) श्री आलोक तिवारी पेड़ों की चीख
4) श्रीमती वीणा कुमारी नंदिनी इज्जत
5) डाॅo अनिता निधि जब जागे तब सवेरा
6) श्रीमती शकुंतला शर्मा निर्णय
7) श्रीमती माधुरी मिश्रा आ अब लौट चलें
8) डाॅ० अरुण कुमार शर्मा श्राद्धभोज
9) श्री वसंत जमशेदपुरी बिकाऊ है खरीदार चाहिए
10) डाॅo उदय प्रताप हयात चौबे गये छब्बे बनने
11) डाॅo एन. के. सिंह चुप रहो
12) श्रीमती अरुणा झा अरमाँ
13) श्रीमती मंजु कुमारी नोटिस नहीं आती
14) श्रीमती ममता कर्ण ‘मनस्वी’ मासूम
15) श्रीमती पद्मा प्रसाद विन्देश्वरी निश्चय की जीत
16) श्रीमती सुस्मिता मिश्रा सेवा की भावना
17) श्री मुकेश रंजन अप्रतिम
18) श्री बरुण पाण्डेय जिम्मेदार कौन
19) श्रीमती प्रणति शरण शाश्वत जननी
20) श्रीमती वंदना थकान

इस अवसर पर मुख्य रुप से तुलसी भवन के मानद महासचिव डाॅo प्रसेनजित तिवारी, साहित्य समिति के सचिव डाॅ० अजय कुमार ओझा, कैलाश नाथ शर्मा ‘गाजीपुरी’, वसंत जमशेदपुरी, वीणा पाण्डेय ‘भारती’, माधुरी मिश्रा, हरभजन सिंह रहबर,अनिता निधि, बलविन्दर सिंह , डाॅo संजय पाठक स्नेही, संतोष कुमार श्रीवास्तव, विजय भूषण, सुजय कुमार, विन्ध्वासिनी तिवारी, वंदना दास भारती, रीना गुप्ता श्रुति, पुष्पलता कुमारी, सविता सिंह मीरा, पुनम सिंह, प्रणति शरण सहित अनेक साहित्यकारों की उपस्थिति रही।

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