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राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का कोल्हान विश्वविधालय में एक दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर विश्वविद्यालय में एक भव्य कार्यक्रम 'विज्ञान में महिलाओं का योगदान’ विषय पर विकसित भारत की दिशा में विचार मंथनका' आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. अमरनाथ गुप्ता (आईआईटी खड़गपुर) एवं अन्य गणमान्य अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान किया गया। कार्यक्रम में लगभग 20 संकाय सदस्यों और 60 विद्यार्थियों की सहभागिता रही

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का कोल्हान विश्वविधालय में एक दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया

चाईबासा- राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर विश्वविद्यालय में एक भव्य कार्यक्रम ‘विज्ञान में महिलाओं का योगदान’ विषय पर विकसित भारत की दिशा में विचार मंथनका’ आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. अमरनाथ गुप्ता (आईआईटी खड़गपुर) एवं अन्य गणमान्य अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान किया गया। कार्यक्रम में लगभग 20 संकाय सदस्यों और 60 विद्यार्थियों की सहभागिता रही।
कार्यक्रम के दौरान डीन डॉ कृष्णा प्यारे , विज्ञान संकाय ने अपने संबोधन में विज्ञान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विज्ञान केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज, राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकास का आधार है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पहली बार 28 फरवरी 1987 को मनाया गया था, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच और जागरूकता विकसित करना है।
इस अवसर पर “महिलाएं विज्ञान में: विकसित भारत की उत्प्रेरक” विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। रजिस्ट्रार डॉ. रंजीत कर्ण (भौतिकी विभाग) ने सी. वी. रमन और उनका अदभुत रमन प्रभाव” विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि 28 फरवरी 1928 को सी. वी. रमन ने रमन प्रभाव की खोज की थी, जिसमें प्रकाश किसी माध्यम से गुजरते समय अपनी तरंगदैर्ध्य में परिवर्तन करता है। इस महान खोज के लिए उन्हें वर्ष 1930 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया और वे नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले पहले एशियाई वैज्ञानिक बने।
व्याख्यान में रमन प्रभाव के साथ-साथ रेले प्रकीर्णन, माई प्रकीर्णन तथा स्टोक्स और एंटी-स्टोक्स रेखाओं की भी चर्चा की गई। रमन प्रभाव को “मॉलिक्यूल फिंगरप्रिंट” के रूप में समझाया गया तथा इसके चिकित्सा, रसायन और अन्य वैज्ञानिक क्षेत्रों में उपयोग पर प्रकाश डाला गया।
कार्यक्रम में फ्रैक्टल, स्व-संयोजन और सॉफ्ट मैटर जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। सिएरपिंस्की गैस्केट जैसे उदाहरणों के माध्यम से फ्रैक्टल आयाम को समझाया गया। प्रकृति में फ्रैक्टल के उदाहरण—जैसे नदी तंत्र, रक्त संचार प्रणाली, तंत्रिका तंत्र, वृक्षों की संरचना और डीएनए—का उल्लेख किया गया। साथ ही डीएनए ओरिगामी और विशेष रोगों के लिए लक्षित चिकित्सा में इसके उपयोग की जानकारी दी गई।
वक्ताओं ने विद्यार्थियों को संदेश दिया कि “जहां चाह है, वहां राह है” और “कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं है।” उन्होंने जिज्ञासा विकसित करने, विज्ञान को समाज से जोड़ने तथा जलवायु और स्वास्थ्य जैसी चुनौतियों का समाधान विज्ञान के माध्यम से खोजने का आहवान किया।
कार्यक्रम का समापन डॉ ब्रहेश् कुमार, निर्देश, रेसर्च एंड डेवेलोपमेंट् सेल, ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. शोवित रंजन द्वारा किया गया। यह आयोजन विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नवाचार और राष्ट्रीय गौरव की भावना जागृत करने में सफल रहा

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