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इंस्टीट्यूट फॉर सोशल डेमोक्रेसी ( आई एस डी) एवं स्थानीय संस्था व संगठन यथा – कलाधाम, झारखंड सांस्कृतिक मंच, ,इप्टा जमशेदपुर, कला क्रिएशन, उदय मूवीज़, गोमहेद अखाड़ा के संयुक्त तत्वावधान में साझा महोत्सव आयोजित किया

इसमें उदय मूवीज़ द्वारा छत्तीसगढ़ी लोक नृत्य, गोमहेड अखाड़ा द्वारा रामचंद्र मार्डी, उर्मिला हांसदा, आकाश, आदित्य द्वारा संताली गीत, कला क्रिएशन द्वारा मसरूर सिद्दीकी ने हरिशंकर परसाई की रचना पर एकल प्रस्तुति ' मैं नर्क से बोल रहा हूं ', कला धाम द्वारा गौतम गोप लिखित एवं निर्देशित नाटक “पानी रे पानी -हाय रे पानी “ जो जलवायु संकट पर आधारित नाट्य प्रस्तुति दी

जमशेदपुर- आज इंस्टीट्यूट फॉर सोशल डेमोक्रेसी ( आई एस डी) एवं स्थानीय संस्था व संगठन यथा – कलाधाम, झारखंड सांस्कृतिक मंच, ,इप्टा जमशेदपुर, कला क्रिएशन, उदय मूवीज़, गोमहेद अखाड़ा के संयुक्त तत्वावधान में साझा महोत्सव आयोजित किया।

<img src="https://newjharkhandvani.in/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260420-WA0225-300×169.jpg" alt="" width="300" height="169" class="alignnone size-medium wp-imawp-image-1200
इसमें उदय मूवीज़ द्वारा छत्तीसगढ़ी लोक नृत्य, गोमहेड अखाड़ा द्वारा रामचंद्र मार्डी, उर्मिला हांसदा, आकाश, आदित्य द्वारा संताली गीत, कला क्रिएशन द्वारा मसरूर सिद्दीकी ने हरिशंकर परसाई की रचना पर एकल प्रस्तुति ' मैं नर्क से बोल रहा हूं ', कला धाम द्वारा गौतम गोप लिखित एवं निर्देशित नाटक “पानी रे पानी -हाय रे पानी “ जो जलवायु संकट पर आधारित नाट्य प्रस्तुति दी


इस कार्यक्रम में आर जे राज द्वारा शानदार मिमिक्री और लिटिल इप्टा जमशेदपुर द्वारा ‘ लोहे का आदमी ‘ का मंचन किया गया। पूरे आयोजन को आर जे राज ने संचालित किया और दर्शकों में उपस्थित बच्चों पर विशेष ध्यान दिया जो काबिल ए तारीफ़ है।
इस आयोजन के बारे शिवलाल सागर ने बताया कि यह कार्यक्रम के माध्यम से सांस्कृतिक साझापन को बढ़ाना है ।गौतम गोप ने बताया स्थानीय स्तर पर शहर की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के लिए मासिक मंच, संवाद के लिए साझामंच बनाने के उद्देश्य से यह महोत्सव आयोजित किया गया है कलाकारों के साथ मेलजोल और प्रस्तुति इसका उद्देश्य है। कल के आयोजन में दर्शकों की उपस्थिति अच्छी रही क्योंकि कलाकार ही दर्शक हैं इस आयोजन की सबसे अच्छी बात यह लगी कि इसमें प्रस्तुतियां ही केंद्र में रही और यह आयोजन अपने समय से शुरू हो गया जिससे महसूस हुआ कि जो दर्शक पहले से आए हम उनका यथोचित सम्मान कर पाए।

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