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भारत सरकार के कला एवं संस्कृति मंत्रालय के सहयोग और सिंहभूम जिला भोजपुरी साहित्य परिषद तथा सिंहभूम जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन जमशेदपुर के सहयोग से शनिवार को बिष्टुपुर तुलसी भवन में दो दिवसीय नौवां भोजपुरी नाट्य महोत्सव शुरू हो गया है

पहले दिन इस महोत्सव की शुरुआत अरविंद विद्रोही कृत भोजपुरी हास्य व्यंग्य नाटक 'यमलोक में करप्शन' से हुआ। इसका निर्देशन डॉक्टर महेंद्र प्रसाद सिंह ने किया

जमशेदपुर- भारत सरकार के कला एवं संस्कृति मंत्रालय के सहयोग और सिंहभूम जिला भोजपुरी साहित्य परिषद तथा सिंहभूम जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन जमशेदपुर के सहयोग से शनिवार को बिष्टुपुर तुलसी भवन में दो दिवसीय नौवां भोजपुरी नाट्य महोत्सव शुरू हो गया है।

पहले दिन इस महोत्सव की शुरुआत अरविंद विद्रोही कृत भोजपुरी हास्य व्यंग्य नाटक ‘यमलोक में करप्शन’ से हुआ। इसका निर्देशन डॉक्टर महेंद्र प्रसाद सिंह ने किया
इस अवसर पर तुलसी भवन के महासचिव प्रसेनजीत तिवारी ने कहा कि दिल्ली की संस्था ‘रंग श्री’ के साथ मिलकर इस आयोजन को पिछले 8 वर्षों से हम लोग करते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस दो दिवसीय नाट्य उत्सव में पांच नाटकों का मंचन होगा। जिसमें चार नाटक दिल्ली की संस्था रंग श्री करेगी एवं एक नाटक जमशेदपुर की संस्था ‘मंच नाट्य चौपाल’ द्वारा की जाएगी। सभी नाटक भोजपुरी में होंगे
उन्होंने कहा कि नाटक के माध्यम से भ्रष्टाचार के बारे में, पढ़ाई लिखाई के बारे में, नशा मुक्ति के बारे में संदेश दिया जा रहा है।
वहीं यमलोक में करप्शन नाटक के लेखक अरविंद विद्रोही ने बताया कि हमारा चार बार हार्ट अटैक हो चुका है। ब्रह्मानंद अस्पताल से निकलते समय डॉक्टर साहब ने कहा कि दो बार मेरे अस्पताल में जब रहे, तो दो आर्टिकल लिखें। इस बार आप क्या लिखेंगे, तो हमने इस बार यमलोक का करप्शन लिखा।
दिल्ली में इस नाटक में टिकट लगाकर आयोजित किया गया था। उन्होंने कहा कि दिल्ली में ‘कब्रिस्तान का उदघाटन ‘ नाटक भी हमारा काफी चर्चित रहा। करप्शन के कारण देश में क्या स्थिति है, इसे कैसे रोके, यह संदेश दिया गया है।
वहीं मंच नाट्य चौपाल संस्था की संस्थापक अनीता सिंह ने कहा कि पहले की अपेक्षा अब नाटक की गति धीमी हो गई है। इसका मुख्य कारण हॉल काफी महंगा हो गया है, लेकिन नाटक करने वालों की कोई कमी नहीं है।

वहीं यमलोक में करप्शन नाटक में यमराज की भूमिका निभाने वाले सौमित्र वर्मा का कहना है कि मैं पिछले 22 सालों से नाटक कर रहा हूं। सबसे बड़ी बात यह है कि लोगों तक नाटक पहुंच नहीं पा रहा है। लोगों को पता ही नहीं है की नाटक क्या है? नाटक को गांव तक पहुंचना है, तभी इसकी सार्थकता है।

रपट- डा राजेश कुमार लाल दास

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