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राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) जमशेदपुर चंद्र शेखर चौधरी (पंजीकरण संख्या: 2017RSMM001) ने अपने पीएच.डी. शोध प्रबंध “Practical Analysis of Thermoelectric Materials for Power Generation: Principles, Classes of Materials and Emerging Applications” का सफलतापूर्वक प्रतिरक्षण 17 मार्च 2026 को प्रातः 11:00 बजे, डी.जे.एल.एच.सी. कक्ष संख्या 212, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) जमशेदपुर में किया

पीएच.डी. डिफेंस संगोष्ठी का आयोजन हाइब्रिड मोड में किया गया, जिससे प्रत्यक्ष एवं ऑनलाइन दोनों माध्यमों से प्रतिभागियों की सहभागिता संभव हुई। मौखिक परीक्षा समिति के सदस्य, संकाय सदस्य एवं शोधार्थी इस सत्र में उपस्थित रहे तथा उन्होंने शैक्षणिक चर्चा में सक्रिय रूप से भाग लिया

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) जमशेदपुर चंद्र शेखर चौधरी (पंजीकरण संख्या: 2017RSMM001) ने अपने पीएच.डी. शोध प्रबंध “Practical Analysis of Thermoelectric Materials for Power Generation: Principles, Classes of Materials and Emerging Applications” का सफलतापूर्वक प्रतिरक्षण 17 मार्च 2026 को प्रातः 11:00 बजे, डी.जे.एल.एच.सी. कक्ष संख्या 212, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) जमशेदपुर में किया। पीएच.डी. डिफेंस संगोष्ठी का आयोजन हाइब्रिड मोड में किया गया, जिससे प्रत्यक्ष एवं ऑनलाइन दोनों माध्यमों से प्रतिभागियों की सहभागिता संभव हुई। मौखिक परीक्षा समिति के सदस्य, संकाय सदस्य एवं शोधार्थी इस सत्र में उपस्थित रहे तथा उन्होंने शैक्षणिक चर्चा में सक्रिय रूप से भाग लिया।

इस शोध प्रबंध के बाह्य परीक्षक डॉ. बंकीम चंद्र त्रिपाठी, सीएसआईआर–इंस्टीट्यूट ऑफ मिनरल्स एंड मटेरियल्स टेक्नोलॉजी (CSIR-IMMT), भुवनेश्वर थे। यह शोध कार्य प्रो. रंजीत प्रसाद (सेवानिवृत्त) के मार्गदर्शन में तथा डॉ. राम कृष्ण के सह-मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। अपने प्रस्तुतीकरण के दौरान, श्री चौधरी ने ऊष्मा-विद्युत (थर्मोइलेक्ट्रिक) सामग्रियों के मूल सिद्धांतों, विभिन्न वर्गों तथा ऊर्जा उत्पादन में उनके उभरते अनुप्रयोगों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उनके शोध में विशेष रूप से अपशिष्ट ऊष्मा को उपयोगी विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करने की संभावनाओं पर जोर दिया गया, जो सतत एवं ऊर्जा-कुशल प्रौद्योगिकियों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

परीक्षा समिति के सदस्यों ने शोध कार्य की गुणवत्ता, इसकी व्यावहारिक प्रासंगिकता तथा उन्नत ऊर्जा सामग्रियों के क्षेत्र में इसके योगदान की सराहना की। एनआईटी जमशेदपुर के माननीय निदेशक प्रो. गौतम सुत्रधार ने डॉ. चंद्र शेखर चौधरी एवं उनके मार्गदर्शकों को इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए बधाई दी तथा इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में अनुसंधान को आगे बढ़ाने के उनके प्रयासों की प्रशंसा की।

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