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तुलसी भवन में शनि के साढ़े साती एवम अमन के रखवार का भव्य मंचन

नौवां भोजपुरी नाट्य महोत्सव संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से रंगश्री, दिल्ली द्वारा आयोजित, 9वां भोजपुरी नाट्य महोत्सव, 2026 के दूसरे और आखिरी दिन लगातार 3 नाटकों का मंचन किया गया जिसमें पहला नाटक श्री ब्रह्मेश्वर नाथ तिवारी कृत हास्य व्यंग्य नाटक 'शनि के साढ़ेसाती' का जोरदार मंचन हुआ। इस नाटक के माध्यम से अंधविश्वास पर जबरदस्त प्रहार करते हुए दिखाया गया कि कैसे धर्म, वास्तु और शुभ-अशुभ बताने की आड़ में पेशेवर तांत्रिक और वास्तु विशेषज्ञ यजमान को मूर्ख बनाकर और डराकर ठगने का काम करते हैं

तुलसी भवन में शनि के साढ़े साती एवम अमन के रखवार का भव्य मंचन

जमशेदपुर- नौवां भोजपुरी नाट्य महोत्सव संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से रंगश्री, दिल्ली द्वारा आयोजित, 9वां भोजपुरी नाट्य महोत्सव, 2026 के दूसरे और आखिरी दिन लगातार 3 नाटकों का मंचन किया गया जिसमें पहला नाटक श्री ब्रह्मेश्वर नाथ तिवारी कृत हास्य व्यंग्य नाटक ‘शनि के साढ़ेसाती’ का जोरदार मंचन हुआ। इस नाटक के माध्यम से अंधविश्वास पर जबरदस्त प्रहार करते हुए दिखाया गया कि कैसे धर्म, वास्तु और शुभ-अशुभ बताने की आड़ में पेशेवर तांत्रिक और वास्तु विशेषज्ञ यजमान को मूर्ख बनाकर और डराकर ठगने का काम करते हैं।

दूसरी प्रस्तुति थी जमशेदपुर की ‘मंच’ संस्था द्वारा श्रीमती अनिता सिंह के निर्देशन में विशु बासु कृत मूल बांग्ला हास्य व्यंग्य नाटक “शांति रक्षक” के भोजपुरी अनुवाद ,अमन के रखवार की । इस नाटक का भोजपुरी में अनुवाद किया था स्व विपुल चौधरी और डॉ महेंद्र प्रसाद सिंह ने।

पुलिस प्रशासन पर करारा प्रहार करते हुए इस नाटक में दिखाया गया है कि कैसे एक कर्त्तव्यनिष्ट युवा, जो रास्ते में मिले एक पर्स को थाने में जमा करने जाता है, को बुरी तरह प्रताड़ित किया जाता है।

हर सँवाद पर हास्य पैदा करने वाले इस नाटक के मुख्य किरदार दरोगा ज़ालिम सिंह की भूमिका में विनोद कुमार प्रभावी रहे। गणेश की भूमिका में रौशन कुमार , डाकमुंशी गोबरधन के रूप में अंशु पाठक, शिवपुजन सिपाही के रूप में संजीत प्रजापति और रामभजन की भूमिका में राहुल कुमार आर्या का अभिनय भी सराहनीय रहा। पार्श्व ध्वनि व प्रकाश व्यवस्था कृष्णा सिन्हा ने किया।

महोत्सव का समापन रंगश्री की प्रस्तुति अरविंद विद्रोही कृत भोजपुरी हास्य व्यंग्य नाटक “कब्रिस्तान के उदघाटन ”, का जोरदार मंचन से हुआ। इस नाटक को निर्देशित किया रंगश्री के संस्थापक डॉ महेंद्र प्रसाद सिंह ने। यह नाटक उन राजनेताओं पर एक व्यंग्य है जो सस्ती लोकप्रियता पाने एवं सत्ता में बने रहने के लिए, अपने मतदाताओं को झूठे नारे एवं तरह तरह के वादों से भरमाते हैं और अपना उल्लू सीघा करते हैं। नाटक में मुख्यमंत्री का एक संवाद था, “अपना लोकतंत्र झूठा और लुभावना नारा पर चलते आ रहा है। लोगों को आश्वासन, नारा और जाति-धर्म पर टाँग कर रखना राजनीति का धर्म है।” इस नाटक में भ्रष्ट राजनीति के विभिन्न आयाम को हँसते हँसाते बड़े बेहतरीन तरीके से दिखाया गया जिसको देख दर्शक ठहाके लगाते अपना पेट पकड़े बैठे रहे।

नाटक में मुख्यमंत्री की भूमिका में अखिलेश कुमार पांडे, पी.ए. की भूमिका में स्वयं डॉ महेंद्र प्रसाद सिंह, हिजड़े, मुस्लिम लीडर व डीसी की भूमिका में क्रमश: श्री सौमित्र वर्मा, विजय व रुस्तम कुमार, बेरोजगार संघ के अध्यक्ष की भूमिका में कृति कुमारी, महामंत्री की भूमिका में कीर्ति यादव, गार्ड/ सिपाही/अधिकारी की भूमिका में विनय कांत चपरासी की भूमिका में प्रभात रंजन, मुर्दा की भूमिका में रुस्तम कुमार, ऑफिसर व बेरोजगार संघ के संयुक्त सचिव की भूमिका में श्री अशोक प्रभावी रहे।प्रकाश व्यवस्था श्री संदीप कुमार एवं म्यूजिक कीर्ति यादव का था।

दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
महोत्सव के समापन पर रंगश्री के अध्यक्ष व निदेशक डॉ महेन्द्र प्रसाद सिंह ने संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार सहित सिंहभूम जिला भोजपुरी साहित्य परिषद्, तुलसी भवन और जमशेदपुर के सभी सुधी दर्शकों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता जी एवम मानगो मेयर सुधा गुप्ता की उपस्थिति ने कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।

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