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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जमशेदपुर में ‘श्री जगन्नाथ आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक चैरिटेबल सेंटर’ का किया शिलान्यास

हम सब भिन्न नहीं, अभिन्न हैं; आध्यात्मिक चेतना से ही संभव है सर्वांगीण विकास" --राष्ट्रपति

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जमशेदपुर में ‘श्री जगन्नाथ आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक चैरिटेबल सेंटर’ का किया शिलान्यास

हम सब भिन्न नहीं, अभिन्न हैं; आध्यात्मिक चेतना से ही संभव है सर्वांगीण विकास” –राष्ट्रपति

जमशेदपुर –  भारत की राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु ने आज लौहनगरी जमशेदपुर के कदमा मेरीन ड्राइव स्थित ‘श्री जगन्नाथ आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक चैरिटेबल सेंटर’ के भव्य भूमि पूजन और शिलान्यास समारोह में शिरकत की दोपहर 12:20 बजे कार्यक्रम स्थल पर पहुँचने के बाद महामहिम ने विधिवत पूजन कर मंदिर निर्माण की आधारशिला रखी

राष्ट्रपति का मुख्य संबोधन: एकता और आध्यात्मिक जागृति

अपने लगभग 20 मिनट के ओजस्वी भाषण में राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु ने भगवान जगन्नाथ की महिमा और सामाजिक समरसता पर गहरा प्रकाश डाला:

प्रतीक्षा और नियति- महामहिम ने कहा, “जब मैं झारखंड की सेवा में थी, तब से इस मंदिर के लिए भूमि पूजन का इंतज़ार था। आज प्रभु की मर्जी से वह सही समय आ गया है। जगन्नाथ जी के सामने सब समान हैं; कोई छोटा नहीं होता, सब एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण करते हैं।

अभिन्नता का संदेश:

उन्होंने जोर देकर कहा, “हम भिन्न नहीं, अभिन्न हैं। जगन्नाथ ‘जग के नाथ’ हैं और वे चारों तरफ विराजमान हैं।” उन्होंने कोल्हान क्षेत्र को सामाजिक सौहार्द का उदाहरण बताया।

प्रकृति और आध्यात्मिकता: राष्ट्रपति ने कहा कि जनजातीय समुदाय द्वारा पेड़-पौधों की पूजा हमें प्रकृति के सम्मान की शिक्षा देती है। उन्होंने मानसिक विकास के लिए आध्यात्मिक चेतना को अनिवार्य बताया और कहा कि “आत्मा का भोजन गीता में है।

नारी उत्थान: महामहिम ने ट्रस्ट से उम्मीद जताई कि इस केंद्र के माध्यम से नारी उत्थान के प्रभावी प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने बालिका छात्रावास को प्राथमिकता देने के निर्णय की विशेष सराहना की।

विशिष्ट अतिथियों के उदबोधन
संतोष कुमार गंगवार, राज्यपाल (झारखंड):

राज्यपाल ने कहा कि जमशेदपुर लौहनगरी के साथ-साथ एक ‘आदर्शनगरी’ भी है। उन्होंने साझा किया कि उन्हें ओडिशा में पांच साल रहकर भगवान जगन्नाथ को समझने का सौभाग्य मिला है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश विकास और विरासत दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है।

हेमंत सोरेन, मुख्यमंत्री (झारखंड):
मुख्यमंत्री ने कहा, “आज एक महत्वपूर्ण सामाजिक और आध्यात्मिक केंद्र की नींव रखी गई है। यह हम सभी का सौभाग्य है कि इस पवित्र कार्य का शुभारंभ महामहिम राष्ट्रपति जी के कर-कमलों से हुआ है

धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय शिक्षा मंत्री:
केंद्रीय मंत्री ने इसे एक नया अध्याय बताते हुए कहा, “महाप्रभु का नया मंदिर जमशेदपुर में बनना गौरव की बात है। भागदौड़ भरी जिंदगी में मन की एकाग्रता के लिए प्रभु का आशीर्वाद और आध्यात्मिक केंद्र अत्यंत आवश्यक हैं

मैनेजिंग ट्रस्टी  एस. के. बेहेरा का वक्तव्य
ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी  एस. के. बेहेरा ने स्वागत भाषण में केंद्र की स्थापना के मूल विचार को साझा किया:
प्रेरणा: उन्होंने बताया कि इस ट्रस्ट का विचार विश्व प्रसिद्ध निशानेबाज मनु भाकर के उस बयान से आया, जिसमें उन्होंने अपनी सफलता का आधार ‘श्रीमद भगवद्गीता’ को बताया था।
लोकतंत्र और युवा: श्री बेहेरा ने कहा कि हमारे लोकतंत्र की खूबसूरती है कि एक साधारण गाँव में जन्मी महिला आज सर्वोच्च पद पर है। उन्होंने संकल्प जताया कि यह केंद्र युवाओं को चरित्रवान बनाने और समाज को आध्यात्मिक मार्ग दिखाने का कार्य करेगा।
कार्यक्रम की रूपरेखा
समारोह की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई।  एस. के. बेहेरा ने  राष्ट्रपति को शाल ओढ़ाकर और श्री जगन्नाथ महाप्रभु का स्मृति चिन्ह भेंट कर उनका अभिनंदन किया। कार्यक्रम में सांसद  विद्युत वरण महतो, विधायक  सरयू राय एवं  पूर्णिमा साहू, पूर्व मुख्यमंत्री  अर्जुन मुंडा, टाटा स्टील के एमडी एवं सीईओ  टी. वी. नरेंद्रन,  मनोरंजन दास,  श्रीधर प्रधान सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

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