मिथिलाक्षर प्रचारिणी सभा एवं मैथिली साहित्यकार परिषद् का स्थापना दिवस अंतरराष्ट्रीय मैथिली परिषद् की 385वीं बैठक के रूप में सम्पन्न
अंतरराष्ट्रीय मैथिली परिषद की 385वीं गूगल मीट बैठक के अवसर पर मिथिलाक्षर प्रचारिणी सभा (स्थापना: 31.03.2013, जमशेदपुर) एवं मैथिली साहित्यकार परिषद् (स्थापना: 31.03.2017) का स्थापना दिवस संयुक्त रूप से मनाया गया

मिथिलाक्षर प्रचारिणी सभा एवं मैथिली साहित्यकार परिषद् का स्थापना दिवस अंतरराष्ट्रीय मैथिली परिषद् की 385वीं बैठक के रूप में सम्पन्न
जमशेदपुर- आज अंतरराष्ट्रीय मैथिली परिषद की 385वीं गूगल मीट बैठक के अवसर पर मिथिलाक्षर प्रचारिणी सभा (स्थापना: 31.03.2013, जमशेदपुर) एवं मैथिली साहित्यकार परिषद् (स्थापना: 31.03.2017) का स्थापना दिवस संयुक्त रूप से मनाया गया
बैठक की अध्यक्षता डॉ. अशोक अविचल, अध्यक्ष, अंतरराष्ट्रीय मैथिली परिषद् ने की।
इस अवसर पर गौरी शरण झा, अधिवक्ता, झारखंड उच्च न्यायालय एवं अध्यक्ष, मिथिलाक्षर प्रचारिणी सभा ने कहा कि मिथिलाक्षर लिपि हमारी राष्ट्रीय धरोहर है और इसके संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार की आवश्यकता है।
डॉ. धनाकर ठाकुर ने अपने वक्तव्य में कहा कि 1772 के भारत में (जो बर्मा से तिब्बत, सीलोन से अफगानिस्तान तक विस्तृत था) मिथिलाक्षर उन सात प्रमुख लिपियों में से एक थी, जो इसकी ऐतिहासिक महत्ता को दर्शाता है
पूनम झा (आसनसोल), मिथिला कला मंच से, ने कहा कि इस लिपि के प्रयोग और प्रोत्साहन के लिए समाज को आगे आना चाहिए।
रवीन्द्र नारायण मिश्रा, अध्यक्ष, मैथिली साहित्यकार परिषद् (ग्रेटर नोएडा), जिन्होंने मैथिली में 29 उपन्यास लिखे हैं ने कहा कि परिषद् का विस्तार जिला स्तर तक किया जाएगा जिससे साहित्यिक गतिविधियों को और बल मिलेगा
अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में डॉ. अशोक अविचल ने कहा कि मिथिलाक्षर प्रचारिणी सभा और मैथिली साहित्यकार परिषद्, मैथिली भाषा के प्रसार और सुदृढ़ीकरण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण अंग हैं। उन्होंने यह भी बताया कि अंतरराष्ट्रीय मैथिली परिषद् के लगभग 36 सहायक संगठन विभिन्न क्षेत्रों में सराहनीय कार्य कर रहे हैं।
कार्यक्रम का संचालन अक्षय झा (कटिहार) ने किया
अंत में एन. के. झा, संस्थापक, पटना पुस्तक मेला ने धन्यवाद ज्ञापन किया
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