दुलाल भुइंया नहीं इन्हें दलबदलु भुइंया नाम से अलंकृत किया जाए तो ज्यादा बेहतर होगा – अजय रजक, झामुमो दलित नेता
झामुमो,बसपा,झाविमो,कांग्रेस को छोड़कर और पुन:दूसरी बार भाजपा में शामिल हुए दुलाल भुंईया को दलबदलु भुइंया कहना बेहतर होगा । ये वक्तव्य है झामुमो दलित मोर्चा के वरिष्ठ नेता सह झारखंड आंदोलनकारी अजय रजक का। श्री रजक ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि दलित शोषित ,समाज आज झारखंड मुक्ति मोर्चा की नेतृत्व वाली झारखंड सरकार में काफी खुश है

दुलाल भुइंया नहीं इन्हें दलबदलु भुइंया नाम से अलंकृत किया जाए तो ज्यादा बेहतर होगा – अजय रजक, झामुमो दलित नेता
जमशेदपुर – झामुमो,बसपा,झाविमो,कांग्रेस को छोड़कर और पुन:दूसरी बार भाजपा में शामिल हुए दुलाल भुंईया को दलबदलु भुइंया कहना बेहतर होगा । ये वक्तव्य है झामुमो दलित मोर्चा के वरिष्ठ नेता सह झारखंड आंदोलनकारी अजय रजक का। श्री रजक ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि दलित शोषित ,समाज आज झारखंड मुक्ति मोर्चा की नेतृत्व वाली झारखंड सरकार में काफी खुश है । उन्हे हेमन्त सरकार द्वारा दी जा रही सारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ भली प्रकार मिल रहा है। यही कारण है कि विगत विधानसभा चुनावों में दलितों ने अपना लगभग शत प्रतिशत वोट हेमन्त सोरेन जी के पक्ष में देकर उन्हें पुन: मुख्यमंत्री बनाने का कार्य किया है। दुलाल भूईया को ये बताना चाहिए कि उन्हें जुगसलाई विधानसभा से तीन बार विधायक और दो बार मंत्री किसने बनाया था ,फिर उन्हे झारखड़ मुक्ति मोर्चा में दलितों को सम्मान नही मिलने की बात किस मुंह से कही , यह समझ से परे है। उन्हे और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू को यह ज्ञात होना चाहिए कि संविधान निर्माता बाबा साहेब डा भीमराव अम्बेडकर जी को सर्वप्रथम सम्मान देने का कार्य 1990 में झारखंड मुक्ति मोर्चा समर्थित राष्ट्रीय मोर्चा की केंद्र सरकार ने ही भारत सरकार द्वारा दिए जाने वाला सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न देकर किया था। भारतीय जनता पार्टी उस वक्त मंडल कमीशन की विरोधी थी और कमंडल को ढोने में व्यस्त थी। उनके प्रदेश अध्यक्ष किस मुंह से दलितों और पिछड़ों के हितैषी होने की बात कह रहे हैं । आज दुलाल भुइया अपने को दलित पिछड़ा वर्ग के रहनुमा और बड़े नेता होने का दावा करते हैं उन्हे ये बताना चाहिए कि विगत विधानसभा चुनाव में उनके सुपुत्र को कितना वोट मिला था,और झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रत्याशी को कितना। इससे ही समझ में आ जाएगा कि दुलाल भुइया का अपना राजनैतिक और सामाजिक कद आज क्या रह गया है। नगर निकाय चुनावों में उनका समर्थन किसी भी दल के समर्थित प्रत्याशी को कोई भी लाभ नहीं दे पाएगा और साथ ही हेमन्त सोरेन सरकार द्वारा जनहित में चलाए जा रही जनउपयोगी योजनाएं, झारखंड मुक्ति मोर्चा समर्थित प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित करने में मील का पत्थर साबित होगा।




