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सवर्ण महासंघ फाउंडेशन भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष डी डी त्रिपाठी ने यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन एक्ट 2026 के संदर्भ में मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत एवं उनके पीठ द्वारा दिए गए निर्णय का स्वागत किया

साथ ही कहा की राष्ट्रद्रोही ताकतों ने जो कुचक्र सनातन धर्म को विखंडित करने के लिए रचा था उस पर सर्वोच्च न्यायालय ने पानी फेर दिया यह सवर्ण समाज का ही नहीं अपितु सनातन धर्म एवं प्रखर राष्ट्रवादियों की जीत है ! यूजीसी जैसे काले कानून के माध्यम से राष्ट्रवाद की आड में सत्ता लोलुप ताकते भारतीय संस्कृति, सनातन धर्म एवं संस्कारों को विखंडित करने के लिए यूजीसी जैसा कानून लाने की हिमाकत की थी । जिसे सवर्ण समाज एवं राष्ट्रवादी सनातन शक्तियों ने एक जुटता से नाकाम कर दिया

जमशेदपुर – सवर्ण महासंघ फाउंडेशन भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष डी डी त्रिपाठी ने यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन एक्ट 2026 के संदर्भ में मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत एवं उनके पीठ द्वारा दिए गए निर्णय का स्वागत किया

और साथ ही कहा की राष्ट्रद्रोही ताकतों ने जो कुचक्र सनातन धर्म को विखंडित करने के लिए रचा था उस पर सर्वोच्च न्यायालय ने पानी फेर दिया यह सवर्ण समाज का ही नहीं अपितु सनातन धर्म एवं प्रखर राष्ट्रवादियों की जीत है ! यूजीसी जैसे काले कानून के माध्यम से राष्ट्रवाद की आड में सत्ता लोलुप ताकते भारतीय संस्कृति, सनातन धर्म एवं संस्कारों को विखंडित करने के लिए यूजीसी जैसा कानून लाने की हिमाकत की थी । जिसे सवर्ण समाज एवं राष्ट्रवादी सनातन शक्तियों ने एक जुटता से नाकाम कर दिया ।

आज सुप्रीमकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यह कानून नैसर्गिक न्याय एवं सवर्णों के बच्चों के खिलाफ कुंठित मानसिकता का परिचायक है और इस तरह के कानून से एक वर्ग विशेष के खिलाफ साजिश रचने एवं उन्हें प्रताड़ित करने की अपार संभावनाएं हैं । अतः सुप्रीमकोर्ट अपने अंतरिम आदेश में इस एक्ट को स्टे रखने का निर्णय लिया है। एवं 2012 में जो कानून यूपीए सरकार लाई थी उसे ही लागू रखा जाएगा
येही नहीं सुप्रीमकोर्ट ने आज माना कि कुंठा,घृणा, ईर्ष्या,द्वेष के आधार पर सवर्णों और सनातन धर्म के खिलाफ यूजीसी कानून के रूप में किए जा रहे षड्यंत्र बहुत खतरनाक हैं।
श्री त्रिपाठी ने कहा की वर्तमान सत्ता को यह भ्रम हो गया हैं कि जिसकी जितनी संख्या भारी उसकी उतनी हिस्सेदारी जैसे कुत्सित सोच के आधार पर स्वतंत्रता के 79 वर्षों बाद देश को सामाजिक एवं धार्मिक रूप में विभाजित कर सत्ता को अक्षुण्ण रखा जा सकता हैं। इसलिए सवर्णों के खिलाफ सभी अन्य वर्गों को घृणा का दुधारी तलवार पकड़ाकर खड़ा कर दिया था। आज यदि सुप्रीमकोर्ट ने उचित निर्णय लेते हुए इस एक्ट पर रोक नहीं लगाई होती तो किसी सरकार द्वारा पोषित भविष्य में यह गृह युद्ध की स्थिति पैदा करने वाला घृणित कानून साबित होता।
श्री त्रिपाठी ने कहा कि न्याय पर सभी का सामान अधिकार हैं न्याय ऐसा होना चाहिए जो किसी की कुंठा से नहीं अपितु न्याय की अवधारणा से जुड़ी हो।यदि किसी व्यक्ति के प्रति अन्याय या शोषण होता हैं तो उसको संरक्षण अवश्य मिलना चाहिए। लेकिन एक वर्ग जन्मजात अपराधी हैं ऐसा बताने वाला कानून तो किसी कुंठित सोच वाली व्यवस्था की धूर्तता हैं।आज इसी धूर्त सत्तालोभी राष्ट्रद्रोही सोच पर लगाम लगाने का कार्य सर्वोच्च न्यायालय ने किया हैं। ये उनके लिए पीड़ा का विषय हो सकता हैं जिनके लिए सत्ता और शक्ति ही सबकुछ हैं पर उनके लिए खुशी का विषय हैं जो ये विश्वास रखते हैं कि सत्य की विजय होगी और आज सत्य विजयी हुआ।

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