शहर में अग्नि सुरक्षा, भवन निर्माण, अतिक्रमण एवं प्रशासनिक लापरवाही से उत्पन्न गंभीर खतरे के संबंध में व्यापक जांच एवं कठोर कार्रवाई हेतु मांग
विगत दिनों विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित समाचारों से यह अत्यंत चिंताजनक तथ्य सामने आया है कि जमशेदपुर एवं आसपास के क्षेत्रों में संचालित अधिकांश अस्पताल, नर्सिंग होम, होटल, लॉज, रेस्टोरेंट एवं बहुमंजिला व्यावसायिक भवन अग्नि सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी करते हुए संचालित हो रहे हैं

शहर में अग्नि सुरक्षा, भवन निर्माण, अतिक्रमण एवं प्रशासनिक लापरवाही से उत्पन्न गंभीर खतरे के संबंध में व्यापक जांच एवं कठोर कार्रवाई हेतु मांग
विगत दिनों विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित समाचारों से यह अत्यंत चिंताजनक तथ्य सामने आया है कि जमशेदपुर एवं आसपास के क्षेत्रों में संचालित अधिकांश अस्पताल, नर्सिंग होम, होटल, लॉज, रेस्टोरेंट एवं बहुमंजिला व्यावसायिक भवन अग्नि सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी करते हुए संचालित हो रहे हैं
समाचार पत्रों के अनुसार शहर में संचालित 253 अस्पतालों में मात्र 22 के पास ही वैध फायर एनओसी उपलब्ध है। इसी प्रकार संकरी गलियों, अवैध निर्माणों एवं बिना पर्याप्त पहुंच मार्ग वाले क्षेत्रों में अनेक होटल, रेस्टोरेंट, लॉज एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित हो रहे हैं, जहां अग्निकांड की स्थिति में दमकल वाहनों का समय पर पहुंच पाना अत्यंत कठिन हो सकता है।
वर्तमान में दिल्ली सहित अन्य शहरों में घटित भीषण अग्निकांड जैसी घटनाएं जिसमें काफी बेशकीमती जाने गई, यह स्पष्ट करती हैं कि प्रशासनिक लापरवाही, नियमों की अनदेखी एवं भ्रष्ट व्यवस्था के कारण कुछ ही क्षणों में अनेक निर्दोष लोगों की जान चली जाती है तथा पूरा परिवार बर्बाद हो जाता है। ऐसी स्थिति किसी भी समय हमारे शहर में भी उत्पन्न हो सकती है।
यह अत्यंत गंभीर विषय है कि नगर निकायों द्वारा बिना समुचित स्थल जांच एवं सुरक्षा मूल्यांकन के भवन निर्माण नक्शा स्वीकृत किया जा रहा है।
कई भवनों को कंप्लीशन सर्टिफिकेट एवं ऑक्युपेशन सर्टिफिकेट के बिना ही पानी एवं बिजली कनेक्शन उपलब्ध करा दिए जाते हैं।
फायर सेफ्टी नॉर्म्स की अनदेखी कर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं।
बहुमंजिला भवनों एवं अस्पतालों में नियमित फायर ऑडिट एवं सुरक्षा निरीक्षण की प्रभावी व्यवस्था नहीं है।
शहर की सड़कों एवं गलियों पर बढ़ते अतिक्रमण के कारण आपातकालीन सेवाओं की पहुंच बाधित हो रही है। जमशेदपुर में तो JNAC के द्वारा ही रोड का अतिक्रमण कर पार्किंग शुल्क वसूल किया जा रहा है जो गंभीर चिंता का विषय है!
प्रशासनिक विभागों के बीच समन्वय एवं जवाबदेही का गंभीर अभाव दिखाई देता है।
नियमों का उल्लंघन करने वाले भवन मालिकों एवं संबंधित पदाधिकारियों पर समयबद्ध कठोर कार्रवाई नहीं होने से अव्यवस्था बढ़ती जा रही है।
अतः जनहित एवं मानव जीवन की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आपसे विनम्र आग्रह है कि जिले के सभी अस्पतालों, नर्सिंग होम, होटल, लॉज, रेस्टोरेंट, मॉल एवं बहुमंजिला भवनों की विशेष जांच अभियान चलाकर फायर सेफ्टी, भवन मानक एवं वैध दस्तावेजों की जांच कराई जाए।
जिन प्रतिष्ठानों के पास वैध फायर एनओसी, कंप्लीशन सर्टिफिकेट अथवा ऑक्युपेशन सर्टिफिकेट नहीं है, उनके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
नगर निकाय, बिजली विभाग, जलापूर्ति विभाग एवं अग्निशमन विभाग की भूमिका की संयुक्त जांच कर यह निर्धारित किया जाए कि किन अधिकारियों की लापरवाही अथवा मिलीभगत से नियमों की अनदेखी हुई।
सड़क एवं गलियों पर हुए अतिक्रमण को हटाकर आपातकालीन सेवाओं हेतु निर्बाध मार्ग सुनिश्चित किया जाए।
भविष्य में किसी भी भवन को पानी, बिजली अथवा व्यवसाय संचालन की अनुमति देने से पूर्व सभी वैधानिक प्रमाणपत्रों को अनिवार्य रूप से सत्यापित किया जाए।
नियमित फायर ऑडिट एवं सुरक्षा निरीक्षण की स्थायी एवं पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाए।
जिन अधिकारियों एवं संबंधित व्यक्तियों की लापरवाही अथवा भ्रष्टाचार के कारण जनजीवन खतरे में पड़ा है, उनके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
मानव जीवन से बढ़कर कुछ भी नहीं है। यदि समय रहते कठोर एवं प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में कोई बड़ी त्रासदी पूरे प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर सकती है। अतः इस ज्वलनशील एवं अति संवेदनशील विषय पर अविलंब प्रभावी कार्रवाई करने की कृपा करें।
श्रवण कुमार देबुका जुगसलाई जमशेदपुर निवासी ने उपायुक्त पूर्वी सिंहभूम, जमशेदपुर को पत्र लिखकर अवगत कराया है
इस पत्र की प्रतलिपि मुख्य सचिव झारखंड सरकार रांची
मुख्यमंत्री झारखंड सरकार, रांची को भी भेजी गई है




