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झारखंड उच्च न्यायालय से विमल कुमार अग्रवाल, तथा प्रतिक अग्रवाल को बड़ी राहत, शंकर लाल गुप्ता की प्राथमिकी खारिज की

आशियाना गार्डन निवासी विमल कुमार अग्रवाल एवं उसके बेटे प्रतीक अग्रवाल को झारखंड हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। इनके खिलाफ शंकर लाल गुप्ता द्वारा दर्ज प्राथमिकी सोनारी थाना कांड संख्या 45/2025 एवं कोर्ट की सुनवाई जीआर संख्या 966/2025 को न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी की एकल पीठ ने खारिज कर दिया है

झारखंड उच्च न्यायालय से विमल कुमार अग्रवाल, तथा प्रतिक अग्रवाल को बड़ी राहत, शंकर लाल गुप्ता की प्राथमिकी खारिज की

जमशेदपुर- आशियाना गार्डन निवासी विमल कुमार अग्रवाल एवं उसके बेटे प्रतीक अग्रवाल को झारखंड हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। इनके खिलाफ शंकर लाल गुप्ता द्वारा दर्ज प्राथमिकी सोनारी थाना कांड संख्या 45/2025 एवं कोर्ट की सुनवाई जीआर संख्या 966/2025 को न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी की एकल पीठ ने खारिज कर दिया है।

मामला यह है कि बिस्टुपुर शांति हरि आवासन निवासी शंकर लाल गुप्ता ने मेसर्स श्री नरसिंग कंस्ट्रक्शन के विमल कुमार अग्रवाल एवं उसके बेटे प्रतीक अग्रवाल पर एक करोड़ 91 लाख रुपए का गबन करने का आरोप लगाते हुए अदालत में शिकायत वाद दाखिल किया और फिर अदालत के आदेश पर सोनारी थाना ने मामला दर्ज किया था।

रेलवे के ठेका में लगाना था पैसा

शंकर लाल गुप्ता के अनुसार विमल अग्रवाल उनके कार्यालय में आए और बताया कि वह तथा उनका बेटा प्रतिक अग्रवाल रेलवे के 1990 से ठेकेदार है। रेलवे के बड़े बड़े काम करते हैं। रेलवे का काम में नुकसान नहीं हुआ है, बहुत ही अच्छा प्रॉफिटेबल बिजनेस है।अभी उनके पास राउरकेला में 15 करोड़ का रेलवे का ठेका है, जिसमें 20% से 30% तक मुनाफा होगा। यदि 1,31,00,000/- उनको भुगतान करते हैं तो मुनाफे का 50% भुगतान करेगा और ये कार्य उन्हें डेढ़ से दो साल के अन्दर निष्पादित करना है

इस संदर्भ में 14 जनवरी 2017 को दोनों पक्षों के बीच एक एकरारनामा भी निष्पादित हुआ। विमल कुमार अग्रवाल तथा प्रतिक अग्रवाल को 1,62,00,000 रुपए एकजनवरी 2017 से लेकर आठ दिसंबर 2017 तक भुगतान किया। फिर बताया कि ढाई करोड़ का अतिरिक्त कार्य और मिला है जिसमें सौ प्रतिशत तक मुनाफा होगा। लेकिन इसके लिए उन्हें और पैसों की जरूरत है। कुल 19100000 रूपए ले लिए।

न्यायालय ने माना यह आपराधिक मामला नहीं

वही निचली अदालत में पिता विमल अग्रवाल एवं बेटे प्रतीक अग्रवाल ने यह दलील लेते हुए जमानत प्राप्त की कि मामला 8 साल पुराना है और उन्होंने वादी शंकर लाल गुप्ता को एक करोड़ 73 लाख रुपए वापस कर दिया है।

विमल कुमार अग्रवाल एवं प्रतीक अग्रवाल की ओर से अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू बबिता जैन एवं उच्च न्यायालय के अधिवक्ता निलेश कुमार ने हाई कोर्ट में क्रिमिनल मिस पिटीशन 1490/2026 दाखिल किया और जिस पर हाईकोर्ट ने माना कि यह आपराधिक मामला नहीं है।

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