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सोना देवी विश्वविद्यालय घाटशिला में आज पौधा रोपण किया गया

यूजीसी के निर्देश के आलोक में सोना देवी विश्वविद्यालय द्वारा 15 से 23 मई तक प्रतिदिन अलग अलग थीम पर पर्यावरण संरक्षण से संबंधित जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है हरेक विद्यार्थी एक एक फलदार पौधा लगायें और उसकी देखभाल स्वयं करें - डाॅ ब्रज मोहन पाट पिंगुआ कुलपति सोना देवी विश्वविद्यालय

घाटशिला- सोना देवी विश्वविद्यालय घाटशिला में आज पौधा रोपण किया गया

यूजीसी के निर्देश के आलोक में सोना देवी विश्वविद्यालय द्वारा 15 से 23 मई तक प्रतिदिन अलग अलग थीम पर पर्यावरण संरक्षण से संबंधित जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है
हरेक विद्यार्थी एक एक फलदार पौधा लगायें और उसकी देखभाल स्वयं करें – डाॅ ब्रज मोहन पाट पिंगुआ, कुलपति, सोना देवी विश्वविद्यालय

सोना देवी विश्वविद्यालय घाटशिला में आज विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम के तहत फलदार पौधों का रोपण किया गया. इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ ब्रज मोहन पाट पिंगुआ ने विद्यार्थियों को जागरूक करते हुए कहा कि हम सभी को एक एक फलदार पौधा अवश्य लगाना है तथा इसकी देखभाल स्वयं करनी है. हम सभी को व्यक्तिगत रूप से प्लास्टिक के उपयोग को पूरी तरह से बंद करना होगा तथा उर्जा संरक्षण की दिशा में कार्य करना है.
इस जागरूकता अभियान के तहत सोना देवी विश्वविद्यालय में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, यूजीसी के निर्देश के आलोक में 15 से 23 मई तक प्रतिदिन अलग अलग थीम पर पर्यावरण संरक्षण से संबंधित जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है. जैसा कि हम सभी जानते हैं कि 15 मई 2026 से 5 जून 2026 तक विश्व पर्यावरण दिवस के लिए एक राष्ट्रव्यापी पूर्व-अभियान आयोजित किया जा रहा है. विश्व पर्यावरण दिवस 2026 का विषय ष्जलवायु परिवर्तनष् है, जिसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ जीवन शैली को बढ़ावा देना और विभिन्न संस्थानों तथा समुदायों में ष्ग्रह-हितैषी कार्यों को प्रोत्साहित करना है।
इसी के मद्देनजर सोना देवी विश्वविद्यालय घाटशिला द्वारा 15 मई से 23 मई तक प्रतिदिन पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है. सोना देवी विश्वविद्यालय परिसर में कुलाधिपति प्रभाकर सिंह के नेतृत्व में विभिन्न फैकल्टी और छात्र छात्राओं द्वारा दर्जनों फलदार पौधे लगाए गये हैं जिनमें आम, लीची, अमरूद, केला, जामुन और शहतूत भी शामिल है. विश्वविद्यालय परिसर में वर्षा जल संरक्षण कि लिए भी विशेष उपाय किये गये हैं. अब ऊर्जा संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन और ई-अपशिष्ट में कमी लाने पर विशेष ध्यान दिया जायेगा.

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