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सच्चिदानंद परब्रह्म (डॉ.) आठवले जी को “धर्म अलंकार पुरस्कार” और “माँ पटन देवी सम्मान” से सम्मानित

आधुनिक विज्ञान की कसौटी पर सनातन धर्म; राम मंदिर और संगम स्नान से बढ़ती है सकारात्मक ऊर्जा - सद्गुरु नीलेश सिंगबाळ

सच्चिदानंद परब्रह्म (डॉ.) आठवले जी को “धर्म अलंकार पुरस्कार” और “माँ पटन देवी सम्मान” से सम्मानित

आधुनिक विज्ञान की कसौटी पर सनातन धर्म; राम मंदिर और संगम स्नान से बढ़ती है सकारात्मक ऊर्जा – सद्गुरु नीलेश सिंगबाल

पटना (बिहार)- महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय (MAV) के शोध ने आधुनिक वैज्ञानिक मापदंडों पर सिद्ध किया है कि आध्यात्मिक साधना और वास्तु शास्त्र का सीधा प्रभाव मानव ऊर्जा व पर्यावरण पर पड़ता है। सद्गुरु नीलेश सिंगबाळ ने वैज्ञानिक शोध के माध्यम से बताया कि अयोध्या राम मंदिर निर्माण से वहाँ की भूमि की सकारात्मक ऊर्जा (Aura) में 16 गुना वृद्धि हुई है, वहीं त्रिवेणी संगम में पवित्र स्नान से श्रद्धालुओं के आभामंडल में 133% तक का वृद्धि हुई है । आधुनिक स्कैनर द्वारा प्रमाणित इन निष्कर्षों को हाल ही में COP29 (बाकू) और दावोस (WEF 2026) जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया है। वे पटना, बिहार में आयोजित ‘अंतर्राष्ट्रीय ज्योतिष, वास्तु और तंत्र सम्मेलन’ में ‘‘भारत की भूमि की आध्यात्मिक पवित्रता उसकी आध्यात्मिक और सांसारिक प्रगति का प्रमाण कैसे थी’’ विषय पर प्रस्तुति दे रहे थे

इस सम्मेलन का आयोजन विश्व ज्योतिष महासंघ के अध्यक्ष और विश्व ज्योतिष-संघ के चेयरमैन आचार्य (डॉ.) अशोक मिश्रा द्वारा दक्षिण एशियाई ज्योतिष-संघ और ज्योतिष, वास्तु एवं वैदिक विज्ञान केंद्र के सहयोग से किया गया था। इसमें विभिन्न विषयों और देशों के कई प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें मुख्य अतिथि श्री अशोक चौधरी (ग्रामीण कार्य विभाग मंत्री, बिहार), राजगुरु श्री माधव भट्टाराय (नेपाल), और श्री अनुप कुमार (कला एवं संस्कृति राजदूत, पश्चिम बंगाल) विशेष रूप से उल्लेखनीय रहे।

सद्गुरु नीलेश सिंगबाळ ने इस बात पर जोर दिया कि* भारत के उदय के संकेत आज स्पष्ट हैं, और उन्होंने देश की आध्यात्मिक शुद्धता में मापने योग्य वृद्धि का उल्लेख किया। व्यक्तियों की आध्यात्मिक साधना का उनके वास्तु और पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। एक प्रयोग में, जिस घर के निवासी साधना (आध्यात्मिक अभ्यास) करते थे, वहां के नल के पानी के नमूने में उच्च सकारात्मक आभामंडल देखा गया। इसके विपरीत, साधना न करने वाले पड़ोसी के घर का पानी, एक ही जल स्रोत होने के बावजूद, नकारात्मक स्पंदन (negative vibrations) दिखा रहा था। MAV की आध्यात्मिक शोध टीम द्वारा आधुनिक आभामंडल और ऊर्जा स्कैनर का उपयोग करके किए गए ऐसे कई और अध्ययन साझा किए।

सद्गुरु नीलेश सिंगबाळ ने उद्धृत किया कि भारत एक राष्ट्र के रूप में उदय होगा और ‘विश्वगुरु’ के रूप में अपना उचित स्थान ग्रहण करेगा, जहाँ सनातन धर्म केंद्र में होगा; यह भविष्यवाणी वर्ष 1998 में महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म (डॉ.) आठवले द्वारा की गई थी अब वह वर्ष 2025 से सत्य में साकार होती दिख रही है सच्चिदानंद परब्रह्म (डॉ.) आठवले को धर्म और आध्यात्मिकता के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए ‘‘धर्म अलंकार पुरस्कार’’ और “माँ पटन देवी सम्मान” से सम्मानित किया गया। इस सन्मान का स्वीकार सद्गुरु नीलेश सिंगबाळ ने किया

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