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नियोजन नीति और JTET में मैथिली भाषा को स्थान दिलाने की उठी मांग, संघर्ष समिति ने मंत्रियों को सौंपा ज्ञापन

झारखण्ड की नियोजन नीति और शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) में मैथिली भाषा की अनदेखी के बाद भाषाई संगठनों का विरोध तेज हो गया है। सरकारी विद्यालयों के लिए स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा जारी JTET नियमावली में जिलावार जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं की सूची से मैथिली को बाहर रखे जाने के खिलाफ ‘मैथिली भाषा संघर्ष समिति, झारखंड’ ने मोर्चा खोल दिया है। 13 मई 2026 को समिति के प्रदेश महासचिव पंकज कुमार झा के नेतृत्व में एक शिष्टमंडल ने राज्य सरकार द्वारा गठित अनुशंसा समिति के सदस्यों से मुलाकात कर अपना सात सूत्रीय ज्ञापन सौंपा

नियोजन नीति और JTET में मैथिली भाषा को स्थान दिलाने की उठी मांग, संघर्ष समिति ने मंत्रियों को सौंपा ज्ञापन

रांची- झारखण्ड की नियोजन नीति और शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) में मैथिली भाषा की अनदेखी के बाद भाषाई संगठनों का विरोध तेज हो गया है। सरकारी विद्यालयों के लिए स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा जारी JTET नियमावली में जिलावार जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं की सूची से मैथिली को बाहर रखे जाने के खिलाफ ‘मैथिली भाषा संघर्ष समिति, झारखंड’ ने मोर्चा खोल दिया है। 13 मई 2026 को समिति के प्रदेश महासचिव पंकज कुमार झा के नेतृत्व में एक शिष्टमंडल ने राज्य सरकार द्वारा गठित अनुशंसा समिति के सदस्यों से मुलाकात कर अपना सात सूत्रीय ज्ञापन सौंपा

JTET नियमावली में मैथिली को दरकिनार करने का विरोध
हाल ही में झारखंड कैबिनेट द्वारा JTET नियमावली को स्वीकृति प्रदान करने के बाद परीक्षा के लिए आवेदन प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। लेकिन इस नियमावली की क्षेत्रीय भाषाओं की सूची में मैथिली को स्थान नहीं दिए जाने से मैथिल समाज में भारी रोष है। इस निर्णय के विरोध में उठ रही आवाजों को देखते हुए सरकार ने 28 अप्रैल 2026 की कैबिनेट बैठक में पांच सदस्यीय अनुशंसा समिति का गठन किया था। इस समिति के समन्वयक वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर हैं, जबकि ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार, श्रम एवं उद्योग मंत्री संजय यादव और पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेन्द्र प्रसाद इसके सदस्य हैं।

मंत्रियों से मुलाकात कर सौंपा गया 7 सूत्रीय ज्ञापन
मैथिली भाषा संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को अनुशंसा समिति की सदस्य दीपिका पांडेय सिंह और सुदिव्य कुमार से मुलाकात की। शिष्टमंडल ने मंत्रियों को मैथिली भाषा की प्राचीनता, साहित्यिक समृद्धि, संविधान की अष्टम अनुसूची में इसकी मान्यता और झारखंड में द्वितीय राजभाषा के रूप में प्राप्त दर्जे की विस्तृत जानकारी दी। ज्ञापन में स्पष्ट किया गया कि झारखंड के विभिन्न सरकारी विश्वविद्यालयों में मैथिली का पाठ्यक्रम पहले से संचालित है, इसलिए इसे JTET और नियोजन नीति में शामिल करना पूरी तरह से तथ्यात्मक एवं न्यायसंगत है।

पहले भी राजभवन और मंत्रियों तक पहुंचाई गई है आवाज
समिति ने इस दौरान याद दिलाया कि यह मांग नई नहीं है इससे पहले वर्ष 2023 में तत्कालीन राज्यपाल सी. पी. राधाकृष्णन को भी लगभग 7000 हस्ताक्षरों वाला ज्ञापन सौंपा गया था। इसके अलावा 20 जून 2025 को भी दीपिका पांडेय सिंह से मुलाकात कर प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा में मैथिली को अनिवार्य रूप से शामिल करने का विशेष आग्रह किया गया था।

अभियान में इन संस्थाओं की रही सक्रिय भूमिका
मैथिली भाषा को उसका हक दिलाने के इस महत्वपूर्ण अभियान में कई प्रमुख संस्थाएं एकजुट हैं। इस पहल को सफल बनाने में विद्यापति परिषद (बागबेड़ा) के अध्यक्ष अनूप मिश्रा ने अग्रणी भूमिका निभाई। इसके अलावा रांची से अंतर्राष्ट्रीय मैथिली परिषद के अध्यक्ष अमरनाथ झा सहित जमशेदपुर की प्रमुख संस्थाओं— मिथिला सांस्कृतिक परिषद, परमहंस लक्ष्मीनाथ गोस्वामी समिति एवं विद्यापति परिषद के पदाधिकारियों ने भी इसमें अपनी सक्रिय सहभागिता दर्ज कराई है

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