निजी स्कूलों में शिक्षा के बाजारीकरण के खिलाफ ‘शिक्षा उत्थान समिति’ का शंखनाद; सिदगोड़ा से हुई आंदोलन की शुरुआत
मुख्यमंत्री के नाम 1.5 लाख पोस्टकार्ड वितरण और भिक्षाटन कार्यक्रम का हुआ आगाज आजसू पार्टी के केंद्रीय सचिव चंद्रगुप्त सिंह ने पहला हस्ताक्षर कर आंदोलन को दिया समर्थन
निजी स्कूलों में शिक्षा के बाजारीकरण के खिलाफ ‘शिक्षा उत्थान समिति’ का शंखनाद; सिदगोड़ा से हुई आंदोलन की शुरुआत
मुख्यमंत्री के नाम 1.5 लाख पोस्टकार्ड वितरण और भिक्षाटन कार्यक्रम का हुआ आगाज
आजसू पार्टी के केंद्रीय सचिव चंद्रगुप्त सिंह ने पहला हस्ताक्षर कर आंदोलन को दिया समर्थन
जमशेदपुर- झारखंड के निजी स्कूलों द्वारा शिक्षा के बाजारीकरण, अनावश्यक पुस्तक परिवर्तन और अत्यधिक शुल्क वृद्धि के विरोध में आज ‘शिक्षा उत्थान समिति’ द्वारा एक विशाल आंदोलन की शुरुआत सिदगोड़ा (28 नंबर) से की गई। इस आंदोलन के तहत समिति द्वारा आम नागरिकों के बीच 1.5 लाख पोस्टकार्ड वितरण और भिक्षाटन कार्यक्रम का जोरदार आगाज किया गया।
इस आंदोलन के माध्यम से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पोस्टकार्ड भेजकर निजी विद्यालयों की मनमानी पर नियंत्रण लगाने की मांग की जा रही है। समिति की मुख्य मांगों में सीबीएसई (CBSC), आईसीएसई (ICSE) और राज्य बोर्ड आधारित सभी स्कूलों में कक्षावार और विषयवार समान पुस्तकें लागू करना, बार-बार पुस्तक बदलने पर रोक लगाना और स्कूलों द्वारा लिए जाने वाले री-एडमिशन और बिल्डिंग फंड को पूरी तरह से बंद करना शामिल है।
चंद्रगुप्त सिंह ने किया आंदोलन का समर्थन:
इस जन-आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन देते हुए आजसू पार्टी के केंद्रीय सचिव श्री चंद्रगुप्त सिंह जी कार्यक्रम में विशेष रूप से शामिल हुए। उन्होंने अपनी इच्छानुसार सहयोग राशि देकर भिक्षाटन कार्यक्रम की शुरुआत की और प्रथम पोस्टकार्ड पर अपना हस्ताक्षर करके इस मुहिम को आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि निजी स्कूलों की मनमानी से अभिभावकों पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ रहा है, जिसके खिलाफ राज्य स्तर पर एक स्पष्ट नीति और सख्त नियंत्रण व्यवस्था लागू होना बेहद जरूरी है।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपस्थित रहे:
इस गरिमामयी और संघर्षपूर्ण कार्यक्रम को सफल बनाने में मुख्य रूप से क्रांति सिंह, मनोज गुप्ता, सुनील सिंह चौहान, आजाद गिरी, दीपक गरवाल, कंचन सिंह, प्रीति घोष, शोभा सिंह समेत सैकड़ों की संख्या में क्षेत्रवासी, पीड़ित अभिभावक एवं संस्था के सक्रिय कार्यकर्ता मौजूद थे। सभी ने एक सुर में शिक्षा के व्यवसायीकरण के खिलाफ इस लड़ाई को और तेज करने का संकल्प लिया।




