नीट- यूजी के पेपर लीक का कौन है जिम्मेवार ? -धर्मेंद्र कुमार
युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ आखिर कब तक ?

नीट- यूजी के पेपर लीक का कौन है जिम्मेवार ? -धर्मेंद्र कुमार
युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ आखिर कब तक ?
नीट- यूजी जैसी परीक्षा किसी छात्र के लिए सिर्फ एक टेस्ट नहीं, बल्कि जीवन भर का सपना होता है। एक डॉक्टर बनने की तपस्या। इस परीक्षा की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि परीक्षार्थियों को बिना जेब वाले कपड़े पहनने, चप्पल में आने और कान की बाली तक उतारने के निर्देश दिए जाते हैं। मेटल डिटेक्टर, जैमर, बायोमेट्रिक अटेंडेंस—हर कदम पर ‘कदाचार मुक्त’ परीक्षा का दावा किया जाता है। लेकिन विडंबना देखिए, जहां छात्र की शर्ट की जेब पर शक किया जाता है, वहीं सिस्टम की पूरी तिजोरी में सेंध लगी हुई है। 2024 से नीट- यूजी के पेपर लीक का जो सिलसिला खुले तौर पर शुरू हुआ, वह अब एक पैटर्न बन चुका है। प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले टेलीग्राम चैनलों पर बिक रहे हैं, 30-30 लाख में सौदे हो रहे हैं, और मेहनत करने वाला छात्र ठगा हुआ महसूस कर रहा है। बड़ा सवाल है कि इस पेपर लीक खेल का असली जिम्मेवार कौन है ?
चूक कहां हो रही है ?
एनटीए जैसी केंद्रीय एजेंसी की जिम्मेदारी है कि वह देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा को पारदर्शी बनाए। लेकिन असल चूक वहीं हो रही है जहां सबसे ज्यादा चौकसी होनी चाहिए। पेपर सेटिंग से लेकर प्रिंटिंग प्रेस, ट्रांसपोर्टेशन और स्ट्रॉन्ग रूम तक। परीक्षा केंद्र पर छात्र की तलाशी लेने वाली एजेंसी, पूरे सिस्टम की तलाशी लेने में फेल हो रही है। इस मामले सरकार कितनी गंभीर है इस बात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि इतने बड़े खुलासों के बाद भी एजेंसी के शीर्ष अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। न कोई इस्तीफा, न कोई बर्खास्तगी। यह ‘जीरो टॉलरेंस’ नहीं, बल्कि ‘जीरो एक्शन’ है। जब गलती पर सजा नहीं मिलती, तो पदाधिकारियों का मनोबल बढ़ना स्वाभाविक है। उन्हें लगता है कि सिस्टम उनके साथ है।
पूरा सिस्टम बीमार है
पेपर लीक अब अपवाद नहीं, नियम बन गया है। पिछले 12 वर्षों का रिकॉर्ड देखें तो तस्वीर और डरावनी हो जाती है-
2015 | AIPMT/NEET | 700+ केंद्रों पर पेपर लीक, सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा रद्द की
2016 | SSC CGL | पेपर लीक, SSC मुख्यालय पर प्रदर्शन
2017 | CBSE Class 12 Economics | पेपर लीक, दोबारा परीक्षा
2018 | SSC CHSL, UP Police | लगातार लीक के मामले
2021 | NEET-UG | राजस्थान, यूपी में सॉल्वर गैंग पकड़े गए
2022 | UPTET, REET | परीक्षा से पहले पेपर वायरल, रद्द करनी पड़ी
2023 | JSSC CGL, बिहार सिपाही भर्ती | लीक के कारण परीक्षा रद्द
2024 | NEET-UG, UGC-NET | पेपर लीक, NTA पर सवाल, UGC-NET रद्द
2024 | झारखंड एक्साइज सिपाही भर्ती | परीक्षा से एक दिन पहले पेपर लीक
2024 | UP पुलिस कांस्टेबल भर्ती | 48 लाख अभ्यर्थी प्रभावित, परीक्षा रद्द
यह सूची बताती है कि शिक्षा माफियाओं का सिंडिकेट कितना तगड़ा और बेखौफ हो चुका है। बिहार से लेकर राजस्थान, यूपी से लेकर झारखंड—हर राज्य में इनके तार जुड़े हैं। सवाल है कि जब कोचिंग माफिया, प्रिंटिंग प्रेस, ट्रांसपोर्टर और अधिकारियों की मिलीभगत से पूरा नेटवर्क चल रहा है, और सरकार उसे तोड़ने असहाय दिख रही।
भ्रष्टाचार मुक्त भारत’ के दावे और हकीकत
केंद्र सरकार लगातार ‘भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस’ का दावा करती है। लेकिन NEET जैसा ‘छोटे स्तर’ का भ्रष्टाचार भी रोकने में वह नाकाम दिख रही है। अगर सरकार 24 लाख बच्चों के भविष्य से जुड़ी परीक्षा को सुरक्षित नहीं रख सकती, तो बड़े नीतिगत भ्रष्टाचार पर कार्रवाई के दावे कितने खोखले हैं, यह जनता खुद समझ सकती है। सरकार की चुप्पी भी एक संदेश है। जब हर लीक के बाद सरकार केवल ‘जांच कमेटी’ बनाकर मौन हो जाती है, तो इसे मौन स्वीकृति ही कहा जाएगा। न NTA का पुनर्गठन हुआ, न पेपर सेटिंग प्रक्रिया में आमूलचूल बदलाव। बस हर बार लाखों बच्चों को कहा जाता है—‘अगली बार मेहनत करना’।
युवाओं के साथ धोखा
यह केवल पेपर लीक नहीं, युवाओं के भरोसे और विश्वास के साथ खिलवाड़ है। एक छात्र 12-14 घंटे पढ़ता है, घर से दूर रहकर तैयारी करता है, मां-बाप खेत बेचकर फीस भरते हैं। और अंत में पता चलता है कि सीट पहले ही 30 लाख में बिक चुकी थी। लाखों छात्रों के साथ हुए इस अन्याय के लिए कहीं ना कहीं सरकार दोषी है इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता। सरकार यदि थोड़ी सख्त हो जाए, और परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों की जिम्मेवारी और जवाबदेही तय करे, की परीक्षा के पेपर लीक होने पर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी तो निश्चित रुप से पेपर लीक के खेल पर विराम लग सकता है।
सरकार को समझना होगा कि शिक्षा राष्ट्रनिर्माण की नींव है। अगर नींव में ही भ्रष्टाचार की दीमक लग गई, तो इमारत कितने दिन टिकेगी?
जब तक सरकार शिक्षा माफियाओं के सामने बौनी नजर आएगी, तब तक ‘विकसित भारत’ का सपना कागजों में ही लीक होता रहेगा। युवाओं के भविष्य से यह खिलवाड़ अब बंद होना चाहिए। कम से कम इस मामले में सरकार को गंभीर एवं संवेदनशील होने की आवश्यक्ता है।




