जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक सिर्फ उपायुक्त कार्यालय तक सिमट कर रह गई है – डॉ. परितोष सिंह
अन्ना चौक से चांदनी चौक तक की सड़क बनी 'खूनी हाईवे' दो वर्षों में चार युवाओं ने गंवाई जान गोविंदपुर में जल्द लगे नो एंट्री नहीं तो आंदोलन

जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक सिर्फ उपायुक्त कार्यालय तक सिमट कर रह गई है – डॉ. परितोष सिंह
अन्ना चौक से चांदनी चौक तक की सड़क बनी ‘खूनी हाईवे’ दो वर्षों में चार युवाओं ने गंवाई जान गोविंदपुर में जल्द लगे नो एंट्री नहीं तो आंदोलन
गोविंदपुर हाईवे पर हुए ताजा जानलेवा हादसे को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और जनता में भारी आक्रोश है। कल हुए इस दर्दनाक हादसे में गोविंदपुर के होनहार युवा नितिन मिश्रा की असामयिक और दर्दनाक मौत हो गई, जबकि धीरज ठाकुर गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनका इलाज चल रहा है। इस घटना पर गहरा दुख और रोष व्यक्त करते हुए कांग्रेस के प्रदेश कोऑर्डिनेटर सह गोविंदपुर के जिला परिषद सदस्य डॉ. परितोष सिंह ने जिला प्रशासन की कार्यशैली पर तीखे सवाल उठाए हैं।
डॉ. परितोष सिंह ने अपने कड़े बयान में कहा:अन्ना चौक से लेकर चांदनी चौक तक का यह हाईवे अब आम सड़क नहीं, बल्कि ‘खूनी हाईवे’ बन चुका है। पिछले दो वर्षों के भीतर इसी पैच पर चार युवाओं ने अपनी जान गंवाई है और सैकड़ों लोग दुर्घटनाग्रस्त होकर गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इसके बावजूद जिला प्रशासन की नींद नहीं टूट रही है।”
बैठकें केवल फाइलों तक सीमित, धरातल पर शून्य काम ,डॉ. सिंह ने आरोप लगाया कि जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठकें धरातल पर काम करने के बजाय सिर्फ उपायुक्त (DC) कार्यालय के बंद कमरों और फाइलों तक सिमट कर रह गई हैं। प्रशासन को शायद और युवाओं की मौत का इंतजार है, तभी तो इतनी दुर्घटनाओं के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है।
प्रमुख मांगें जो लंबे समय से हैं लंबित:
• नो-एंट्री (No Entry) के नियमों का सख्ती से पालन: भारी वाहनों के प्रवेश के समय को कड़ाई से नियंत्रित किया जाए।
• सुरक्षात्मक उपाय: सड़क पर स्पीड ब्रेकर, रिफ्लेक्टर, जेब्रा क्रॉसिंग और उचित लाइटिंग की व्यवस्था की जाए।
• दुर्घटना संभावित क्षेत्रों (Black Spots) का सुधारीकरण: अन्ना चौक से चांदनी चौक के बीच की कमियों को तुरंत दुरुस्त किया जाए।
जिला परिषद सदस्य ने प्रशासन को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा कि जिला प्रशासन अपनी चिरनिद्रा से तुरंत जागे। अगर हाईवे पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और नो-एंट्री को लेकर जल्द ही कोई ठोस पहल नहीं की गई, तो वे जनता के साथ मिलकर एक बड़ा जन आंदोलन शुरू करने को बाध्य होंगे। जनता के जान-माल की रक्षा के लिए वे किसी भी हद तक जाने को प्रतिबद्ध हैं।



