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बाल झड़ना थकान और मूड स्विंग्स कहीं थायरॉयड तो नहीं है वजह – डॉ. कल्याण कुमार कंसल्टेंट – जनरल मेडिसिन एवं डायबेटोलॉजी ब्रह्मानंद नारायणा अस्पताल जमशेदपुर

बाल झड़ना, लगातार थकान महसूस होना, बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन बढ़ना या घटना, तथा मूड में बार-बार बदलाव जैसी समस्याओं को अक्सर तनाव, बढ़ती उम्र, नींद की कमी या जीवनशैली से जोड़कर नजरअंदाज कर दिया जाता है। लेकिन कई मामलों में ये सामान्य दिखने वाली परेशानियां थायरॉयड विकार का संकेत हो सकती हैं। चूंकि इसके लक्षण धीरे-धीरे विकसित होते हैं और दैनिक जीवन की सामान्य समस्याओं से मिलते-जुलते हैं, इसलिए थायरॉयड संबंधी बीमारियां अक्सर शुरुआती चरण में पहचान में नहीं आ पातीं

बाल झड़ना थकान और मूड स्विंग्स कहीं थायरॉयड तो नहीं है वजह – डॉ. कल्याण कुमार, कंसल्टेंट – जनरल मेडिसिन एवं डायबेटोलॉजी , ब्रह्मानंद नारायणा अस्पताल, जमशेदपुर

बाल झड़ना, लगातार थकान महसूस होना, बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन बढ़ना या घटना, तथा मूड में बार-बार बदलाव जैसी समस्याओं को अक्सर तनाव, बढ़ती उम्र, नींद की कमी या जीवनशैली से जोड़कर नजरअंदाज कर दिया जाता है। लेकिन कई मामलों में ये सामान्य दिखने वाली परेशानियां थायरॉयड विकार का संकेत हो सकती हैं। चूंकि इसके लक्षण धीरे-धीरे विकसित होते हैं और दैनिक जीवन की सामान्य समस्याओं से मिलते-जुलते हैं, इसलिए थायरॉयड संबंधी बीमारियां अक्सर शुरुआती चरण में पहचान में नहीं आ पातीं

थायरॉयड ग्रंथि आकार में छोटी होने के बावजूद शरीर की चयापचय क्रिया (मेटाबॉलिज्म), ऊर्जा स्तर, हृदय गति और भावनात्मक संतुलन को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जब यह ग्रंथि आवश्यकता से कम (हाइपोथायरॉयडिज्म) या अधिक (हाइपरथायरॉयडिज्म) हार्मोन बनाने लगती है, तो शरीर के कई अंग और प्रणालियां प्रभावित हो सकती हैं।

प्रमुख लक्षण और कब रहें सतर्क
अत्यधिक बाल झड़ना थायरॉयड असंतुलन के शुरुआती संकेतों में से एक हो सकता है। हाइपोथायरॉयडिज्म में बाल रूखे, कमजोर और पतले होने लगते हैं। इसी प्रकार, खानपान में कोई विशेष बदलाव न होने के बावजूद वजन बढ़ना थायरॉयड की कमी का संकेत हो सकता है, जबकि अचानक वजन कम होना थायरॉयड हार्मोन की अधिकता की ओर इशारा कर सकता है।

थायरॉयड का असर मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। हाइपोथायरॉयडिज्म से अवसाद, एकाग्रता में कमी, उत्साह की कमी और मानसिक सुस्ती हो सकती है, जबकि हाइपरथायरॉयडिज्म चिंता, चिड़चिड़ापन और बेचैनी का कारण बन सकता है। पर्याप्त आराम के बाद भी बनी रहने वाली थकान को भी गंभीरता से लेना चाहिए।

इसके अतिरिक्त, त्वचा का शुष्क होना, कब्ज, ठंड अधिक लगना, महिलाओं में मासिक धर्म की अनियमितता और दिल की धड़कन तेज महसूस होना भी महत्वपूर्ण संकेत हो सकते हैं। गर्भावस्था, प्रसव के बाद की अवधि और रजोनिवृत्ति के दौरान महिलाओं में जोखिम अधिक होता है। जिन लोगों के परिवार में थायरॉयड या ऑटोइम्यून रोगों का इतिहास है, उनमें भी इसकी संभावना बढ़ जाती है, हालांकि यह समस्या किसी भी उम्र और लिंग के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है।

डॉ. कल्याण कुमार के अनुसार, कई लोग बाल झड़ने या थकान जैसी अलग-अलग समस्याओं के लिए चिकित्सकीय सलाह लेते हैं, लेकिन यह नहीं समझ पाते कि इन सभी के पीछे एक सामान्य हार्मोनल असंतुलन जिम्मेदार हो सकता है।

थायरॉयड की जांच अपेक्षाकृत सरल है और इसके लिए टीएसएच (TSH), टी3 (T3) और टी4 (T4) की रक्त जांच पर्याप्त होती है। अधिकांश थायरॉयड विकारों का उपचार दवाओं और नियमित निगरानी से प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। हालांकि सभी थायरॉयड रोगों को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, फिर भी संतुलित आहार में पर्याप्त आयोडीन का सेवन, बिना चिकित्सकीय सलाह के अनावश्यक सप्लीमेंट लेने से बचाव, तनाव प्रबंधन, नियमित शारीरिक गतिविधि और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच थायरॉयड को स्वस्थ रखने में मदद कर सकती है। जिन लोगों में जोखिम अधिक है या जिनमें लगातार लक्षण दिखाई देते हैं, उन्हें नियमित स्क्रीनिंग करानी चाहिए। समय पर जांच और उपचार न केवल लक्षणों को बढ़ने से रोकते हैं, बल्कि व्यक्ति को बेहतर ऊर्जा, मानसिक संतुलन और स्वस्थ जीवनशैली बनाए रखने में भी सहायता करते हैं।

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