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परमानेन्ट एवं लगातार चलने वाले कार्यों में ठेका से काम कराना को दंडनीय अपराध घोषित करने एवं मजदूरों का अधिकार को सुरक्षित करने के लिए आंदोलन हेतु श्रमिक संघो का एक जुट होना

ठेका मजदूरों से कराने पर मजदूरी दर का कोई ठिकाना नहीं है और 8 (आठ) घंटा से ज्यादा काम करने पर डबल मजदूरी तो मिलना दूर की बात सिंगल मजदूरी भी नहीं मिलता है। बोनस, छुट्टी, आदि मिलना तो ठेकेदारों के दया पर आधारित है। यह मजदूर अपना कोई भी दावा का प्रमाण सरकारी दफ्तर में न्यायालय में पेश नहीं कर सके , इसका कोई प्रमाण न्यायालय में प्रस्तुत नहीं कर सके

परमानेन्ट एवं लगातार चलने वाले कार्यों में ठेका से काम कराना को दंडनीय अपराध घोषित करने एवं मजदूरों का अधिकार को सुरक्षित करने के लिए आंदोलन हेतु श्रमिक संघो का एक जुट होना


जमशेदपुर – जितने भी उत्पादन एवं सेवा से जुड़े हुये कार्यों को भारत सरकार के मजदूर विरोधी नीति के कारण वर्ष 1991 से सभी परमानेन्ट एवं लगातार चलने वाले कार्यों को धड़ल्ले से ठेका के माध्यम से कराना शुरू कर दिया गया जबकि परमानेन्ट मजदूरों को मोटा मजदूरी, रहने के लिए क्वार्टर, चिकित्सा के लिए अस्पताल, पढ़ाई के लिए स्कूल की व्यवस्था के साथ-साथ प्रतिष्ठान के लाभों का एक बड़ा अंश बोनस के रूप में मजदूरों को मिलता है । साथ ही साथ मजदूर होने का पहचान के साथ दैनिक कार्य करने का प्रमाण भविष्य निधि में रकम जमा होने का प्रमाण मिलता है।

अब-जब वही कार्यों की ठेका मजदूरों से कराने पर मजदूरी दर का कोई ठिकाना नहीं है और 8 (आठ) घंटा से ज्यादा काम करने पर डबल मजदूरी तो मिलना दूर की बात सिंगल मजदूरी भी नहीं मिलता है। बोनस, छुट्टी, आदि मिलना तो ठेकेदारों के दया पर आधारित है। यह मजदूर अपना कोई भी दावा का प्रमाण सरकारी दफ्तर में न्यायालय में पेश नहीं कर सके , इसका कोई प्रमाण न्यायालय में प्रस्तुत नहीं कर सके । इसके लिए मजदूरों को ना सही-सही गेटपास और ना ही परिचय पत्र ही दिया जाता है और इसी सब कारण से पूरे देश में मजदूरों का जहाँ-तहाँ आंदोलन चल रहा है। इन मजदूरों का ना अपना व्यक्तिगत जीवन का कोई सुरक्षा है और ना ही नौकरी की कोई गांरटी की सुरक्षा है। हमलोगों का चार श्रमिक संगठन है, जिनमें क्रमशः
1) झारखण्ड श्रमिक संघ (जेएमएम)
2) झारखण्ड असंगठित मजदूर यूनियन (A.I.T.U.C.)
3) झारखण्ड वर्कर्स यूनियन
4) सिंहभूम ठेकेदार कामगार यूनियन शामिल है,जो (C.I.T.U.C.) मिलकर सभी मजदूरों को संगठित कर मजदूरों की सुरक्षा की गारंटी हो सके इसके लिए निम्नलिखित मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं । जैसा कि
(क) परमानेन्ट एवं लगातार चलने वाले कार्यों को ठेका से चलाने को गैर कानूनी घोषित करते हुये दंडनीय अपराध घोषित किया जाय।
(ख) पूरे राष्ट्र में एक सर्व भारतीय न्यूनतम मजदूरी अकुशल मजदूरों का प्रतिमाह 25000 रू० तत्काल तय किया जाय।
(ग) सभी मजदूरों के हित की रक्षा के लिये (i) मजदूरो को दैनिक हाजिरी के प्रमाण के लिये हाजिरी कार्ड देना ।
(i) मजदूर को मजदूर होने के प्रमाण के लिए मुख्य नियोजक द्वारा परिसर के अन्दर काम करने वाले मजदूरो को गेट पास तथा खुले में काम करने वाले मजदूरों को भी मुख्य नियोजक द्वारा आईडेन्टीटी कार्ड पाने का कानूनी हक बने ।
सभी मजदूर भाईयों से इस प्रेस वार्ता के मंच से हम श्रमिक संगठन अपील करते हैं कि चलो हम सब एक साथ संगठित होकर अपने हक को पाने के लिए मजदूरों का एक संयुक्त मंच बनाये। जमशेदपुर शहर के नोवोको सीमेन्ट प्लान्ट के परमानेन्ट एवं लगातार कार्य को करने वाले ठेका मजदूर अपना हक को पाने के लिए संगठित होकर आंदोलन चला रहे हैं और साथ ही साथ इन मजदूरों ने अपने से कमेटी बनाकर हाई कोर्ट रांची में मामला दायर किये हुये हैं। आज के संयुक्त विचार मंच के साथ-साथ प्रेस वार्ता में मजदूर प्रतिनिधियों के अलावे निम्नलिखित श्रमिक संगठनों ने भाग लिया और इसमें मुख्य रूप से तय किया गया है कि 1 मई को मजदूर दिवस में एक साथ मिलकर अगला आंदोलन की घोषणा की जायेगी संवाददाता सम्मेलन में मजदूर नेता शैलेन्द्र मैथी , एस० के० घोषाल ओम प्रकाश सिंह , नाग राजू सहित अन्य कई लोग शामिल थे

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