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लिटिल फ्लॉवर स्कूल: पहले न्यू एडमिशन से वसूले 12 हजार रुपये, अब पैरेंट्स से भरवाया जा रहा कंसेंट फॉर्म; भाजपा नेता अंकित आनंद ने फिर जताया विरोध, बाल आयोग में शिकायत

टेल्को स्थित लिटिल फ्लॉवर स्कूल एक बार फिर विवादों में है। “बिल्डिंग फंड” के नाम पर नए नामांकन वाले छात्रों के अभिभावकों से एकमुश्त ₹12,000 तक की वसूली का मामला बीते दिनों सामने आया था। अब इस मामले में फँसी स्कूल प्रबंधन बचाव के रास्ते खोजने में व्यस्त दिख रही है। स्कूल प्रबंधन ने अभिभावकों से वसूले गये अवैध धनराशि को लेकर कंसेंट फॉर्म भरवाना शुरू किया है

लिटिल फ्लॉवर स्कूल: पहले न्यू एडमिशन से वसूले 12 हजार रुपये, अब पैरेंट्स से भरवाया जा रहा कंसेंट फॉर्म; भाजपा नेता अंकित आनंद ने फिर जताया विरोध, बाल आयोग में शिकायत

जमशेदपुर- टेल्को स्थित लिटिल फ्लॉवर स्कूल एक बार फिर विवादों में है। “बिल्डिंग फंड” के नाम पर नए नामांकन वाले छात्रों के अभिभावकों से एकमुश्त ₹12,000 तक की वसूली का मामला बीते दिनों सामने आया था। अब इस मामले में फँसी स्कूल प्रबंधन बचाव के रास्ते खोजने में व्यस्त दिख रही है। स्कूल प्रबंधन ने अभिभावकों से वसूले गये अवैध धनराशि को लेकर कंसेंट फॉर्म भरवाना शुरू किया है। सूचना मिलते ही इस पूरे मामले को लेकर भाजपा नेता सह शिक्षा सत्याग्रह के संस्थापक अंकित आनंद ने उठाते हुए राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग समेत जिला प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत के अनुसार, अभिभावकों से की जा रही इस वसूली पर पहले ही जिला शिक्षा विभाग ने संज्ञान लेते हुए रोक लगाने का नोटिस जारी किया था। इसके बावजूद स्कूल प्रबंधन ने कथित रूप से नया तरीका अपनाते हुए अभिभावकों को स्कूल बुलाया और दबाव बनाकर “कंसेंट फॉर्म” पर हस्ताक्षर कराए, जिसमें यह दिखाया गया कि वे स्वेच्छा से राशि दे रहे हैं।
अंकित आनंद ने इस संबंध में उपायुक्त, जिला शिक्षा अधीक्षक, मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) समेत कई उच्च अधिकारियों को शिकायत भेजी है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि स्कूल प्रबंधन ने विभाग को भ्रामक जानकारी दी है और शिक्षा के अधिकार कानून सहित अन्य नियमों का उल्लंघन किया है।
शिकायतकर्ता ने मामले की उच्चस्तरीय जांच, जबरन लिए गए कंसेंट फॉर्म को अवैध घोषित करने, वसूली गई राशि वापस कराने और प्रबंधन के खिलाफ प्राथमिक दर्ज करने की मांग की है। साथ ही पिछले 10 वर्षों के वित्तीय लेनदेन की विशेष ऑडिट कराने का भी आग्रह किया गया है।
अंकित आनंद ने कहा कि “डर और दबाव में लिया गया कोई भी कंसेंट कानूनी रूप से मान्य नहीं है। अगर समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह शिक्षा व्यवस्था में गलत परंपरा को जन्म देगा

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