Welcome to न्यू झारखण्ड वाणी   Click to listen highlighted text! Welcome to न्यू झारखण्ड वाणी
Uncategorized

छात्र मानसिक स्वास्थ्य पर सुप्रीमकोर्ट सख्त, स्कूल-कॉलेजों में काउंसलर अनिवार्य, हेल्पलाइन नंबर प्रदर्शित करना जरूरी

देश में छात्र मानसिक स्वास्थ्य के बढ़ते संकट को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम निर्णय लेते हुए सभी शैक्षणिक संस्थानों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने 100 या उससे अधिक छात्रों वाले सभी स्कूलों और कॉलेजों में प्रशिक्षित काउंसलर, मनोवैज्ञानिक या बाल एवं किशोर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ सामाजिक कार्यकर्ता की नियुक्ति अनिवार्य कर दी है। साथ ही संस्थानों को हेल्पलाइन नंबर प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शित करने का निर्देश दिया गया है, ताकि जरूरत के समय छात्र तुरंत सहायता प्राप्त कर सकें

छात्र मानसिक स्वास्थ्य पर सुप्रीमकोर्ट सख्त, स्कूल-कॉलेजों में काउंसलर अनिवार्य, हेल्पलाइन नंबर प्रदर्शित करना जरूरी

जमशेदपुर- देश में छात्र मानसिक स्वास्थ्य के बढ़ते संकट को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम निर्णय लेते हुए सभी शैक्षणिक संस्थानों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने 100 या उससे अधिक छात्रों वाले सभी स्कूलों और कॉलेजों में प्रशिक्षित काउंसलर, मनोवैज्ञानिक या बाल एवं किशोर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ सामाजिक कार्यकर्ता की नियुक्ति अनिवार्य कर दी है। साथ ही संस्थानों को हेल्पलाइन नंबर प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शित करने का निर्देश दिया गया है, ताकि जरूरत के समय छात्र तुरंत सहायता प्राप्त कर सकें।

निर्देशों के अनुसार, छोटे शैक्षणिक संस्थानों को बाहरी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों से औपचारिक रूप से जुड़ने के लिए कहा गया है, जिससे संकट की स्थिति में छात्रों को समय पर परामर्श और सहयोग मिल सके। यह निर्णय देशभर में बढ़ती छात्र आत्महत्या की घटनाओं और मानसिक तनाव की चिंताओं के बीच लिया गया है।

इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए जमशेदपुर स्थित जीवन आत्महत्या निवारण केंद्र ने कहा है कि वह जल्द ही एक विशेष जागरूकता अभियान शुरू करेगा। संस्था छात्रों, अभिभावकों और शैक्षणिक संस्थानों से मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने और समय पर सहायता लेने की अपील करेगी। साथ ही स्कूलों और कॉलेजों को अपने परिसर में अपने हेल्पलाइन नंबर या फिर ‘जीवन’ के हेल्पलाइन नंबर—9297777499 और 9297777500—प्रदर्शित करने के लिए भी पत्र भेजे जाएंगे।

अदालत ने शैक्षणिक संस्थानों में निरंतर मनोवैज्ञानिक सहयोग सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक ढांचा भी निर्धारित किया है। इसके तहत संस्थानों को छात्र-परामर्शदाता अनुपात बनाए रखना होगा तथा परीक्षाओं और शैक्षणिक बदलाव के महत्वपूर्ण चरणों में विशेष मार्गदर्शन उपलब्ध कराना होगा। साथ ही प्रदर्शन के आधार पर बैच विभाजन, सार्वजनिक रूप से अपमानित करना और अवास्तविक शैक्षणिक अपेक्षाएं जैसी प्रथाओं को हतोत्साहित किया गया है।

अपने अपील में ‘जीवन’ केंद्र ने तनाव की शुरुआती पहचान, मानसिक स्वास्थ्य पर खुली बातचीत और सहायता लेने से जुड़े सामाजिक कलंक को समाप्त करने पर जोर दिया है। संस्था का मानना है कि जागरूकता और समय पर हस्तक्षेप के माध्यम से कई कीमती जिंदगियां बचाई जा सकती हैं और एक सशक्त शैक्षणिक वातावरण का निर्माण किया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्धारित समयसीमा के भीतर इन दिशा-निर्देशों को लागू करने का आदेश दिया है, जो छात्रों के समग्र कल्याण और आत्महत्या की घटनाओं की रोकथाम की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

‘जीवन’ केंद्र द्वारा प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक बिष्टुपुर, जमशेदपुर स्थित 25 क्यू रोड पर आमने-सामने परामर्श (बिफ्रेंडिंग) की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। इसके अलावा 9297777499 और 9297777500 हेल्पलाइन नंबरों के माध्यम से टेलीफोन और व्हाट्सऐप पर भी भावनात्मक सहयोग प्रदान किया जा रहा है, जिससे संकट में फंसे लोगों को तुरंत सहायता मिल सके।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!
Click to listen highlighted text!