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सोनबरसा राज अंचल कार्यालय के अधिकारियों अमीन कर्मचारी आर ओ के द्वारा मोटी रकम वसूलने के लिए लोगों को किया जाता है परेशान

मोटी रकम घुस लेकर ही करती है कोई काम सोशल मीडिया में सुर्खियों में छाए रहने वाले उप मुख्यमंत्री और भू राजस्व मंत्री विजय सिन्हा को मजाक बना कर रख दिए हैं

सहरसा- सोनबरसा- बिहार राज्य अंतर्गत सोनबरसा राज अंचल कार्यालय के अधिकारियों अमीन कर्मचारी आर ओ के द्वारा मोटी रकम वसूलने के लिए लोगों को किया जाता है परेशान

मोटी रकम घुस लेकर ही करती है कोई काम सोशल मीडिया में सुर्खियों में छाए रहने वाले उप मुख्यमंत्री और भू राजस्व मंत्री विजय सिन्हा को मजाक बना कर रख दिए हैं

अंचल कार्यालय में भूमि सुधार के नाम पर मोटी उगाही करने की भी जानकारी हैं,बिना घूस लिए काम नहीं करते अमीन कर्मचारी ,आर ओ और सी ओ ,दबंग और घुस के रु का साथ दे रहे हैं, अमीन कर्मचारी आर ओ और सी ओ , न्याय के लिए महीनों सालों से आश लगाकर बैठे है गरीब अपीलार्थी लेकिन अमीन कर्मचारी आर ओ सी ओ बिना मोटी रकम लिए काम नहीं करते हैं, बल्की निजी स्वार्थ से अपीलार्थी को झूठ बोलकर गुमराह करते हैं परेशान करते हैं, विपक्षी पार्टी से मोटी रकम लेकर अपीलार्थी आवेदक को उलझाने का काम करते हैं उचित न्याय से वंचित रखने का काम करते हैं जबकि कोई भी जमीन विवाद को अंचल अधिकारी और थाना प्रभारी को मिलकर समस्या को निपटारा करने की जिम्मेवारी होनी चाहिए

थाना द्वारा यह कह कर बात को टाल देना कि जमीन जायदाद का मैटर हमारा नहीं है,जो कि गलत है, यदि थाने पर कोई शिकायत जाती है,तो थाना को संज्ञान लेना आवश्यक है,दबंग लोगों के द्वारा जमीन कब्जा करने की बात हमेशा सामने आती है,गुंडई करने की बात सामने आती है,इसलिए थाना को अधिकार होनी चाहिए कि दोनों पक्षों का कागजात मंगा कर सत्यता की पुष्टि कर दोषी पर गैर जमानतीय मुकदमा कम से कम दस वर्ष सश्रम कारावास की सजा तय होनी चाहिए, थाना में आवेदन देने के बाद भी दोषी पर कार्रवाई नहीं करना दबंगई को बढ़ावा देना सिद्ध हो रहा है, यहां तक कि ऊपरी अदालत की बात भी अमान्य करने की भी सूचना प्राप्त हुई है, डीसीएलआर सहरसा का आदेश 458/23-24को महीनों लंबित रख कर सोनबरसा अंचल के आर ओ सैयद बादशाह ने निजी स्वार्थ से तैयार किया अमीन परीसा कुमारी और कर्मचारी उपेन्द्र कुमार के द्वारा संयुक्त भ्रामक प्रतिवेदन की दखल आवेदक का नहीं है,लिखकर बिपक्षी के द्वारा मोटी रकम लेकर रद्द कर दिया गया,इस तरह का कारोबार इन अधिकारियों के द्वारा बराबर प्रायः लोगों के साथ किया जाता है,और जमीन पर वाजिब लोगों को न्याय से वंचित रख कर स्वार्थ सिद्धि किया जाता है,लाल मोहन अमीन के भी द्वारा गलत तरीके से पंद्रह हजार रु बिपक्षी से लेकर न्याय का गला घोंटने की भी बात सामने आई है,सौरभ कुमार अंचल अधिकारी रसीद आलम मकरी निवासी को केवाला लाने के लिए बात कही थी,फिर बिपक्षी से मिलकर निजी स्वार्थ में रशीद आलम का दाखिल खारिज के आवेदन को समय से पहले रद्द कर कर दिया गया है, दस्तावेज दिखाने का मौका ही नहीं दिया गया जबकि वे दस्तावेज कोर्ट से निकालकर दिखाने के लिए रखे भी थे,इस बात की भी जांच कराई जा सकती है,ऐसी भ्रष्ट क्रिया कलाप वाले अधिकारी के द्वारा भू राजस्व मंत्री के आदेश को भी नहीं मानने यानि अमान्य करने की भी बात सामने आई है,ऐसे भ्रष्ट पदाधिकारी सब पर कानूनी करवाई करने की जरुरत है ऐसा भी एक अधिकारी के द्वारा कहा गया है कि दाखिल खारिज स्वीकृतियों में किसी की भी बात नहीं मानी जाएगी चाहे वो विभाग के सचिव ही क्यों न हो ,इस बात को अंचल कार्यालय स्थित सत्रह मार्च दो हजार छब्बीस का ऑफिस टाइम में सीसीटीवी कैमरे में कैद होने की भी आशंका है जो चेक भी किया जा सकता है,आपत्ति डालने वाला ही उपस्थित नहीं होता है फिर भी उसे अयोग्य घोषित नहीं किया जाता है

रपट जगन्नाथ मिश्रा

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