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शहर में प्रकृति और परंपरा के महापर्व सरहुल की धूम देखने को मिल रही है। आदिवासी समाज का यह प्रमुख पर्व पूरे उत्साह और आस्था के साथ मनाया जा रहा है
सुबह से ही पूजा स्थलों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी है, जहां विधि-विधान से प्रकृति की पूजा की जा रही है
जमशेदपुर- शहर में प्रकृति और परंपरा के महापर्व सरहुल की धूम देखने को मिल रही है। आदिवासी समाज का यह प्रमुख पर्व पूरे उत्साह और आस्था के साथ मनाया जा रहा है।
सुबह से ही पूजा स्थलों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी है, जहां विधि-विधान से प्रकृति की पूजा की जा रही है। सुबह की पहली किरण के साथ ही आदिवासी समाज के महिला और पुरुष पारंपरिक वेशभूषा में सज-धज कर पूजा स्थलों पर पहुंचे। यहां पाहन (पुजारी) द्वारा पूरे रीति-रिवाज के साथ साल वृक्ष और प्रकृति की पूजा की गई। सरहुल पर्व प्रकृति, पेड़-पौधों और धरती माता के प्रति आभार प्रकट करने का प्रतीक है। इस दौरान लोगों ने सुख-समृद्धि और अच्छी फसल की कामना की।पूजा स्थल पर पारंपरिक गीतों की गूंज और ढोल-नगाड़ों की थाप ने माहौल को और भी भक्तिमय बना दिया। महिलाएं सफेद-लाल साड़ी और पुरुष पारंपरिक परिधान में नजर आए, जो इस पर्व की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाते हैं। दिनभर पूजा-अर्चना और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सिलसिला जारी रहेगा। सरहुल के अवसर पर पूरे शहर में उत्सव जैसा माहौल है। हर तरफ खुशियों और उमंग का माहौल देखने को मिल रहा है। बच्चे, बुजुर्ग और युवा सभी इस पर्व में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं
वहीं, आज शाम करीब 4 बजे सरहुल महापर्व की भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। इस शोभायात्रा में हजारों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होंगे। ढोल-नगाड़ों और बैंड-बाजे के साथ लोग नाचते-गाते पूरे शहर का भ्रमण करेंगे। यह शोभायात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए एकता, संस्कृति और परंपरा का संदेश देगी।सरहुल केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा और प्रकृति से जुड़ाव का प्रतीक है। इस पर्व के माध्यम से लोग प्रकृति के संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जागरूकता का संदेश भी देते हैं।



