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पांच दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला: “ऊँची इमारतों के विश्लेषण एवं डिज़ाइन (ADTB-2026) 15–19 मार्च 2026

उदघाटन समारोह 19 मार्च 2026, अपराह्न 3:30 बजे राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) जमशेदपुर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग द्वारा 15 से 19 मार्च 2026 तक “ऊँची इमारतों के विश्लेषण एवं डिज़ाइन (Analysis and Design of Tall Buildings – ADTB-2026)” विषय पर पांच दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यशाला स्व-वित्तपोषित (Self-Sponsored) है और इसका उद्देश्य प्रतिभागियों को ऊँची इमारतों के विश्लेषण एवं डिज़ाइन से संबंधित मूलभूत तथा उन्नत अवधारणाओं से परिचित कराना है

पांच दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला: “ऊँची इमारतों के विश्लेषण एवं डिज़ाइन (ADTB-2026) 15–19 मार्च 2026

उदघाटन समारोह 19 मार्च 2026, अपराह्न 3:30 बजे
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) जमशेदपुर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग द्वारा 15 से 19 मार्च 2026 तक “ऊँची इमारतों के विश्लेषण एवं डिज़ाइन (Analysis and Design of Tall Buildings – ADTB-2026)” विषय पर पांच दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यशाला स्व-वित्तपोषित (Self-Sponsored) है और इसका उद्देश्य प्रतिभागियों को ऊँची इमारतों के विश्लेषण एवं डिज़ाइन से संबंधित मूलभूत तथा उन्नत अवधारणाओं से परिचित कराना है।

इस कार्यशाला के मुख्य संरक्षक (Chief Patron) प्रो. (डॉ.) गौतम सुत्रधर, निदेशक एनआईटी जमशेदपुर हैं।
संरक्षक (Patron) प्रो. (डॉ.) आर. वी. शर्मा, उपनिदेशक एनआईटी जमशेदपुर हैं।
सिविल इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष डॉ. प्रह्लाद प्रसाद हैं।
कार्यशाला के मुख्य अतिथि डॉ. विजय खोसे, वाइस प्रेसिडेंट, थॉर्नटन टोमासेट्टी (मुख्यालय: अमेरिका, भारत कार्यालय: पुणे) होंगे।

इस कार्यशाला के समन्वयक प्रो. (डॉ.) वीरेंद्र कुमार, डॉ. के. के. शर्मा एवं डॉ. ए. के. चौधरी हैं।
कार्यशाला के मुख्य उद्देश्य
इस कार्यशाला के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
ऊँची इमारतों के विश्लेषण एवं डिज़ाइन का मूलभूत अध्ययन कराना।
विभिन्न संरचनात्मक प्रणालियों के व्यवहार को समझना।
ऊँची इमारतों के डिज़ाइन की अवधारणाओं का व्यापक शैक्षणिक अनुभव प्रदान करना।
उच्च-ऊँचाई वाली इमारतों के लिए IS 16700: 2023 के मूलभूत प्रावधानों को समझना।
ऊँची इमारतों के डिज़ाइन में तर्कसंगत डिज़ाइन पद्धतियों का उपयोग सीखना।

यह कार्यशाला विशेष रूप से सिविल एवं आर्किटेक्चरल इंजीनियरिंग के स्नातक, स्नातकोत्तर, शोधार्थियों तथा पेशेवरों के लिए उपयोगी है।
व्याख्यान कार्यक्रम (Programme Schedule)
पाँच दिनों में विशेषज्ञों द्वारा कुल 8 आमंत्रित व्याख्यान सत्र आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें प्रत्येक सत्र की अवधि 2 घंटे है। प्रतिदिन एक सत्र प्रातःकाल तथा एक सत्र सायंकाल आयोजित किया जाएगा।
दिन 1 (सायंकालीन सत्र):
स्ट्रक्चरल सिस्टम्स – डॉ. विजय खोसे, वाइस प्रेसिडेंट, थॉर्नटन टोमासेट्टी, पुणे
दिन 2 (प्रातःकालीन सत्र):
IS 16700: 2023 के विभिन्न पहलू – डॉ. विजय खोसे, थॉर्नटन टोमासेट्टी, पुणे
दिन 2 (सायंकालीन सत्र):
विंड लोड्स: ऊँची इमारतों का एयरोडायनामिक्स – डॉ. रोमन बाबू ओइनाम, IIT गुवाहाटी
दिन 3 (प्रातःकालीन सत्र):
इमारतों के नॉन-लीनियर भूकंपीय विश्लेषण के मूल सिद्धांत – प्रो. रत्नेश कुमार, NIT नागपुर
दिन 3 (सायंकालीन सत्र):
टॉल आरसी इमारतों का भूकंप-रोधी डिज़ाइन – डॉ. पुतुल हलदार, IIT रोपड़
दिन 4 (प्रातःकालीन सत्र):
स्टील संरचनाओं का भूकंपीय डिज़ाइन – डॉ. पी. सी. अश्विन कुमार, IIT रूड़की
दिन 4 (सायंकालीन सत्र):
आरसीसी संरचनाओं का परफॉर्मेंस बेस्ड सिस्मिक डिज़ाइन – प्रो. योगेंद्र सिंह, IIT रूड़की
दिन 5 (प्रातःकालीन सत्र):
सॉइल-स्ट्रक्चर इंटरैक्शन: ऊँची इमारतों में अनुप्रयोग – डॉ. मुरली कृष्णा, IIT तिरुपति
कार्यशाला का उद्देश्य एवं लाभ
यह पाठ्यक्रम प्रतिभागियों को विभिन्न प्रकार की निर्माण सामग्री, कोड एवं मानकों के अनुसार संरचनात्मक सदस्यों के विश्लेषण एवं डिज़ाइन की समझ विकसित करने में सहायक होगा। साथ ही प्रतिभागियों को परफॉर्मेंस बेस्ड डिज़ाइन तथा आधुनिक संरचनात्मक विश्लेषण पद्धतियों की जानकारी प्राप्त होगी।
प्रतिभागी
इस राष्ट्रीय कार्यशाला में देश के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों, वैज्ञानिक संगठनों, उद्योगों तथा सरकारी एवं निजी निर्माण कंपनियों से शोधकर्ता एवं पेशेवर भाग ले रहे हैं। यह कार्यक्रम विशेष रूप से फैकल्टी, B.Tech./M.Tech./PhD छात्र, सिविल एवं आर्किटेक्चरल इंजीनियरिंग के पेशेवरों, वैज्ञानिकों एवं परामर्शदाताओं के लिए उपयोगी है।
कार्यशाला के समन्वयकों के अनुसार यह 5-दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला अपने उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूर्ण करेगी तथा प्रतिभागियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी, क्योंकि इसमें राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों के व्याख्यान तथा प्रतिभाशाली प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है।
कुल प्रतिभागियों की संख्या (ऑनलाइन एवं ऑफलाइन): 67

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