धूमधाम से संपन्न हुआ ‘श्री भवानारुशी स्वामी पूजा’ उत्सव, पद्मशाली समुदाय की सांस्कृतिक विरासत का भव्य प्रदर्शन
झारखंड राज्य पद्मशाली संगम के तत्वावधान में शहर के एग्रीको क्लब हाउस में ‘श्री भवानारुशी स्वामी पूजा’ का भव्य आयोजन किया गया। इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम में झारखंड समेत देश के विभिन्न हिस्सों से आए पद्मशाली समुदाय के लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया और अपनी परंपराओं को जीवंत किया

धूमधाम से संपन्न हुआ ‘श्री भवानारुशी स्वामी पूजा’ उत्सव, पद्मशाली समुदाय की सांस्कृतिक विरासत का भव्य प्रदर्शन

जमशेदपुर- झारखंड राज्य पद्मशाली संगम के तत्वावधान में शहर के एग्रीको क्लब हाउस में ‘श्री भवानारुशी स्वामी पूजा’ का भव्य आयोजन किया गया। इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम में झारखंड समेत देश के विभिन्न हिस्सों से आए पद्मशाली समुदाय के लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया और अपनी परंपराओं को जीवंत किया
कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 9 बजे वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान भवानारुशी स्वामी की विशेष पूजा-अर्चना से हुई। आयोजन का मुख्य उद्देश्य समुदाय की सांस्कृतिक जड़ों को संरक्षित करना और नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध विरासत से परिचित कराना रहा
इस गरिमामय अवसर पर अखिल भारतीय पद्मशाली संगम (ABPS), हैदराबाद के अध्यक्ष कोंडागटला स्वामी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में समाज की एकता, सांस्कृतिक पहचान और आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करने पर जोर दिया।
सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए एकजुट जरूरी
कार्यक्रम में ABPS के महासचिव नितिपल्ली वेंकट राव तथा रायपुर क्षेत्र पद्मशाली समाज के अध्यक्ष सह राष्ट्रीय सचिव गोपाल परसावर भी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। सभी अतिथियों ने झारखंड इकाई के प्रयासों की सराहना करते हुए समाज के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए एकजुट होकर कार्य करने का आहवान किया।
पूरे आयोजन का सफल संचालन झारखंड राज्य पद्मशाली संगम के अध्यक्ष तिप्पना संभा शिव राव के नेतृत्व में हुआ। उपाध्यक्ष नितिपल्ली शंकर राव एवं उनकी टीम ने अतिथियों के स्वागत से लेकर कार्यक्रम के सुचारू संचालन तक अहम भूमिका निभाई।
महाप्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का हुआ समापन
दोपहर 3 बजे महाप्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। इस आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत किया, बल्कि जमशेदपुर में पद्मशाली समुदाय की एकता और सांस्कृतिक पहचान की भी एक सशक्त मिसाल पेश की।



