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डॉ. मीनाक्षी मुंडा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में रखेंगी अंतरराष्ट्रीयकरण एवं आदिवासी प्रतिनिधित्व पर विचार

कोल्हान विश्वविद्यालय, चाईबासा के मानवशास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष (हेड इन-चार्ज) डॉ. मीनाक्षी मुंडा को Asia-Pacific Association for International Education (एशिया-पैसिफिक एसोसिएशन फॉर इंटरनेशनल एजुकेशन) के वर्ष 2026 के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन एवं प्रदर्शनी में पैनल वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया है। यह प्रतिष्ठित सम्मेलन 23 से 27 फरवरी 2026 तक Hong Kong Convention and Exhibition Centre, Hong Kong में आयोजित होगा। डॉ. मुंडा 22 फरवरी को हांगकांग के लिए प्रस्थान करेंगी

डॉ. मीनाक्षी मुंडा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में रखेंगी अंतरराष्ट्रीयकरण एवं आदिवासी प्रतिनिधित्व पर विचार

चाईबासा- कोल्हान विश्वविद्यालय, चाईबासा के मानवशास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष (हेड इन-चार्ज) डॉ. मीनाक्षी मुंडा को Asia-Pacific Association for International Education (एशिया-पैसिफिक एसोसिएशन फॉर इंटरनेशनल एजुकेशन) के वर्ष 2026 के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन एवं प्रदर्शनी में पैनल वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया है। यह प्रतिष्ठित सम्मेलन 23 से 27 फरवरी 2026 तक Hong Kong Convention and Exhibition Centre, Hong Kong में आयोजित होगा। डॉ. मुंडा 22 फरवरी को हांगकांग के लिए प्रस्थान करेंगी।
इस वैश्विक सम्मेलन में 65 से अधिक देशों और क्षेत्रों के 2,500 से अधिक प्रतिनिधियों के भाग लेने की संभावना है। इसमें विश्वभर के विश्वविद्यालयों के कुलपति, शिक्षाविद, नीति-निर्माता, शोधकर्ता एवं अंतरराष्ट्रीय शिक्षा विशेषज्ञ शामिल होंगे।
डॉ. मुंडा 24 फरवरी को प्रातः 8:30 बजे से 9:15 बजे तक आयोजित सत्र “Conception to Action: Indigenous Pathways in International Education” में पैनल चर्चा में भाग लेंगी। इस सत्र में न्यूज़ीलैंड के यूनिवर्सिटी ऑफ वाइकाटो की डिप्टी वाइस चांसलर (माओरी) प्रो. सारा-जेन टियाकिवाई तथा नेपाल के लुंबिनी बौद्ध विश्वविद्यालय के फैकल्टी एवं शोधकर्ता नबराज लामा भी पैनलिस्ट के रूप में शामिल होंगे। सत्र की अध्यक्षता Asia-Pacific Association for International Education, ऑस्ट्रेलिया की ग्लोबल एंगेजमेंट मैनेजर लुसिंडा मालगास करेंगी।
सत्र की अवधारणा के अनुसार यह प्रस्तुति अंतरराष्ट्रीय शिक्षा में आदिवासी समुदायों के साथ प्रामाणिक सहभागिता के महत्व को रेखांकित करती है। माओरी, नेपाली और भारतीय आदिवासी दृष्टिकोणों के आधार पर यह सत्र वैचारिक सोच से लेकर व्यावहारिक क्रियान्वयन तक की प्रक्रिया को स्पष्ट करेगा। इसमें बताया जाएगा कि किस प्रकार आदिवासी विश्वदृष्टि वैश्विक शिक्षा को प्रभावित करती है, जिसमें सांस्कृतिक अखंडता, पारस्परिकता और सामुदायिक हित को विशेष महत्व दिया जाता है।
सत्र के दौरान ठोस उदाहरणों के माध्यम से सांस्कृतिक रूप से आधारित शैक्षणिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों की रूपरेखा और उनके क्रियान्वयन की प्रक्रिया प्रस्तुत की जाएगी। प्रतिभागियों को समावेशी एवं सम्मानजनक कार्यक्रमों के निर्माण की रणनीतियों पर मार्गदर्शन मिलेगा तथा वैश्विक साझेदारियों में आदिवासी मूल्यों को समाहित करने के उपायों पर चर्चा होगी। यह सत्र अंतरराष्ट्रीय शिक्षा को परिवर्तनकारी स्वरूप देने की दिशा में एक मार्गदर्शक के रूप में कार्य करेगा।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2026 के इस सम्मेलन की थीम “Asia-Pacific Partnerships for the Global Good” है, जिसका उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों के बीच क्षेत्रीय एवं वैश्विक सहयोग को सुदृढ़ करना, छात्र एवं शिक्षक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना तथा सतत विकास सहित वैश्विक चुनौतियों पर सार्थक संवाद स्थापित करना है।
डॉ. मीनाक्षी मुंडा की इस अंतरराष्ट्रीय सहभागिता को कोल्हान विश्वविद्यालय के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इससे विश्वविद्यालय की वैश्विक शैक्षणिक पहचान को मजबूती मिलेगी तथा झारखंड के आदिवासी समाज और उनकी ज्ञान परंपराओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सशक्त अभिव्यक्ति प्राप्त होगी।
कोल्हान विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. (डॉ.) अंजिला गुप्ता ने डॉ. मुंडा को इस उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं और उनके सफल सहभागिता की कामना की।

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