अष्टलक्ष्मी दर्शन युवा विनिमय कार्यक्रम के सातवें दिन प्रतिभागियों ने लोक भवन इटानगर का दौरा किया
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल कैवल्य त्रिविक्रम परनाइक से शिष्टाचार भेंट की

अष्टलक्ष्मी दर्शन युवा विनिमय कार्यक्रम के सातवें दिन प्रतिभागियों ने लोक भवन इटानगर का दौरा किया और राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल कैवल्य त्रिविक्रम परनाइक से शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर टीम झारखंड ने सोहराय कला और बाबा बैद्यनाथ धाम का चित्र भेंट किया और डॉ. झा द्वारा लिखित पुस्तक Living in Relationship: Navigating the New Norms of Partnership की प्रति प्रस्तुत की।

कार्यक्रम में भारत की “विविधता में एकता” को दर्शाती रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ आयोजित की गईं। टीम झारखंड की मोन्द्रिता चटर्जी ने कथक नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी, जिसमें राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और स्टील सिटी जमशेदपुर के महत्व को प्रदर्शित किया गया।

संवाद सत्र के दौरान मोन्द्रिता चटर्जी ने वैश्वीकरण के युग में संस्कृति की भूमिका और युवाओं द्वारा परंपरा और आधुनिकता के संतुलन पर प्रश्न किया। राज्यपाल ने सांस्कृतिक जड़ों को संरक्षित रखते हुए प्रगति और नवाचार को अपनाने का महत्व बताया।

टीम झारखंड के दीपक राम ने प्रश्न किया कि अरुणाचल प्रदेश आर्थिक और सामाजिक विकास करते हुए अपने वन, नदियों, वन्यजीवों और प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा कैसे कर सकता है, और झारखंड और अरुणाचल जैसे जनजातीय बहुल राज्य सतत विकास हेतु किस प्रकार सहयोग कर सकते हैं। राज्यपाल ने पर्यावरण-संवेदनशील विकास, सामुदायिक सहभागिता और सांस्कृतिक समझ पर आधारित अंतर-राज्यीय सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।
दौरे का समापन समूह फोटो और चाय संवाद के साथ हुआ। दिन का अनुभव प्रतिभागियों के लिए अत्यंत प्रेरणादायी और ज्ञानवर्धक रहा, जिसने शासन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, सतत विकास और सामाजिक उत्तरदायित्व की दृष्टि से गहरी समझ प्रदान की




