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फ्री लीगल एड कमेटी के अध्यक्ष प्रेमचंद का आज सुबह टाटा मेन हॉस्पिटल में देहांत हो गया

वे पिछले दो महीने से अस्पताल में इलाजरत थे। निमोनिया की शिकायत पर वे अस्पताल में दाखिल हुए थे। परंतु इलाज के दौरान पता चला कि उनका हार्ट अच्छी तरह काम नहीं कर रहा है। उनका इलाज टीएमएच के कैथलैब में हो रहा था

जमशेदपुर- फ्री लीगल एड कमेटी के अध्यक्ष प्रेमचंद का आज सुबह टाटा मेन हॉस्पिटल में देहांत हो गया। वे पिछले दो महीने से अस्पताल में इलाजरत थे। निमोनिया की शिकायत पर वे अस्पताल में दाखिल हुए थे। परंतु इलाज के दौरान पता चला कि उनका हार्ट अच्छी तरह काम नहीं कर रहा है। उनका इलाज टीएमएच के कैथलैब में हो रहा था। आज सुबह करीब 10:00 बजे उन्होंने अंतिम सांसें लीं। झारखंड में डायन प्रथा के अंधविश्वास के खिलाफ उन्होंने अपना पूरा जीवन दे दिया। यहां तक कि उन्होंने विवाह भी नहीं किया। उन्होंने डायन प्रथा उन्मूलन के लिए कानून भी बनवाया, इसमें उनका सहयोग फ्री लीगल एड कमेटी के महासचिव एडवोकेट जी एस जायसवाल ने किया। विचाराधीन कैदियों के साथ होने वाले मानवाधिकार हनन का प्रेमचंद जी ने फ्री लीगल एड कमेटी के सदस्य जवाहरलाल शर्मा के साथ सुप्रीम कोर्ट तक मामला उठाया। उन्होंने बिना कसूर जेल में सड़ रहे विचाराधीन कैदियों को न्याय दिलवाया तथा बड़ी संख्या में उनकी रिहाई करवाई। प्रेमचंद जी की सबसे बड़ी उपलब्धि पद्मश्री छुटनी महतो बताई जाती हैं। डायन प्रताड़ना की शिकार छुटनी महतो को वे अपनी संस्था में ले गए और उसे ग्रास रूट में डायन प्रथा के खिलाफ लड़ने के लिए तैयार किया। छुटनी महतो ने डायन प्रथा उन्मूलन के लिए अभूतपूर्व काम किया। जिसके चलते भारत सरकार के राष्ट्रपति ने उन्हें पद्मश्री का अवार्ड दिया। प्रेमचंद जी अक्सर कहा करते थे कि छुटनी महतो उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि है। प्रेमचंद जी बनारस के मूल निवासी बताए जाते हैं। जेपी आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए वे जमशेदपुर आए और यहीं के होकर रह गए। उन्होंने विवाह नहीं किया यह तो सब लोग जानते हैं परंतु उनके परिवार के लोग बनारस में कहां हैं, इसकी जानकारी अधिकांश लोगों को नहीं है।

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