अबुआ दिशोम बजट झारखंड सरकार द्वारा 1.58 लाख करोड़ का अबुआ दिशोम बजट पेश किया गया। जिसमें सरकार का लक्ष्य पांच वर्षों में सकल राज्य घरेलू उत्पाद को दोगूना करना है। जो सिर्फ कागजी ही लगता है
क्योंकि केंद्रीय करों में ₹5,000 करोड़ से अधिक का हिस्सा न मिलना, जीएसटी और अन्य अनुदानों में कमी के कारण वित्तीय असंतुलन, और विकास की जगह केवल कागजी आंकड़ों का खेल होना लगता है। इसे दिशाहीन और व्यवसायियों के लिए उपेक्षित होना लगता है

अबुआ दिशोम बजट
जमशेदपुर- झारखंड सरकार द्वारा 1.58 लाख करोड़ का अबुआ दिशोम बजट पेश किया गया। जिसमें सरकार का लक्ष्य पांच वर्षों में सकल राज्य घरेलू उत्पाद को दोगूना करना है। जो सिर्फ कागजी ही लगता है। क्योंकि केंद्रीय करों में ₹5,000 करोड़ से अधिक का हिस्सा न मिलना, जीएसटी और अन्य अनुदानों में कमी के कारण वित्तीय असंतुलन, और विकास की जगह केवल कागजी आंकड़ों का खेल होना लगता है। इसे दिशाहीन और व्यवसायियों के लिए उपेक्षित होना लगता है। करदाताओं के लिए किसी भी प्रकार के सुविधाओं का प्रावधान का नाम होना भी करदाताओं को निराश कर रहा है। स्वास्थ्य और शिक्षा पर कोई लगाम ना होना और ना ही कोई पुख्ता प्रावधान पेश करना जनहित के लिए निराशा जनक है। किसानों के लिए बजट और विकास की पहल स्वागत योग्य है। पर्यटन क्षेत्र के असीम संभावना के मद्देनजर जो अनुशंसा की गई है अगर धरातल पर आ गया तो पर्यटन के क्षेत्र आय करने वाले राज्यों में झारखंड भी अग्रणी पंक्ति में आ जाएगा।
इस बजट में सबसे ज्यादा समाजिक कल्याण पर पैसे का आवंटन किया है। इससे उम्मीद की जा सकती है कि समाज के सभी वर्गों पर सरकार का ध्यान रहेगा और समानांतर विकास होगा। भीम राव अम्बेडकर विश्वविद्यालय खोलने की घोषणा एक सकारात्मक पहल है जिससे स्थानीय छात्रों को गतिशीलता प्रदान होगी। पूर्व के वादों को पूरा करने में विफलता और इस साल की घोषणाओं के ज़मीनी स्तर पर क्रियान्वयन (Execution) पर सवाल उत्पन्न होना वास्तविकता से अलग नहीं लगता।
इस बजट में ओबीसी समुदाय के संवैधानिक अधिकारों के लिए कोई भी अनुशंसा ना होना एक बड़े जनसमूह को उपेक्षित करना प्रतित हो रहा है। उक्त बयान सुजीत शर्मा महामंत्री भारतीय ओबीसी विचार मंच ने दी है




