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आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका के मानदेय और प्रोन्नति का मुद्दा विधायक संजीव सरदार ने सदन में उठाया

विधायक संजीव सरदार के प्रश्न पर सरकार ने कहा महिला पर्यवेक्षिका के रिक्त पदों पर जल्द होगी नियुक्ति

आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका के मानदेय और प्रोन्नति का मुद्दा विधायक संजीव सरदार ने सदन में उठाया

विधायक संजीव सरदार के प्रश्न पर सरकार ने कहा महिला पर्यवेक्षिका के रिक्त पदों पर जल्द होगी नियुक्ति

रांची- पोटका विधायक संजीव सरदार द्वारा झारखंड विधानसभा में पूछे गए अल्पसूचित प्रश्न के उत्तर में महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग ने आंगनबाड़ी सेविका एवं सहायिकाओं की स्थिति, मानदेय एवं प्रोन्नति से संबंधित विस्तृत जानकारी सदन में प्रस्तुत की। विधायक ने पूरे राज्य में बड़ी संख्या में कार्यरत आंगनबाड़ी कर्मियों के हितों, मानदेय वृद्धि एवं सेवा सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया।

मानदेय और वार्षिक वृद्धि का विवरण

सरकार ने सदन में बताया कि वर्तमान में राज्य में 75,625 आंगनबाड़ी सेविका एवं सहायिकाएं कार्यरत हैं। विभागीय अधिसूचना के तहत मानदेय निर्धारित किया गया है। वर्तमान में आंगनबाड़ी सेविका को प्रतिमाह ₹11,500 तथा सहायिका को ₹5,750 मानदेय दिया जा रहा है। साथ ही, सेविका के मानदेय में प्रतिवर्ष ₹500 एवं सहायिका के मानदेय में ₹250 की वृद्धि का प्रावधान है, जो प्रत्येक वर्ष जुलाई माह से प्रभावी होता है।

25 प्रतिशत पदों पर प्रोन्नति का प्रावधान

विधायक श्री सरदार के सवाल पर विभाग ने स्पष्ट किया कि झारखंड आंगनबाड़ी सेविका/सहायिका चयन नियमावली 2022 के तहत 10 वर्ष की सेवा पूर्ण कर अर्हता रखने वाली सेविकाओं को महिला पर्यवेक्षिका के 25 प्रतिशत पदों पर सीमित प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से नियुक्ति का अवसर दिया जाता है। वर्तमान में 64 रिक्त पदों पर नियुक्ति हेतु अधियाचना झारखंड कर्मचारी चयन आयोग को भेजी गई है।

कर्मियों के सम्मान और अधिकारों की रक्षा को प्रतिबद्ध – संजीव सरदार

विधायक संजीव सरदार ने सदन में कहा कि आंगनबाड़ी सेविका एवं सहायिकाएं ग्रामीण स्तर पर महिला एवं बाल विकास की आधारशिला हैं। उन्होंने “समान काम के लिए समान वेतन”, सेवा सुरक्षा, ईपीएफ, बीमा, भविष्य निधि तथा अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभों पर सरकार से सकारात्मक पहल की मांग की। उन्होंने स्पष्ट किया कि कर्मियों के अधिकारों और सम्मानजनक मानदेय सुनिश्चित करने के लिए वे आगे भी सदन में आवाज उठाते रहेंगे।विधानसभा में उठाया गया यह प्रश्न आंगनबाड़ी कर्मियों के हित में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

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